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title: "ईशः कुत्रास्ति"
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source: "Edzy"
version: 1
last_updated: "2026-06-20"
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# ईशः कुत्रास्ति

प्रस्तुत पाठ नोबेल पुरस्कार विजेता कवीन्द्र रवीन्द्रनाथ टैगोर की विश्वविख्यात कृति गीताञ्जलि के संस्कृत अनुवाद से संकलित है। इसमें कवि ने ईश्वर की वास्तविक सत्ता को किसानों, मजदूरों और गरीबों में दर्शाया है। इसके अनुवादक को. ल. व्यासराय शास्त्री हैं।

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## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 11 |
| Subject | Sanskrit |
| Book | Shashwati |
| Chapter | ईशः कुत्रास्ति |
| Pages | 54-58 |

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## Chapter Summary

### Short Summary
ईश्वर की वास्तविक सत्ता को किसानों और मजदूरों के माध्यम से दर्शाया गया है।

### Detailed Summary
इस कविता में कवि टैगोर ने ईश्वर की उपस्थिति को जीवन के कठिन पहलुओं में चित्रित किया है, जैसे कि किसानों का श्रम और मजदूरों का जीवन। कविता में संदेह और प्रश्न उठाए गए हैं कि क्या वास्तव में ईश्वर हर स्थान पर है, और क्या वह उन परिहासों में भी मौजूद है जो जनजीवन के आधार हैं। किसानों और मजदूरों के जीवन की कठिनाइयों को सामने रखते हुए, वे इस बात को प्रकट करते हैं कि उच्चतम सत्ता उन लोगों के बीच है, जो अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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## Topic-Wise Explanation

### ईश्वर की वास्तविकता
कवि ने ईश्वर की उपस्थिति को जीवन की कठिनाइयों में दर्शाया है।

### किसान और मजदूर
कविता में किसान और मजदूरों की मेहनत और संघर्ष का उल्लेख है, जो ईश्वर के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।

### कविता का संदेश
कविता का मुख्य संदेश यह है कि ईश्वर मानवीय जीवन के सबसे साधारण और कठिन पहलुओं में भी मौजूद है।

### प्रकृति का वर्णन
प्रकृति का वर्णन करते हुए कवि ने जीवन की गहराई और जटिलता को समाहित किया है।

### दुख और दीनता
कवि ने दुख और दीनता के बीच के संबंध को उजागर किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वास्तविकता में ईश्वर का साक्षात्कार दुखी जन के पास है।

### ईश्वर की तुलना
ईश्वर की तुलना मानव जीवन के वास्तविक संघर्ष और चुनौतियों से की गई है।

### ध्यान और साधना
ध्यान और साधना के माध्यम से ही व्यक्ति ईश्वर के साक्षात्कार की कोशिश करता है और उसे अपने जीवन में अनुभव करता है।

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## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| ईश्वर का अस्तित्व | कवि दर्शाते हैं कि ईश्वर किसानों और मजदूरों के संघर्षों में है। |

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## Key Concepts

| Concept | Meaning |
| :--- | :--- |
| गीताञ्जलि | रवीन्द्रनाथ टैगोर की एक प्रसिद्ध कृति। |

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## Important Points for Revision

* ईश्वर की वास्तविकता को किसानों के माध्यम से दर्शाया गया है।
* कविता में श्रमिकों का कठिन जीवन चित्रित किया गया है।
* ईश्वर की उपस्थिति हर जगह महसूस की जा सकती है।
* कविता में चिंता और संदेह दिखाई देते हैं।
* टैगोर ने सरलता में ईश्वर की गहराई को दिखाया है।
* ध्यान और साधना के महत्व पर जोर दिया गया है।
* प्राकृतिक तत्वों के माध्यम से मानवीय अनुभवों का वर्णन।
* किसान और मजदूर की मेहनत का महत्व।

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## Vocabulary and Glossary

| Word / Phrase | Meaning |
| :--- | :--- |
| देवागारे | देवमन्दिर में |
| पिहितद्वारे | बन्द दरवाजे वाले में |
| तमोवृते | अन्धकार से आच्छादित में |
| जपमालाम् | मन्त्रादि के जपने की माला |
| स्फुटय | खोलो |
| लाङ्गलिकः | हलवाहा |

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## Practice Questions

### Short Answer Questions

1. ईशः कुत्रास्ति?
2. लाङ्गलिकः किं करोति?
3. प्रस्तरखण्डान् कः दारयते?
4. ईश्वरः काभ्यां सार्धं तिष्ठति?
5. कविः जनान् कुत्र गन्तुं प्रेरयति?

### Long Answer Questions

1. कविता में ईश्वर की उपस्थिति को दर्शाने वाले अंश का व्याख्या करें।
2. इस कविता के माध्यम से कवि ने क्या संदेश दिया है?
3. किसान और मजदूर की जीवन परिस्थितियों का वर्णन करें।

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## Related Concepts

* ईश्वर का श्रम
* मानवता का संघर्ष

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## Source Attribution

| Field | Value |
| :--- | :--- |
| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 6a17def4703f0db7fcb157de |
| Canonical URL | https://www.edzy.ai/cbse-class-11-sanskrit-shashwati-eesh-kutrasti |
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