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last_updated: "2026-06-20"
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# Raag vargeekaran

इस अध्याय में रागों के समय संदर्भ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का वर्णन किया गया है। भारतीय संगीत में प्राचीन काल से रागों को उनके निर्धारित समय पर गाने-बजाने की परंपरा रही है।

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## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 12 |
| Subject | Sangeet |
| Book | Hindustani Sangeet Gayan Evam Vadan |
| Chapter | Raag vargeekaran |
| Pages | 67-76 |

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## Chapter Summary

### Short Summary
इस अध्याय में रागों के गाने की प्राचीन परंपरा का विवरण दिया गया है, जिसमें रागों का समय और उनके वर्गीकरण की बात की गई है।

### Detailed Summary
अध्याय में बताया गया है कि भारतीय संगीत में रागों को उनके निर्धारित समय पर गाने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है, जो वेदिक काल से आरंभ हुई। सामवेद में गीतों को विशेष समय पर गाने का प्रावधान था, और यह परंपरा अन्य ग्रंथों में भी मिलती है। विभिन्न ग्रंथकारों ने समय, ऋतु और अवसर के अनुसार राग गाने के निर्देश दिए हैं। संगीत मकरंद और रीतिलाक्ष्य जैसे ग्रंथों में रागों के लिए सही समय का उल्लेख मिलता है। नहँस्तानी संगीत में रागों को पूर्वधाराग और उत्तरधाराग में वर्गीकृत किया गया है।

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## Topic-Wise Explanation

### राग वगगीकरण
यह विषय रागों को गाने के सही समय की परंपरा का वर्णन करता है।

### रागों का ऐतिहासिक महत्व
रागों का ऐतिहासिक महत्व उनके गाने के समय और अवसर से जुड़ा है।

### रागों की वर्गीकरण
रागों को समय और भाव के अनुसार वर्गीकृत किया गया है।

### पूर्व राग
पूर्व राग वे राग हैं, जो प्रातः के समय गाए जाते हैं।

### उत्तर राग
उत्तर राग वे राग होते हैं, जो रात्रि के समय प्रस्तुत किए जाते हैं।

### समय और राग का संबंध
समय के अनुसार रागों का भाव और प्रस्तुति में भिन्नता रहती है।

### समय आधारित रागों का प्रदर्शन
यह विषय समय के अनुसार रागों की प्रस्तुति पर आधारित है।

### शुद्ध, छायालग और सांकीर्त राग
रागों के इन प्रकारों का उल्लेख और उनके प्रदर्शन के अनुशासन की भी चर्चा की गई है।

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## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| प्राचीन परंपरा | रागों को उनके निर्धारित समय पर गाना एक प्राचीन परंपरा है। |

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## Key Concepts

| Concept | Meaning |
| :--- | :--- |
| राग | एक Musical framework है, जिसमें विशेष भावनाएँ व्यक्त की जाती हैं। |

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## Important Points for Revision

* रागों को समय, ऋतु, और अवसर के अनुसार गाया जाना चाहिए।
* भारतीय संगीत में रागों की समय निर्धारण की एक प्राचीन परंपरा है।
* संगीत मकरंद और अन्य ग्रंथों में रागों के गाने के समय का उल्लेख है।
* नहँस्तानी संगीत में रागों को पूर्वधाराग और उत्तरधाराग में विभाजित किया गया है।
* रागों के विभिन्न भाव और स्वरों का गाना भी आवश्यक है।
* रागों के प्रदर्शन का समय दिन के पहरों के अनुसार निर्धारित किया जाता है।
* ऐतिहासिक ग्रंथों में समय निर्धारण के निर्देश पाए जाते हैं।
* रागों के प्रदर्शन में शुद्ध, छायालग और सांकीर्त रागों का भी उल्लेख है।

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## Practice Questions

### Short Answer Questions

1. राग वगगीकरण का क्या महत्व है?
2. संगीत मकरंद में रागों के समय के बारे में क्या उल्लेख किया गया है?
3. पूर्व राग क्या होते हैं?
4. उत्तर रागों का क्या महत्व है?
5. समय और राग का संबंध कैसे established किया गया है?

### Long Answer Questions

1. भारतीय संगीत में रागों की ऐतिहासिक परंपराओं का वर्णन करें।
2. रागों के समय निर्धारण पर विभिन्न ग्रंथकारों द्वारा दिए गए निर्देशों का विश्लेषण करें।
3. नहँस्तानी संगीत में रागों की वर्गीकरण के प्रयोग को विस्तार से बताएं।

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## Source Attribution

| Field | Value |
| :--- | :--- |
| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 66dfe60c3f8b4e9e69bf872e |
| Canonical URL | https://www.edzy.ai/cbse-class-12-sangeet-hindustani-sangeet-gayan-evam-vadan-raag-vargeekaran |
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