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title: "हजारी प्रसाद द्विवेदी"
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chapter: "हजारी प्रसाद द्विवेदी"
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last_updated: "2026-06-20"
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# हजारी प्रसाद द्विवेदी

हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 1907 में बलिया, उत्तर प्रदेश में हुआ। वे हिंदी साहित्य के एक प्रमुख निबंधकार, आलोचक, इतिहासकार और उपन्यासकार थे।

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## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 12 |
| Subject | Hindi |
| Book | Aroh |
| Chapter | हजारी प्रसाद द्विवेदी |
| Pages | 110-119 |

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## Chapter Summary

### Short Summary
हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य को नई दृष्टि प्रदान करने वाले एक प्रमुख लेखक थे, जिनका योगदान साहित्य की विभिन्न शैलियों में स्पष्ट है।

### Detailed Summary
हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 1907 में बलिया, उत्तर प्रदेश में हुआ। वे हिंदी साहित्य के एक प्रमुख निबंधकार, आलोचक, इतिहासकार और उपन्यासकार थे। द्विवेदी जी ने हिंदी साहित्य को एक नई दृष्टि प्रदान की। वे संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश तथा हिंदी के प्रकांड विद्वान थे। उनके निबंधों में गहरी विद्वत्ता के साथ-साथ सहजता, सरसता और विनोदप्रियता का अद्भुत समन्वय मिलता है। द्विवेदी जी का व्यक्तित्व अत्यंत बहुआयामी था। उन्होंने शांतिनिकेतन में आचार्य के रूप में कार्य किया और गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर के सान्निध्य में भारतीय संस्कृति की व्यापक दृष्टि को आत्मसात किया। उनके लेखन में भारतीय संस्कृति, परंपरा और इतिहास की गहरी समझ दिखाई देती है। उनकी भाषा अत्यंत सरल, प्रवाहमयी और प्रभावशाली है। वे कठिन से कठिन विषय को भी सहज रूप में प्रस्तुत करने की क्षमता रखते थे। उनके निबंधों में तर्क और भाव का सुंदर संतुलन मिलता है। वे अपने विचारों को स्पष्टता और आत्मीयता के साथ प्रस्तुत करते हैं। द्विवेदी जी ने अपने निबंधों के माध्यम से भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कृति और समाज के विभिन्न पक्षों को उजागर किया है। वे मानते थे कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन के गहरे सत्य को उजागर करना भी है। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, सांस्कृतिक चेतना और बौद्धिक गहराई का अद्भुत समन्वय मिलता है। उन्होंने हिंदी साहित्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका लेखन आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। वे हिंदी साहित्य के ऐसे महान साहित्यकार हैं जिनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

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## Topic-Wise Explanation

### हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन
हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 1907 में हुआ और वे बलिया, उत्तर प्रदेश से थे।

### कृतियों की विशेषताएँ
उनकी कृतियों में विद्वत्ता, सहजता, सरसता और विनोदप्रियता का समन्वय है।

### संस्कृत और हिंदी साहित्य पर प्रभाव
द्विवेदी जी ने हिंदी साहित्य को नई दृष्टि प्रदान की और संस्कृत के व्यापक ज्ञान का उपयोग किया।

### समकालीन साहित्यिक आंदोलन
उनका लेखन समकालीन साहित्यिक आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

### वर्तमान साहित्यिक संदर्भ
द्विवेदी जी का लेखन आज भी प्रासंगिक है और उनके विचारों का प्रभाव वर्तमान साहित्य में देखा जा सकता है।

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## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| साहित्य का उद्देश्य | संज्ञानात्मक और सामाजिक जीवन के गहरे सत्य को उजागर करना |

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## Important Points for Revision

* हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 1907 में हुआ।
* वे हिंदी साहित्य के प्रमुख निबंधकार और आलोचक थे।
* उनके निबंधों में गहरी विद्वत्ता और सहजता का समन्वय है।
* उन्होंने शांतिनिकेतन में आचार्य के रूप में कार्य किया।
* उनकी भाषा सरल और प्रभावशाली है।
* साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सत्य को उजागर करना है।
* द्विवेदी जी ने भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को उजागर किया।
* उनका लेखन आज भी प्रासंगिक है।

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## Source Attribution

| Field | Value |
| :--- | :--- |
| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 67b972f7f3ff9e8f8b5f4c1c |
| Canonical URL | https://www.edzy.ai/cbse-class-12-hindi-aroh-hjaree-prsad-dvivedee |
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