Brand Logo
LoginDownload App
Search
Brand Logo

Edzy for Classes 6-12

Edzy is a personal AI tutor for CBSE and State Board students, with curriculum-aligned guidance, practice, revision, and study plans that adapt to each learner.

  • Email: always@edzy.ai
  • Phone: +91 96256 68472
  • WhatsApp: +91 96256 68472
  • Address: Sector 63, Gurgaon, Haryana

Follow Edzy

Browse by Class

  • CBSE Class 6
  • CBSE Class 7
  • CBSE Class 8
  • CBSE Class 9
  • CBSE Class 10
  • CBSE Class 11
  • CBSE Class 12
Explore the CBSE resource hub

Explore Edzy

  • Study Resources
  • Free Study Tools
  • Best Apps for Board Exams
  • Edzy vs ChatGPT
  • About Us
  • Why We Built Edzy
  • Blog
  • CBSE AI Tutor

Support & Legal

  • Help & FAQs
  • Accessibility
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Cookie Policy
  • Site Directory

© 2026 Edzy. All rights reserved.

Curriculum-aligned learning paths for students in Classes 6-12.

Chapter Hub

उपसर्ग

इस अध्याय में उपसर्गों का अध्ययन किया गया है, जो शब्दों के अर्थ को परिवर्तित करते हैं। उपसर्गों के प्रयोग से बनने वाले विभिन्न शब्दों और उनके अर्थ को समझाया गया है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 9
Sanskrit
Vyakaranavithi

उपसर्ग

Download NCERT Chapter PDF for उपसर्ग – Latest Edition

Access Free NCERT PDFs & Study Material on Edzy – Official, Anytime, Anywhere

Live Challenge Mode

Ready to Duel?

Challenge friends on the same chapter, answer fast, and sharpen your concepts in a focused 1v1 battle.

NCERT-aligned questions
Perfect for friends and classmates

Why start now

Quick, competitive practice with instant momentum and zero setup.

More about chapter "उपसर्ग"

इस अध्याय में उपसर्गों की परिभाषा और उनके महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है। उपसर्ग वे शब्द होते हैं, जो धातु रूपों के पहले लगाए जाते हैं और शब्द के अर्थ में परिवर्तन करते हैं। उदाहरण के लिए, 'हार' शब्द में विभिन्न उपसर्गों जैसे 'प्र', 'आ', 'सम', तथा 'वि' लगाकर नए अर्थ उत्पन्न होते हैं। अध्याय में उपसर्गों की विभिन्न श्रेणियाँ और उनके उदाहरण भी दिए गए हैं, जैसे 'प्र' से 'प्रहार' और 'आ' से 'आहार'। विद्यार्थियों को उपसर्गों के उपयोग का ज्ञान कराते हुए इसमें वाक्य निर्माण करने का अभ्यास भी शामिल किया गया है। इस प्रकार, यह अध्याय भाषा के परिवर्तनीयता को समझने में सहायक है।
Learn Better On The App
Competitive revision

Challenge Your Friends

Compete in short duels with fast rounds, instant feedback, and zero boredom.

1v1 challenges
Fast recall training

Faster access to practice, revision, and daily study flow.

Edzy mobile app preview

उपसर्ग - Class 9 Sanskrit Vyakaranavithi

इस अध्याय में उपसर्गों का अध्ययन किया गया है, जो शब्दों के अर्थ को परिवर्तित करते हैं। उपसर्गों के प्रयोग और उनके उदाहरणों के साथ, यह अध्याय सही भाषा उपयोग में सहायक है।

