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title: "विक्रमस्यौदार्यम्"
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book: "Shashwati"
chapter: "विक्रमस्यौदार्यम्"
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source: "Edzy"
version: 1
last_updated: "2026-06-20"
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# विक्रमस्यौदार्यम्

‘सिंहासनद्वात्रिंशिका’ बत्तीस मनोरञ्जक कथाओं का संग्रह है। इसके केवल गद्यमय, केवल पद्यमय, गद्य-पद्यमय, ये तीन पाठ पाये जाते हैं। संग्रह में स्थित प्रत्येक कथा धारा नगरी के राजा भोज को सुनायी गयी है। अतः इस ग्रन्थ का समय राजा भोज (1018-1063) के अनन्तर ही माना जाता है।

## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 12 |
| Subject | Sanskrit |
| Book | Shashwati |
| Chapter | विक्रमस्यौदार्यम् |
| Pages | 68-74 |

## Chapter Summary

### Short Summary

इस पाठ में राजा विक्रमादित्य के गुण और उनकी उदारता का विवरण है, जिसमें वे राजा भोज को दान का महत्व समझाते हैं।

### Detailed Summary

इस पाठ में यह बताया गया है कि राजा भोज एक तालाब में खुदाई करते समय राजा विक्रमादित्य का सिंहासन पाते हैं। सिंहासन में 32 पुत्तलिकाएं हैं, जो राजा भोज को रोकते हुए विक्रम के गुणों की कथाएं सुनाते हैं। विक्रम का उदारता और संसार की असारता पर विचार करना प्रमुख है। विक्रम सम्पूर्ण राजकोष को दान देना चाहते हैं और इसके लिए वे ‘सर्वस्वदक्षिणयज्ञ’ का अनुष्ठान करते हैं, जिसमें वे अद्वितीय रत्न भी दान करते हैं। अंत में, यह स्पष्ट होता है कि विक्रम की उदारता उन्हें सिंहासन पर बैठने योग्य बनाती है।

## Topic-Wise Explanation

### सिंहासनद्वात्रिंशिका

‘सिंहासनद्वात्रिंशिका’ संग्रह की कथा में राजा भोज को विक्रमादित्य के गुणों से प्रभावित किया गया है।

### राजा विक्रमादित्य का सिंहासन

राजा भोज को विक्रमादित्य का सिंहासन खुदाई में मिलता है, जो उनके गुणों की खोज के लिए एक परीक्षण बनता है।

### औदार्य का परिचय

राजा विक्रमादित्य दानशीलता का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे अपने संपत्ति का त्याग करते हैं।

### दान का महत्व

दान के संदर्भ में विक्रम का यह विचार है कि उपार्जित सम्पत्ति का कोई लाभ नहीं है जब तक उसे साझा नहीं किया जाता।

### संसार की असारता

राजा विक्रम ने संसार को असार मानते हुए दान की आवश्यकता को समझा।

### ब्राह्मण का समुद्र से संवाद

एक ब्राह्मण समुद्र से बात करता है ताकि विक्रम के यज्ञ का अह्वान किया जा सके।

### रत्नों का मूल्य और विवाद

दान के समय चार रत्नों के मूल्य और उनके बीच विवाद का उल्लेख है, जो अंतिम निर्णय के लिए महत्वपूर्ण होता है।

## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| उदारता | राजा विक्रम की उदारता का परिचय और उसका महत्व। |

## Key Concepts

| Concept | Meaning |
| :--- | :--- |
| सर्वस्वदक्षिणयज्ञ | सम्पूर्ण सम्पत्ति का दान करने का यज्ञ। |

## Important Points for Revision

* राजा भोज को सिंहासन मिलता है।
* विक्रम के गुणों की कथाएं सुनाई जाती हैं।
* दुनिया को असार समझकर विक्रम दान करने का निर्णय लेते हैं।
* विक्रम समुद्र से अद्वितीय रत्न दान करते हैं।
* दान का महत्व विक्रम के दृष्टिकोण से वर्णित है।
* ब्राह्मण और समुद्र का संवाद महत्वपूर्ण है।
* चार रत्नों का मूल्यांकन किया जाता है।
* राजा भोज और पुत्तलिकाओं के संवाद से शिक्षा मिलती है।

## Vocabulary and Glossary

| Word / Phrase | Meaning |
| :--- | :--- |
| औदार्य | उदारता या दानशीलता। |

## Practice Questions

### Short Answer Questions

1. राजा भोज को सिंहासन कैसे मिला?
2. विक्रम की उदारता का उदाहरण क्या है?
3. दान के महत्व पर विक्रम का क्या विचार था?
4. समुद्र से ब्राह्मण का संवाद क्या था?
5. चार रत्नों को लेकर क्या विवाद उत्पन्न हुआ?

### Long Answer Questions

1. ‘सिंहासनद्वात्रिंशिका’ के अनुसार राजा विक्रम के गुणों का वर्णन करें।
2. विक्रम के ‘सर्वस्वदक्षिण यज्ञ’ का विवरण दें।
3. राजा भोज की परीक्षा और उसके परिणाम का विश्लेषण करें।

## Related Concepts

* दान की परंपरा
* उदारता के सामाजिक मूल्य

## Source Attribution

| Field | Value |
| :--- | :--- |
| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 6a17f02f5d2b10c171c37b12 |
| Canonical URL | https://www.edzy.ai/cbse-class-12-sanskrit-shashwati-vikrmsyaudarym |
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