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गिल्लू

यह पाठ महादेवी वर्मा द्वारा लिखा गया है, जिसमें एक गिलहरी के स्वास्थ्य और जीवन के प्रति लेखिका की भावनाएँ दर्शाई गई हैं। गिल्लू नामक इस गिलहरी का उसके साथ विशेष संबंध है, जो हमें जीवन के प्रति संवेदनशीलता सिखाता है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 9
Hindi
Sanchayan

गिल्लू

Author: महादेवी वर्मा

Chapter Summary

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More about chapter "गिल्लू"

महादेवी वर्मा की कृति 'गिल्लू' हमे जीवन के छोटे लेकिन महत्वपूर्ण पहलुओं की ओर ध्यान खींचती है। सोनजुही के पीले कली ने लेखिका को एक गिलहरी के बारे में स्मरण दिलाया, जिसके घायल होने के बाद उसने उसे अपने पास रख लिया। जैसे-जैसे गिल्लू धीरे-धीरे ठीक हुआ, उसका और लेखिका का संबंध और गहरा होता गया। लेखिका ने गिल्लू को पाले और उसे स्वतंत्रता दी, लेकिन उसकी सुरक्षा की चिंता भी बनी रही। इस पाठ में गिल्लू केवल एक गिलहरी नहीं, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत बन जाता है। अंत में, उसकी मृत्यु पर लेखिका का दुःख दर्शाता है कि कैसे एक जीव ने उसके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। यह कहानी प्रेम, दया और जीवन के अंत के नैतिक पाठों को व्यक्त करती है।
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गिल्लू: महादेवी वर्मा की गिलहरी की कथा

महादेवी वर्मा द्वारा ‘गिल्लू’ में गिलहरी और लेखिका के बीच की भावनाओं को दर्शाया गया है। जानिए इस कथा के शरदार संबंधों और दयालुता की शिक्षाएँ।