उपसर्ग वे शब्द होते हैं जो धातु रूपों के पहले जोड़े जाते हैं, जिससे शब्द का अर्थ बदल जाता है। उदाहरण के लिए, 'हार' में 'प्र' जोड़कर 'प्रहार' बना, जिसका अर्थ होता है 'मारना'।
उपसर्गों का प्रयोग धातुओं के पूर्व किया जाता है। जब उपसर्ग किसी धातु से जुड़ता है, तो वह नए शब्द का निर्माण करता है और शब्द का अर्थ बदलता है।
उपसर्ग 'प्र' का अर्थ है 'आगे'। इसके प्रयोग से 'प्रहार' बना, जिसका अर्थ होता है 'मारना' या 'प्रभाव डालना'।
जब कोई उपसर्ग किसी मूल धातु से जोड़ा जाता है, तो वह उसके अर्थ को परिवर्तित करके एक नया शब्द उत्पन्न करता है। उदाहरण स्वरूप, 'आ' उपसर्ग लगा तो 'आहार' बना, जिसका अर्थ 'भोजन' है।
उपसर्ग 'सम्' का इस्तेमाल 'संहार' शब्द में होता है, जिसका अर्थ है 'नष्ट करना'। इसका प्रयोग विशेष रूप से क्रियाओं के संदर्भ में किया जाता है।
उपसर्गों की कई श्रेणियाँ हैं, जैसे 'प्र', 'वि', 'परि', 'अनु', आदि। प्रत्येक उपसर्ग के अपने विशेष अर्थ और उपयोग होते हैं।
नहीं, उपसर्गों का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता। वे हमेशा किसी धातु के साथ जुड़े होते हैं, जिससे नया शब्द और नया अर्थ बनता है।
उपसर्ग 'अव' का उदाहरण 'अवगच्छति' है, जिसका अर्थ है 'समझना'। इसका प्रयोग समझने की क्रिया में किया जाता है।
उपसर्गों के अध्ययन से विद्यार्थियों को भाषा में शब्दों के निर्माण और अर्थ को समझने में मदद मिलती है, जिससे वे भाषा के प्रयोग में कुशल होते हैं।
उपसर्ग 'निस्' का अर्थ 'बाहर' है। जब इसे 'निष्कारणम्' शब्द में जोड़ा जाता है, तो इसका अर्थ होता है 'बिना कारण के'।
उपसर्ग 'उत्' का उदाहरण 'उड्डयते' है, जिसका अर्थ है 'उड़ना'। इसका प्रयोग पशुओं और मानवों की उड़ान के संदर्भ में किया जाता है।
उपसर्ग 'सम्' के जोड़ने से 'संहार' शब्द बनता है, जिसका अर्थ है 'नष्ट करना'। यह द्वंद्व या विकृति को दर्शाता है।
उपसर्ग 'उप' का प्रयोग 'उपकर्षण' शब्द में होता है, जिसका अर्थ है 'नज़दीक आना' या 'आगामी'।
उपसर्ग 'दुर्' का उदाहरण 'दुर्वोध्य' है, जिसका अर्थ है 'जो समझ में नहीं आता'। इसका प्रयोग उन चीजों के संदर्भ में होता है जो कठिन हैं।
उपसर्ग 'अति' का अर्थ है 'अधिक'। उदाहरण के लिए, 'अतिवाद' का अर्थ है 'बहुत अधिक बोलना'।
उपसर्ग 'आङ्' का उदाहरण 'आजीवन' है, जिसका अर्थ है 'जीवन भर'। इसका प्रयोग जीवन की निरंतरता को दर्शाने में किया जाता है।
उपसर्ग का प्रभाव शब्द के अर्थ को दृष्टिगत रूप से परिवर्तित करता है। यह मूल धातु के अर्थ को एक विशिष्ट संदर्भ में बदल देता है, जिससे शब्द का अर्थ विस्तारित होता है।
उपसर्ग का सही उपयोग करने के लिए विद्यार्थियों को धातु रूप की पहचान करनी चाहिए। इसके बाद उपसर्ग को उचित संदर्भ में जोड़कर नया शब्द निर्माण करना चाहिए।
उपसर्गों का प्रयोग संस्कृत, हिंदी, और अन्य भाषाओं में किया जाता है। ये भाषा के विकास और संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उपसर्ग 'अप' का अर्थ होता है 'दूर' या 'जगह से हटकर'। जैसे कि 'अपहरण' का अर्थ है 'चुराना'।
उपसर्ग 'अनु' का प्रयोग 'अनुगच्छति' में होता है, जिसका अर्थ है 'पीछे चलना'। इसका प्रयोग शिष्य के गुरू के पीछे चलने के संदर्भ में किया जाता है।
उपसर्ग 'वि' का उपयोग 'विभक्त' या 'भेद' दिखाता है, जैसे 'विभाजन', जिसका अर्थ है विभाजित करना।

Chapters related to "उपसर्ग"

सन्धि - स्वर (अच्) सन्धि

यह अध्याय स्वर (अच्) सन्धि के सिद्धांत और प्रकारों पर केंद्रित है। यह छात्रों को संस्कृत में शब्द निर्माण और संधियों की अवधारणा समझने में मदद करता है।

Start chapter

सन्धि - व्यंजन (हल्) सन्धि

इस अध्याय में व्यंजन सन्धि की विशेषताओं और नियमों का वर्णन किया गया है। यह संस्कृत व्याकरण का महत्वपूर्ण भाग है, जिससे शब्दों की संरचना में सुधार होता है।

Start chapter

सन्धि - विसर्ग सन्धि

अध्‍याय में विसर्ग सन्धि का परिचय दिया गया है। यह सन्धि शब्दों के बीच में समझ और उच्चारण में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण है।

Start chapter

शब्दरूप सामान्य परिचय

यह अध्याय शब्दों के रूपों का परिचय देता है। यह समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि शब्दों की सही पहचान और उपयोग भाषा में संप्रेषण की स्पष्टता बढ़ाता है।

Start chapter

धातुरूप सामान्य परिचय

इस अध्‍याय में धातुरूपों का सामान्‍य परिचय दिया गया है। यह समस्‍त धातुओं की रूप-रचनाओं को समझने में मदद करता है।

Start chapter

अव्यय

अव्‍यय अध्‍याय में सन्‍दर्भित है वाक्‍य में स्थिर रहने वाले तत्‍वों को समझाने के लिए। यह तत्‍व भाषा में अभिव्‍यक्ति की स्थिरता के लिए महत्‍वपूर्ण हैं।

Start chapter

प्रत्यय - कृत प्रत्यय

अध्याय में कृत प्रत्यय के बारे में जानकारी दी गई है, जो कि धातुओं और शब्दों के साथ जुड़कर नए अर्थ उत्पन्न करता है। यह विषय संस्कृत व्याकरण में महत्वपूर्ण है।

Start chapter

प्रत्यय - तद्धित प्रत्यय

इस अध्याय में तद्धित प्रत्ययों का अध्ययन किया गया है, जो धातु या शब्द के बाद जुड़ते हैं। ये महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ये शब्दों के अर्थ को विस्तारित करते हैं।

Start chapter

प्रत्यय - स्त्री प्रत्यय

इस अध्याय में प्रत्यय के विषय में बताया गया है, जो शब्दों या धातुओं के अंत में जुड़ते हैं। यह अध्याय संस्कृत भाषा में शब्दों के निर्माण की प्रक्रिया को समझने में सहायक है।

Start chapter

समास परिचय

समास परिचय अधयाय में समास के विभिन्न प्रकारों और उनके निर्माण की विधियों का विवेचन किया गया है। यह शब्‍दों के संक्षेपण की प्रक्रिया को समझने में सहायक है।

Start chapter

उपसर्ग Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

Question Bank

Worksheet

Revision Guide