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title: "अतिथिदेवो भव"
board: "CBSE"
curriculum: "CBSE"
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subject: "Sanskrit"
book: "Deepakam"
chapter: "अतिथिदेवो भव"
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source: "Edzy"
version: 1
last_updated: "2026-06-20"
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# अतिथिदेवो भव
भारत में अतिथियों का अत्यधिक महत्व है। ‘अतिथिदेवो भव’ यह उपनिषद का कथन है, जो अतिथियों के प्रति सम्मान और स्नेह का प्रतीक है।

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## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 6 |
| Subject | Sanskrit |
| Book | Deepakam |
| Chapter | अतिथिदेवो भव |
| Pages | 98-105 |

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## Chapter Summary

### Short Summary
इस अध्याय में अतिथि के महत्व और उनके स्वागत की धार्मिक प्रथाओं का वर्णन है।

### Detailed Summary
अध्याय में कहा गया है कि ‘अतिथिदेवो भव’ का अर्थ है अतिथियों का सम्मान करना। विभिन्न देशों में भिन्न प्रकार के लोग होते हैं, परंतु अतिथि सभी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इसमें पाँच महायज्ञों के पालन का उल्लेख है, जो अतिथि के सम्मान में किए जाते हैं। रात्रि में नए अतिथियों के आगमन की तैयारी की जाती है, जिसमें परिवार के सदस्य साथ होते हैं। ‘तनत्वी’, ‘मकरंद’, ‘शबल’, और ‘भीम’ जैसे नामों का उल्लेख किया गया है, जो इस समय का अनुभव करते हैं। रात्रि का सन्नाटा और पूजा की पवित्रता का वर्णन भी शामिल है।

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## Topic-Wise Explanation

### अतिथिदेवो भव – महत्त्वम्
इस शीर्षक के अंतर्गत बताया गया है कि अतिथि का स्वागत करना धर्म का हिस्सा है और उनके प्रति सम्मान दिखाना आवश्यक है।

### अतिथि का स्वरूप
अतिथियों का अस्तित्व तात्कालिक रूप से परिवार और समाज की धार्मिक धारा में महत्वपूर्ण होता है।

### पञ्चमहायज्ञ
यहाँ अतिथि के सम्मान में पाँच महायज्ञों का पालन किया जाता है, जो भारतीय संस्कृति के मूल्यों को दर्शाता है।

### अतिथि और धर्म
अतिथि का धर्म के साथ गहरा संबंध है, जहाँ उसका स्वागत धार्मिक कार्यों के माध्यम से किया जाता है।

### अतिथि का आचरण
अतिथि का आचरण शिष्टता और सम्मान का प्रतीक होता है, जो भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाता है।

### सदाचार की ज़रूरत
सदाचार का बिना अतिथि का स्वागत अधूरा है, जिससे समाज में धार्मिकता का पालन संभव होता है।

### संस्कार और संस्कृति
अतिथियों का स्वागत भारतीय संस्कार और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।

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## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| अतिथियों का स्वागत | भारतीय संस्कृति में अतिथि का विशेष महत्व है। |

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## Important Points for Revision

* ‘अतिथिदेवो भव’ का अर्थ अतिथि को देवता मानना है।
* रात्रि में अतिथियों का स्वागत करने की परंपरा है।
* परिवार के सभी सदस्य धार्मिकता से एकत्र होते हैं।
* अतिथि आने से पूर्व कई अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
* पञ्चमहायज्ञ का पालन अतिथि के प्रति सम्मान प्रकट करता है।
* अतिथि का आगमन सामाजिक और धार्मिक कार्यों का हिस्सा है।
* देर रात का माहौल अत्यंत पवित्र माना जाता है।
* ‘तनत्वी’, ‘मकरंद’, ‘शबल’, और ‘भीम’ जैसे पात्रों का उल्लेख होता है।

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## Source Attribution

| Field | Value |
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| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 69be3475e6892dee0813267a |
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