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अव्यय

अव्यय अध्याय में संस्कृत के अव्यय पदों की व्याख्या की गई है। यह अध्याय 'क्त्वा', 'ल्यप्', 'चित्' और 'चन' प्रत्ययों के उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझाता है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 9
Sanskrit
Vyakaranavithi

अव्यय

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More about chapter "अव्यय"

अव्यय अध्याय में अव्यय शब्दों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। यह अध्याय 'क्त्वा' प्रत्यय के उपयोग को दर्शाता है, जो किसी कार्य को करने के अर्थ में आता है, जैसे 'पठित्वा' (पढ़कर)। साथ ही, इसमें 'ल्यप्' प्रत्यय का भी उल्लेख है, जो उपसर्ग वाले धातुओं के साथ उपयोग होता है। इसके अतिरिक्त, प्रश्नवाचक शब्दों को अनिश्चितवाचक बनाने के लिए 'चित्' और 'चन' निपातों का प्रयोग भी समझाया गया है। संख्यावाची शब्दों के लिंग भेद और उनके रूपों का भी विवेचन किया गया है। अंत में, 'तरप्' और 'तमप्' प्रत्ययों से तुलनात्मक शब्दों की निर्माण प्रक्रिया पर चर्चा की गई है।
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Class 9 Sanskrit Chapter on अव्यय - Vyakaranavithi

Explore the Chapter अव्यय in Class 9 Sanskrit from Vyakaranavithi, covering crucial concepts like 'क्त्वा' and 'ल्यप्' पाणिनीय अन्विति.

अव्यय का अर्थ है ऐसे शब्द जो लिंग, वचन, या विभक्ति में परिवर्तित नहीं होते हैं। ये शब्द अन्य पदों के साथ मिलकर अर्थ का निर्माण करते हैं।
‘क्त्वा’ प्रत्यय का प्रयोग किसी कार्य को करके बताने के लिए किया जाता है। जैसे 'पठित्वा' का अर्थ है 'पढ़कर'।
जब धातु के पहले उपसर्ग होता है, तो 'ल्यप्' प्रत्यय का उपयोग किया जाता है। इसके बिना 'क्त्वा' का प्रयोग करने का कोई आधार नहीं है।
‘चित्’ और ‘चन’ निपातों का उपयोग प्रश्नवाचक शब्दों को अनिश्चितवाचक बनाने में किया जाता है। उदाहरण के लिए, 'कः' + 'चन' = 'कश्चन'।
संख्यावाची शब्द एक से चार तक पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, और नपुंसक लिंग में विविध रूपों में होते हैं, लेकिन पाँच से अधिक में सभी लिंगों में एक समान रूप में उपस्थित होते हैं।
तरप् और तमप् प्रत्ययों का उपयोग तुलनात्मक विशेषणों में किया जाता है, जैसे 'बलवत्' + 'तरप्' = 'बलवत्तर'।
अव्यय शब्दों का गठन विशिष्ट निपातों और अन्य शब्दों के साथ मिलकर होता है, जो इनकी पहचान को सुनिश्चित करता है।
‘गच्छति’ का विभिन्न विभक्तियों में रूप बदलता है, जैसे 'गच्छन्ति', 'गच्छतः', 'गच्छताम्' आदि।
'कश्चन' और 'कश्चित्' दोनों प्रश्नवाचक शब्दों के अनिश्चितवाचक रूप हैं, लेकिन व्याकरणिक संदर्भ में उनके उपयोग अलग-अलग होते हैं।
'पठि' धातु के रूपों में 'पठित्वा', 'पठति', 'पठन्ति' शामिल हैं, जो क्रमशः भिन्न लिंग और वचन में प्रयोग होते हैं।
यह पंक्ति स्त्रीलिंग में 'गच्छ' धातु के विभिन्न रूपों को दर्शाती है, जो क्रमशः एकवचन, द्विवचन और बहुवचन के लिए हैं।
‘क्वचित्’ शब्द का अर्थ है 'कहीं', जो अनिश्चितवाचक रूप में प्रयुक्त होता है।
‘निर्’ उपसर्ग का कार्य 'गमन' का बोध कराना है, जब इसे किसी धातु के साथ जोड़ा जाता है।
'कर्ण' एक धातु है, और यदि इसे उपसर्ग के साथ मिलाया जाए, तो प्रत्यय 'ल्यप्' का प्रयोग होगा, जैसे 'उपकर्ण्य'।
अव्यय वे शब्द होते हैं जो अपने रूपों में परिवर्तन नहीं करते, जबकि क्रिया शब्द अलग-अलग रूपों में बदल सकती है।
संख्यावाची शब्द का उपयोग संख्याओं को व्यक्त करने के लिए किया जाता है, जैसे एक, दो, तीन, और उनके विभिन्न रूप।
‘जल’ एक अव्यय शब्द है और इसका कोई प्रत्यय नहीं है। यह शब्द पूर्ववर्ती शब्दों में समाहित होता है।
'महत्तर' का मतलब है 'सबसे बड़ा', जो कि 'महत्' और 'तरप्' का संयुक्त रूप है।
'का' स्त्रीलिंग के लिए है, जबकि 'काय' का अर्थ 'कौन' के लिए प्रयोग होता है। दोनों का आधार प्रश्नवाचक है।
'कश्चित्' का प्रयोग किसी व्यक्ति या वस्तु को अनिश्चित करने के लिए किया जाता है, जिससे वाक्य का अर्थ बदलता है।
'गच्छन्' एक पुल्लिंग शब्द है जो क्रिया के लिए प्रयोग होता है, जैसे 'वह गच्छन् हैं।'
'द्वौ' का स्त्रीलिंग रूप 'द्वे' होगा, जिसका प्रयोग द्विवचन के लिए किया जाता है।
'कदाचित्' एक निपात है जिसका अर्थ 'कभी' होता है, जिससे किसी घटना की अनिश्चितता बताई जाती है।
'मधुर' का तुलनात्मक रूप 'मधुरतर' है, जो अधिकता का बोध कराता है।
'कश्चन' तब प्रयोग किया जाता है जब किसी विशेष व्यक्ति के बारे में अनिश्चितता दर्शानी हो।

