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title: "वाच्‍य परिवर्तन"
board: "CBSE"
curriculum: "CBSE"
class: "Class 10"
subject: "Sanskrit"
book: "Vyakaranavithi"
chapter: "वाच्‍य परिवर्तन"
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source: "Edzy"
version: 1
last_updated: "2026-06-20"
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# वाच्‍य परिवर्तन

वाच्य कथन के प्रकटीकरण की विधा है। संस्कृत में तीन प्रकार के वाच्य होते हैं: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, और भाववाच्य।

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## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 10 |
| Subject | Sanskrit |
| Book | Vyakaranavithi |
| Chapter | वाच्‍य परिवर्तन |
| Pages | 124-128 |

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## Chapter Summary

### Short Summary
इस अध्याय में वाच्य की परिभाषा और उसके तीन प्रकारों का वर्णन किया गया है: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, और भाववाच्य।

### Detailed Summary
अध्याय में वाच्य के तीन प्रकारों को विस्तार से समझाया गया है। कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान होता है, जबकि कर्मवाच्य में कर्मता की प्रधानता होती है। भाववाच्य में क्रिया का अर्थ या साध्य प्रधान होता है, जिसमें कर्ता में तृतीय विभक्ति का प्रयोग होता है। वाच्य परिवर्तन के नियमों के अनुसार, कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य और भाववाच्य में क्रियाओं के परिवर्तन का उदाहरण प्रस्तुत किया गया है।

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## Topic-Wise Explanation

### वाच्य की परिभाषा
वाच्य कथन के प्रकटीकरण की विधा है।

### कर्तृवाच्य
इस वाच्य में कर्ता प्रधान होता है और क्रिया कर्ता के अनुसार प्रयुक्त होती है। उदाहरण: रामः गृहम् गच्छति।

### कर्मवाच्य
कर्मवाच्य में कर्मता की प्रधानता होती है और इसमें कर्मता में प्रथमा तथा कर्ता में तृतीय विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: रामेण गृहम् गम्यते।

### भाववाच्य
इस वाच्य में कर्ता में तृतीय विभक्ति का प्रयोग होता है, और इसमें क्रिया का अर्थ या साध्य प्रधान होता है।

### वाच्य परिवर्तन के नियम
कर्तृवाच्य की क्रियाएँ कर्मवाच्य में परिवर्तित करने के लिए नियमों का पालन करते हुए विभिन्न क्रियाएँ दी गई हैं।

### वाच्य परिवर्तन के उदाहरण
उदाहरण: पाठित -> पठ्यते, भिक्षित -> भिक्ष्यते।

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## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| वाच्य | वाच्य कथन के प्रकटीकरण की विधा है। |
| कर्तृवाच्य | कर्ता प्रधान, क्रिया कर्ता के अनुसार। |
| कर्मवाच्य | कर्मता प्रधान, क्रिया कर्मता के अनुसार। |
| भाववाच्य | क्रिया का अर्थ या साध्य प्रधान। |

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## Important Points for Revision

* वाच्य के तीन प्रकार: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य।
* कर्तृवाच्य में कर्ता प्रथमा विभक्ति में।
* कर्मवाच्य में कर्मता प्रथमा तथा कर्ता तृतीय विभक्ति में।
* भाववाच्य में कर्ता तृतीय विभक्ति में होता है।
* वाच्य परिवर्तन के नियमों का पालन करना।
* उदाहरणों का ध्यान रखें।

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## Practice Questions

### Short Answer Questions
1. वाच्य की परिभाषा क्या है?
2. कर्तृवाच्य में किसका प्रधानता होती है?
3. कर्मवाच्य में कर्ता किस विभक्ति में होता है?
4. भाववाच्य किस प्रकार का वाच्य है?
5. वाच्य परिवर्तन के नियम क्या हैं?

### Long Answer Questions
1. कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य के बीच अंतर समझाएँ।
2. वाच्य परिवर्तन के नियम क्या हैं? उदाहरण सहित समझाएँ।
3. वाच्य के प्रकारों का उपयोग किस प्रकार से किया जा सकता है, इसका वर्णन करें।

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## Source Attribution

| Field | Value |
| :--- | :--- |
| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 679d9f98cf957671e7ef3db0 |
| Canonical URL | https://www.edzy.ai/cbse-class-10-sanskrit-vyakaranavithi-vachy-privrtn |
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