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title: "कार्यं वा साधयेयं, देहं वा पातयेयम्"
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source: "Edzy"
version: 1
last_updated: "2026-06-20"
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# कार्यं वा साधयेयं, देहं वा पातयेयम्

यह पाठ अम्बिकादत्तव्यास द्वारा रचित ‘शिवराजविजयम्’ नामक ऐतिहासिक उपन्यास से लिया गया है, जिसमें वीरता, संकल्प, तथा प्राकृतिक बाधाओं का सामना करने की कथा प्रस्तुत की गई है। इस पाठ में शिवाजी के विश्वासपात्र दूत की मेहनत और दृढ़ संकल्प की कहानी है।

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## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 12 |
| Subject | Sanskrit |
| Book | Shashwati |
| Chapter | कार्यं वा साधयेयं, देहं वा पातयेयम् |
| Pages | 75-82 |

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## Chapter Summary

### Short Summary
इस पाठ में शिवाजी के दूत की दृढ़ता और संकल्प को दर्शाया गया है, जो अपने कार्य को पूरा करने के लिए भयानक बाधाओं का सामना करता है।

### Detailed Summary
पाठ में शिवाजी का दूत सिंहदुर्ग से पत्र लेकर तोरणदुर्ग की ओर निकलता है, जहाँ वह विभिन्न प्राकृतिक बाधाओं से गुजरता है। वह स्वयं को यह संकल्प दिलाता है कि वह अपने कार्य को पूरा करेगा, चाहे उसे अपने प्राणों की आहुति देनी पड़े। "कार्यं वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्" इस पाठ का मुख्य संदेश है।

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## Topic-Wise Explanation

### शिवराजविजयम् का रचनाकर्ता
अम्बिकादत्तव्यास एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी रचनाकार हैं जिन्होंने संस्कृत और हिंदी में अनेक ग्रंथों का लेखन किया।

### वीरता और संकल्प
वीरता और दृढ़ संकल्प ही मनुष्य को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

### शिवाजी का दूत
शिवाजी का दूत अपने कार्य के प्रति पूरी तरह समर्पित है और हर बाधा पार करने का दृढ़ संकल्प रखता है।

### प्राकृतिक बाधाएँ
रास्ते में अनेक प्रकार की प्राकृतिक बाधाएँ आती हैं, फिर भी दूत अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता है।

### संकल्प और प्रतिज्ञा
"कार्यं वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्" का संदेश संकल्प और प्रतिज्ञा की महत्ता को दर्शाता है।

### पारिस्थितिकी का वर्णन
प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन पाठ में स्पष्टता से किया गया है, जिसमें झंझावात और अन्य बाधाएँ शामिल हैं।

### धैर्य और तत्परता
धैर्य और तत्परता ही किसी भी कार्य में सफलता के लिए जरूरी हैं।

### मार्ग की चुनौतियाँ
चुनौतियों का सामना करते हुए भी दूत अपने कार्य को पूरा करने के लिए अग्रसर रहता है।

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## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| संघर्ष |संघर्ष और परिश्रम के माध्यम से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। |

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## Key Concepts

| Concept | Meaning |
| :--- | :--- |
| संकल्प | दृढ़ निश्चय करना |

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## Important Points for Revision

* पाठ का रचनाकार अम्बिकादत्तव्यास है।
* शिवाजी का दूत कार्य के प्रति समर्पित है।
* प्राकृतिक बाधाएँ दूत के मार्ग में आती हैं।
* "कार्यं वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्" दूत का मंत्र है।
* पाठ में वीरता और संकल्प की महत्ता को बताया गया है।
* दूत हर परिस्थिति में अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हैं।
* पाठ में प्राकृतिक परिदृश्य का अद्भुत वर्णन किया गया है।
* संघर्ष और धैर्य सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

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## Practice Questions

### Short Answer Questions

1. अम्बिकादत्तव्यास कौन हैं?
2. इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
3. शिवाजी का दूत किस कार्य के लिए यात्रा करता है?
4. पाठ में किन प्राकृतिक बाधाओं का उल्लेख किया गया है?
5. "कार्यं वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्" का क्या अर्थ है?

### Long Answer Questions

1. पाठ में शिवाजी के दूत की यात्रा के दौरान आने वाली चुनौतियों का वर्णन करें।
2. पाठ में वीरता और संकल्प की महत्ता को कैसे दर्शाया गया है?
3. अम्बिकादत्तव्यास की लेखन शैली का पाठ में क्या प्रभाव दिखाई देता है?
4. पाठ से कौन सी नैतिक शिक्षा प्राप्त होती है?

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## Source Attribution

| Field | Value |
| :--- | :--- |
| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 6a17f0435d2b10c171c39360 |
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