Brand Logo
Login
Search
Brand Logo

Edzy for Classes 6-12

Edzy is a personal AI tutor for CBSE and State Board students, with curriculum-aligned guidance, practice, revision, and study plans that adapt to each learner.

  • Email: always@edzy.ai
  • Phone: +91 96256 68472
  • WhatsApp: +91 96256 68472
  • Address: Sector 63, Gurgaon, Haryana

Follow Edzy

Browse by Class

  • CBSE Class 6
  • CBSE Class 7
  • CBSE Class 8
  • CBSE Class 9
  • CBSE Class 10
  • CBSE Class 11
  • CBSE Class 12
Explore the CBSE resource hub

Explore Edzy

  • About Us
  • Why We Built Edzy
  • Search Learning Resources
  • Blog
  • CBSE News & Updates
  • Contact Us
  • CBSE AI Tutor
  • CBSE Resource Hub

Support & Legal

  • Help & FAQs
  • Accessibility
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Cookie Policy
  • Site Directory

© 2026 Edzy. All rights reserved.

Curriculum-aligned learning paths for students in Classes 6-12.

Chapter Hub

भ्रान्तो बालः

यह पाठ 'भ्रान्तो बालः' एक ऐसे बच्चे की कहानी है जो क्रीड़ा में रुचि रखता है, लेकिन उसके साथी अपने कार्यों में व्यस्त हैं। यह पाठ स्वावलंबन और कार्य की महत्वपूर्णता पर जोर देता है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 9
Sanskrit
Shemushi Prathmo Bhag

भ्रान्तो बालः

Download NCERT Chapter PDF for भ्रान्तो बालः – Latest Edition

Access Free NCERT PDFs & Study Material on Edzy – Official, Anytime, Anywhere

Live Challenge Mode

Ready to Duel?

Challenge friends on the same chapter, answer fast, and sharpen your concepts in a focused 1v1 battle.

NCERT-aligned questions
Perfect for friends and classmates

Why start now

Quick, competitive practice with instant momentum and zero setup.

More about chapter "भ्रान्तो बालः"

कथा 'भ्रान्तो बालः' एक ऐसे बालक की है जो क्रीड़ायाम अधिक रुचि रखता है। इसका साथी उसे स्वाध्याय में लिप्त देखकर उसके साथ खेलने से वंचित हो जाते हैं, जिससे वह अकेलापन महसूस करता है। वह एक उद्यान में जाता है और वहाँ मधुकर को खेलने के लिए बुलाता है, परंतु मधुकर उसकी आवाज़ को नजरअंदाज कर देता है। फिर वह एक चटक के पास जाता है, उससे क्रीड़ा के लिए अनुरोध करता है लेकिन चटक अपने कार्य में व्यस्त है। यह स्थिति उसे सोचने पर मजबूर करती है कि सभी अपने-अपने कार्यों में व्यस्त हैं, और उसे भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए। अंततः, वह विद्यालय जाने का निर्णय लेता है और ज्ञान की ओर अग्रसर होता है।
Learn Better On The App
Free learning flow

Learn Without Limits

Access NCERT content for free with a cleaner, faster way to revise every day.

Chapter summaries
Revision tools

Faster access to practice, revision, and daily study flow.

Edzy mobile app preview

भ्रान्तो बालः - क्रीड़ा एवं शिक्षा का संतुलन

पाठ 'भ्रान्तो बालः' शिक्षा और क्रीड़ा के बीच के संतुलन के महत्व को दर्शाता है। यह कहानी बच्चों को स्वावलंबन और जिम्मेदारियों के बारे में सिखाती है।

