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title: "खेलन में को काको गुसैयाँ / मुरली तक गुपालहिं भावति"
board: "CBSE"
curriculum: "CBSE"
class: "Class 11"
subject: "Hindi"
book: "Antra"
chapter: "खेलन में को काको गुसैयाँ / मुरली तक गुपालहिं भावति"
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source: "Edzy"
version: 1
last_updated: "2026-06-20"
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# खेलन में को काको गुसैयाँ / मुरली तक गुपालहिं भावति
यह अध्याय सूरदास के जीवन और उनकी रचनाओं पर आधारित है। सूरदास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं की अद्भुत रचनाएं की हैं। इस अध्याय में उनके काव्य का मनोवैज्ञानिक और भावानुकूल पक्ष दर्शाया गया है।

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## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 11 |
| Subject | Hindi |
| Book | Antra |
| Chapter | खेलन में को काको गुसैयाँ / मुरली तक गुपालहिं भावति |
| Pages | 114-118 |

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## Chapter Summary

### Short Summary
यह अध्याय सूरदास के जीवन, उनके काव्य में कृष्ण की बाल-लीलाओं का वर्णन और मनोविज्ञान को प्रस्तुत करता है।

### Detailed Summary
सूरदास (सन् 1478-1583) का जन्म-स्थान रुनकता या रेणुका क्षेत्र माना जाता है। वे महान कवि वल्लभाचार्य के शिष्य थे। सूरदास जन्मांध थे, लेकिन उनका काव्य अद्वितीय है। उन्होंने युद्ध, प्रेम, और खेल के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का चित्रण किया है। इस अध्याय में श्रद्धा एवं माधुर्य से भरपूर उनके पदों का वर्णन किया गया है। पहले पद में कृष्ण की हार न मानने की कथा है, जो बाल-मनोविज्ञान को दर्शाता है। दूसरे पद में गोपियों का कृष्ण की मुरली के प्रति रोष उनके प्रेम को दर्शाता है।

## Topic-Wise Explanation

### सूरदास: जीवन और रचनाएँ
सूरदास का जन्म 1478 में हुआ, और उन्होंने कृष्ण की बाल-लीलाओं का अद्भुत वर्णन किया।

### खेल में को काको गुसैयाँ
इस पद में खेल के दौरान कृष्ण की हार मानने से असहमति को दर्शाया गया है।

### बाल-मनोविज्ञान
कृष्ण की हार न मानने की प्रवृत्ति बाल मनोविज्ञान का सूक्ष्म चित्रण है।

### मुरली तऊ गुपालहिं भावति
इस पद में गोपियों का मुरली के प्रति ईर्ष्या भाव और प्रेम दर्शाया गया है।

### सूरदास की भाषा और अलंकार
सूरदास ने ब्रजभाषा में अलंकारों का कुशल प्रयोग किया है।

### काव्य में संगीत का संगम
सूरदास के काव्य में संगीत और काव्य का अद्भुत संगम है।

### शब्दार्थ और प्रमुख विशेषताएँ
सूरदास के पद गेय होते हैं और राग से संबंधित होते हैं।

## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| सूरदास का काव्य | सूरदास का काव्य कृष्ण की विविध लीलाओं को दर्शाने वाला है। |

## Key Concepts

| Concept | Meaning |
| :--- | :--- |
| सूरदास |एक प्रमुख हिंदी कवि जो कृष्णभक्ति में समर्पित था। |

## Important Points for Revision

* सूरदास का जन्म-स्थान आगरा के पास रुनकता है।
* वे जन्मांध थे लेकिन उनके काव्य में अद्भुत दृष्टि है।
* सूरदास ने कृष्ण की कई बाल-लीलाओं की रचना की है।
* उनके पदों में अलंकारों का निपुण प्रयोग है।
* गोपियाँ कृष्ण की मुरली के प्रति रोष प्रकट करती हैं।
* सूरदास की भाषा ब्रजभाषा है।
* उनके पद संगीत से गंभीरता से जुड़े होते हैं।
* सूरदास का काव्य और संगीत का तल मेल खाता है।

## Vocabulary and Glossary

| Word / Phrase | Meaning |
| :--- | :--- |
| सूरदास | कृष्णभक्ति में समर्पित एक प्रमुख हिंदी कवि। |

## Practice Questions

### Short Answer Questions

1. सूरदास का जन्म-स्थान कहाँ माना जाता है?
2. सूरदास ने किस संप्रदाय के अंतर्गत अपनी रचनाएँ कीं?
3. सूरदास की भाषा कौन सी है?
4. पहले पद में कृष्ण की कौन सी विशेषता को दर्शाया गया है?
5. गोपियों का कृष्ण की मुरली के प्रति क्या प्रतिक्रिया थी?

### Long Answer Questions

1. सूरदास की रचनाओं में बाल-लीलाओं का महत्वपूर्ण स्थान है। उनके काव्य का संक्षेप में वर्णन करें।
2. सूरदास के काव्य में अलंकारों और मनोविज्ञान का प्रयोग कैसे किया गया है? उदाहरण सहित बताएं।
3. मुरली और कृष्ण के संबंध में गोपियों के भाव को समझाएं।

## Related Concepts

| Concept | Relationship |
| :--- | :--- |
| कृष्ण की बाल-लीलाएँ | सूरदास के काव्य का मुख्य विषय है। |

## Source Attribution

| Field | Value |
| :--- | :--- |
| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 6a16ef93a7df5da37e896ee9 |
| Canonical URL | https://www.edzy.ai/cbse-class-11-hindi-antra-kheln-me-ko-kako-gusaiya-murlee-tk-gupalhi-bhavti |
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