Chapters related to "अव्यय"

सन्धि - व्यंजन (हल्) सन्धि

इस अध्याय में व्यंजन सन्धि की विशेषताओं और नियमों का वर्णन किया गया है। यह संस्कृत व्याकरण का महत्वपूर्ण भाग है, जिससे शब्दों की संरचना में सुधार होता है।

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सन्धि - विसर्ग सन्धि

अध्‍याय में विसर्ग सन्धि का परिचय दिया गया है। यह सन्धि शब्दों के बीच में समझ और उच्चारण में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण है।

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यह अध्याय शब्दों के रूपों का परिचय देता है। यह समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि शब्दों की सही पहचान और उपयोग भाषा में संप्रेषण की स्पष्टता बढ़ाता है।

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इस अध्‍याय में धातुरूपों का सामान्‍य परिचय दिया गया है। यह समस्‍त धातुओं की रूप-रचनाओं को समझने में मदद करता है।

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उपसर्ग

उपसर्ग अध्याय में शब्दों के अर्थ परिवर्तन की प्रक्रिया को समझाया गया है। उपसर्गों का उपयोग करके शब्दों के नए अर्थ उत्पन्न होते हैं, जो भाषा की गहराई को दर्शाते हैं।

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प्रत्यय - कृत प्रत्यय

अध्याय में कृत प्रत्यय के बारे में जानकारी दी गई है, जो कि धातुओं और शब्दों के साथ जुड़कर नए अर्थ उत्पन्न करता है। यह विषय संस्कृत व्याकरण में महत्वपूर्ण है।

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इस अध्याय में तद्धित प्रत्ययों का अध्ययन किया गया है, जो धातु या शब्द के बाद जुड़ते हैं। ये महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ये शब्दों के अर्थ को विस्तारित करते हैं।

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इस अध्याय में प्रत्यय के विषय में बताया गया है, जो शब्दों या धातुओं के अंत में जुड़ते हैं। यह अध्याय संस्कृत भाषा में शब्दों के निर्माण की प्रक्रिया को समझने में सहायक है।

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इस अध्याय में कारक और विभक्ति का महत्व बताया गया है। यह व्याकरण के मूलभूत तत्वों में से एक है, जो वाक्य के अर्थ को स्पष्ट करने में मदद करता है।

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अव्यय Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

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