कथा 'भ्रान्तो बालः' में मुख्य पात्र एक बच्चा है जो खेल को पसंद करता है, और उसके साथी जो अपने-अपने कार्यों में व्यस्त हैं। इसके अलावा, मधुकर और चटक भी महत्वपूर्ण पात्र हैं जो उसके क्रीड़ा के प्रयासों को नजरअंदाज करते हैं।
इस कथा का मुख्य संदेश यह है कि हर किसी को अपने कार्यों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और साथ ही समय का सदुपयोग करके स्वावलंबी होना चाहिए। खेल से इतर, अध्ययन और जिम्मेदारियों को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।
जब बालक अपने दोस्तों के साथ खेलना चाहता है और वे अपने कार्यों में व्यस्त होते हैं, तब वह अकेलापन महसूस करता है। यह स्थिति उसे सोचने पर मजबूर करती है कि उसके साथी कैसे अपनी जिम्मेदारियों में लिप्त हैं।
बालक ने मधुकर को खेल के लिए बुलाया क्योंकि उसने देखा कि मधुकर फूलों के रस में व्यस्त है और उसे अपने खेलने का साथी चाहिए था। परंतु मधुकर ने उसे नजरअंदाज कर दिया।
अपने अकेलेपन और निराशा को महसूस करने के बाद, बालक ने यह सोचा कि यदि सभी अपने कार्यों में व्यस्त हैं, तो उसे भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए, जिसने उसे विद्यालय जाने के लिए प्रेरित किया।
यह कथा छात्रों को यह सिखाती है कि खेल और शिक्षा दोनों का महत्व है। छात्रों को अपनी पसंदीदा गतिविधियों के साथ-साथ शिक्षा और जिम्मेदारियों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
बालक ने अपने अकेलेपन को लेकर यह मानसिकता बनाई कि उसे भी अपने कार्यों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, जिससे उसने विद्यालय जाकर शिक्षा पर ध्यान देने का निर्णय लिया।
स्वस्वकार्यस्य महत्त्वम् का अर्थ है अपने कार्यों की जिम्मेदारी लेना और उन्हें पूरा करना आवश्यक है। यह कहानी इस विचार को उजागर करती है कि खेल के साथ-साथ शिक्षा भी जरूरी है।
'भ्रान्तः' का अर्थ है भ्रमित या उलझित। यह शब्द कहानी के बालक की स्थिति को व्यक्त करता है, जो खेल में रुचि के बावजूद अपने दोस्तों की व्यस्तता से परेशान होता है।
बालक ने चटक से कहा कि वह क्रीड़ावालों की तरह उसके साथ खेलने आए, और उसे खाने के लिए स्वादिष्ट चीजें देने का आश्वासन दिया, लेकिन चटक अपने कार्य में व्यस्त था।
जब बालक ने देखा कि सभी अपने कार्यों में लिप्त हैं और वह अकेला रह गया है, तब उसके मन में विचार आया कि उसे भी अपने अध्ययन पर ध्यान देना चाहिए, जिससे उसने विद्यालय जाने का निर्णय लिया।
कहानी में आलस्य का संदर्भ तब मिलता है जब बालक को अपने साथी आलसी लगते हैं, जो खेल की बजाय पढ़ाई में लगे हैं। यह कुण्ठा और निराशा की स्थिति को दर्शाता है।
कथा में मित्रता का महत्व इस रूप में दर्शाया गया है कि बालक अपने दोस्तों को खेल में शामिल करने की कोशिश करता है, लेकिन जब वे अपने कार्य में व्यस्त होते हैं, तो वह अकेला महसूस करता है।
हाँ, कहानी ने सकारात्मक पहलुओं को जैसे कि जिम्मेदारियों को स्वीकारना, मूल्यवान समय का सदुपयोग, और शिक्षा का महत्व उजागर किया है। ये सभी पहलू बच्चों को प्रेरित करते हैं।
जी हाँ, यह कथा बच्चों को प्रेरित करती है कि खेल के साथ-साथ पढ़ाई भी महत्वपूर्ण है। यह उन्हें अपने दैनिक कार्यों का ध्यान रखने के लिए प्रेरित करती है।
कथा का सामाजिक दृष्टिकोण यह है कि समाज में हर व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है और सभी को अपने कार्यों में संलग्न रहना चाहिए। यह दृष्टिकोण बच्चों को अपने व्यक्तिगत कार्यों के प्रति जागरूक बनाता है।
कथा में शैक्षिक पहलू यह है कि बालक को समझ आता है कि उसे भी पढ़ाई में ध्यान देना चाहिए और अपने ज्ञान को बढ़ाना चाहिए, जो उसे आगे बढ़ने में मदद करता है।
कथा का संदेश है कि खेल और शिक्षा दोनों का संतुलन बनाना आवश्यक है। बच्चों को अपनी रुचियों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए।
बालक ने अलगाव, निराशा, और अलस्य का अनुभव किया, जब उसके साथी उसके साथ खेलने के बजाय अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इस स्थिति ने उसे बदलने की प्रेरणा दी।
बालक ने विद्यालय जाने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि उसने महसूस किया कि उसके साथी पढ़ाई कर रहे हैं और इसलिए उसे भी अपने अध्ययन पर ध्यान देना चाहिए।
कथानक का प्रायोजन बच्चों को प्रेरित करना है कि उन्हें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और अपनी रुचियों को बरकरार रखते हुए शिक्षा को भी महत्व देना चाहिए।
भ्रान्तो बालः के यथार्थता का प्रमाण यह है कि हर बच्चा खेल से प्यार करता है और कभी-कभी पढ़ाई में ध्यान देने में विफल रहता है, यह आज की बच्चों की वास्तविकता को दर्शाता है।
कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी कार्य का पालन करना अनिवार्य है और शिक्षा का महत्त्व समझना चाहिए। खेल का भी अपना स्थान है, परंतु जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Chapters related to "भ्रान्तो बालः"