गिल्लू का नाम लेखिका द्वारा उसकी जातिवाचक संज्ञा को व्यक्तिवाचक स्वरूप देने से रखा गया। जब गिलहरी के स्निग्ध रोएँ, झब्बेदार पूँछ और चमकीली आँखें सभी को विस्मित करने लगीं, तब उसे गिल्लू कहकर बुलाना आरम्भ किया।
गिलहरी के घायल बच्चे का उपचार करने के लिए लेखिका ने उसे अपने कमरे में लाकर, रुई से रक्त को पोंछकर घावों पर पेनिसिलिन का मरहम लगाया। इसके बाद उन्होंने उसकी मुंह में दूध की बूँद डालने की कोशिश की।
सोनजुही में लगी पीली कली को देखकर लेखिका को उस छोटे जीव का स्मरण हो आया, जो इस लता की हरियाली में छिपा रहता था। उसे लगा कि यह कली वही गिलहरी हो सकती है, जिससे वह खेलती थी।
कौए को समादृत और अनादृत दोनों माना गया क्योंकि इसे सम्मान के साथ पितृपक्ष में पूजा जाता है, वहीं इसका नाम अवमानना के लिए भी किया जाता है। इसलिए यह पक्षी विशेष रूप से विख्यात है।
गिल्लू ने लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए खुद को उसकी ओर खींचने का एक उपाय खोज निकाला। वह लेखिका के पैरों तक पहुँचकर तेजी से चौकड़ी मारकर परदे पर चढ़ जाता और फिर तेजी से उतरता।
लेखिका को लगा कि गिल्लू को मुक्त करना आवश्यक है क्योंकि उसका गिलहरी की अन्य गिलहरियों के साथ अपनापन दिखाना और स्वतंत्रता की आवश्यकता महसूस होना इसकी स्थिति को दर्शाता था।
गिल्लू ने परिचारिका की भूमिका निभाते हुए लेखिका के सिर और बालों को अपनी नन्हीं पंजों से सहलाया, जिससे उसकी देखभाल और गहरी संवेदनशीलता का अहसास होता था।
गिल्लू की चेष्टाओं से अंत समय का आभास इस प्रकार हुआ कि वह अपने झूले से उतरकर लेखिका के पास आया और पहले की तरह खेलने या बाहर जाने में रुचि नहीं दिखाई।
गिलहरियों की जीवन अवधि दो वर्ष से अधिक नहीं होती। गिल्लू की जीवन यात्रा भी इसी अवधि में समाप्त हो गई, जो लेखिका की संवेदनाओं को दर्शाता है।
गिल्लू की मृत्यु के समय उसका संबंध लेखिका के प्रति गहरा था। उसने अपनी ठंडी पंजों से लेखिका की उँगली पकड़ी, जिसे उसने अपनी बचपन की मरणासन्न स्थिति में पकड़ा था।
'प्रभात की प्रथम किरण के स्पर्श के साथ' का अर्थ है कि जब पहली भोर की किरण गिलहरी को छूती है, तब वह नए जीवन में जागने के लिए सो जाता है, उसका निधन हो जाता है।
लेखिका ने गिल्लू को समाधि देने के लिए सोनजुही की लता के नीचे स्थान चुना, क्योंकि यह लता गिल्लू को प्रिय थी और इससे एक भावनात्मक संबंध जुड़ा था।
गिल्लू का प्रिय भोजन काजू था। कई दिन तक काजू न मिलने पर उसने खाने की अन्य चीजें लेना बंद कर दिया या उन्हें झूले से नीचे फेंक दिया।
गिल्लू खाना खाते समय लेखिका की थाली में बैठना चाहता था। लेखिका ने उसे थाली के निकट बैठने का प्रशिक्षण दिया, जहाँ वह चाव से चावल उठाकर खाने लगा।
गिल्लू गर्मियों में लेखिका के पास रखी सुराही पर लेटकर ठंडक प्राप्त करता था। इस प्रकार, वह उसकी निकटता में भी रह पाता था और ठंडक भी प्राप्त करता था।
गिलहरी की नासमझी ने लेखिका को परेशानी में डाला, क्योंकि उसे बचाने की कोशिश में लेखिका को बहुत सावधानी बरतनी पड़ी, विशेषकर जब वह अक्सर परियों या अन्य खतरों से बचती थी।
गिल्लू के जीवित रहते हुए लेखिका के अनुभव ने उसे जीवन के प्रति संवेदनशीलता और दयालुता का पाठ पढ़ाया। इससे उसे जानवरों और प्रकृति के प्रति गहरे सरोकार का एहसास हुआ।
लेखिका के लिए गिल्लू की यादें भावनात्मक और गहन हैं। उसकी देखभाल और साथ ने उसे संवेदनशीलता का अनुभव कराया और यह अनुभव अब उसकी यादों में अमिट है।
गिल्लू का समापन लेखिका के लिए जीवन की अनिश्चितता और उसकी नाजुकता का संदेश भरता है, यह दर्शाता है कि जीवन के छोटे जीवों से भी गहरा प्रेम और संबंध विकसित हो सकता है।
गिल्लू के जीवन के दौरान लेखिका की मानसिकता में दया, प्रेम और संवेदनशीलता का विकास हुआ, जो उसकी लेखनी में भी परिलक्षित होता है।
जी हाँ, गिल्लू के साथ खेलना लेखिका को विश्राम और खुशी देता था। उनकी सरल और मासूम हरकतें उसे अपने दिन-प्रतिदिन की चिंताओं से दूर ले जाती थीं।
हाँ, लेखिका को गिल्लू की मृत्यु से गहरा दुःख हुआ। उसने अपने अतिक्रियाशील साथी को खो दिया, जिससे उसे बहुत निकटता और प्रेम था।
लेखिका गिल्लू की तुलना अन्य जानवरों से इस प्रकार करती है कि वह अपने अन्य पालतू जीवों से अधिक निकटता और मानवीय संबंध प्रदर्शित करता था।
गिलहरी का जीवन और लेखिका का जीवन आपस में जुड़ा हुआ है, क्योंकि गिल्लू केवल एक जानवर नहीं, बल्कि एक साथी और शिक्षिका के रूप में उसकी भावनाओं का निपुणता से अद्ययन करता है।

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