भारतीवसन्तगीतिः

इस अध्याय में भारत की सांस्कृतिक धरोहर और संस्कृत साहित्य का महत्व वर्णित किया गया है। यह छात्रों को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूकता और गर्व प्रदान करता है।

Start chapter

स्वर्णकाकः

स्वर्णकाकः उपाध्याय में एक सुनहरी कौआ का चरित्र वर्णित है जो महत्वपूर्ण जीवन शिक्षाएँ प्रदान करता है। यह अध्याय नैतिक मूल्यों का विकास करने में सहायक है।

Start chapter

गोदोहनम्

यः गोदोहनम् अनुच्छेदः, कृषकस्य गोधनस्य मात्रा च महत्वं दर्शयति। अत्र गोपालनस्य उपादानानि च वर्णितानि।

Start chapter

सूक्तिमौक्तिकम्

सूक्तिमौक्तिकम् अध्याय में महत्वपूर्ण शिक्षाओं और विचारों को प्रस्तुत किया गया है जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हैं। यह अध्याय विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और नैतिकता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

Start chapter

लौहतुला

इस पाठ में लौहतुला के गुण और उसके महत्व पर चर्चा की गई है। यह छात्रों को विज्ञान के मूल सिद्धांतों को समझने में मदद करता है।

Start chapter

सिक्तासेतुः

सिक्तासेतुः अध्याय में धर्म, न्याय और मानव व्यवहार के सिद्धांतों की व्याख्या की गई है। यह छात्रों को संस्कृत文 और नैतिक शिक्षा के महत्व को समझाने में मदद करता है।

Start chapter

जटायोः शौर्यम्

इयं कथा जटायुः नामक चक्रपाणिनः प्रशंसा, वीर्यस्य परिचय, तथा रामायणे महत्वपूर्ण अस्तित्वं प्रदर्शयति।

Start chapter

पर्यावरणम्

अयं अध्यायः पर्यावरणस्य अन्वेषणं करोति च वायुमण्डलस्य संरक्षणं आवश्यकतां दर्शयति।

Start chapter

वाड्मनः प्राणस्वरूपम्

अयं अध्यायः वाड्मनः प्राणस्वरूपम् इत्यस्मिन् अध्याये मानवजीवानां समस्त गुणाः च अध्ययनं करोति। एषः पाठः अत्यन्तं आवश्यकः अस्ति।

Start chapter

भ्रान्तो बालः Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

Question Bank

Worksheet

Revision Guide