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title: "ईशावास्यम्इदं सर्वम्"
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chapter: "ईशावास्यम्इदं सर्वम्"
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last_updated: "2026-06-20"
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# ईशावास्यम्इदं सर्वम्

इस पाठ में 'ईशावास्यम् इदं सर्वम्' का संकल्पना की व्याख्या की गई है, जिसमें ईश्वर का सर्वत्र उपस्थित होना एवं सभी प्राणियों में एकता का महत्व बताया गया है। यह भक्ति और श्रद्धा का एक महत्वपूर्ण पाठ है, जिसमें दिव्यता और धर्म की मूल बातें अवश्य सम्मिलित होती हैं।

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## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 7 |
| Subject | Sanskrit |
| Book | Deepakam |
| Chapter | ईशावास्यम्इदं सर्वम् |
| Pages | 71-84 |

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## Chapter Summary

### Short Summary
यह अध्याय ईश्वर के सर्वव्यापी स्वरूप और उसकी आराधना पर आधारित है, जिसमें प्रह्लाद की भक्ति और हिरण्यकशिपु की दुराग्रह का वर्णन किया गया है।

### Detailed Summary
यह पाठ ‘ईशावास्यम् इदं सर्वम्’ की अवधारणा पर केंद्रित है, जिसमें बताया गया है कि ईश्वर सर्वत्र उपस्थित हैं। पाठ में एक छोटी कथा प्रस्तुत है जो प्रह्लाद के इश्वर के प्रति अनन्य भक्ति को दर्शाती है और कैसे हिरण्यकशिपु (प्रह्लाद का पिता) अपनी शक्ति का प्रयोग कर ईश्वर की सत्ता को नकारने का प्रयास करता है, लेकिन अंततः प्रह्लाद की भक्ति ही विजयी होती है।

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## Topic-Wise Explanation

### ईशावास्यम् इदं सर्वम् – परिभाषा
ईशावास्यम् इदं सर्वम् का अर्थ है कि सम्पूर्ण जगत में ईश्वर की उपस्थिति है। यह विचार सभी प्राणियों को एकता के सूत्र में बाँधता है।

### ईश्वर का सर्वत्र होना
ईश्वर की सर्वत्र उपस्थिति का प्रमाण भक्ति और श्रद्धा में देखा जाता है। यह धारणा प्रगट करती है कि ईश्वर हमारे चारों ओर व्याप्त हैं।

### प्रह्लाद एवं ईश्वर की आराधना
प्रह्लाद की ईश्वर में अटूट श्रद्धा उसे हिरण्यकशिपु की यातनाओं से सुरक्षित रखती है। यह प्रेम और भक्ति का एक उदाहरण है।

### दैत्यराज हिरण्यकश्यप का संवाद
हिरण्यकशिपु की ईश्वर के प्रति नफरत और उसका प्रह्लाद से संवाद प्रकट करता है कि वह अपने पुत्र की भक्ति को समझने में असफल है।

### प्रति-ईश्वर का विचार
प्रति-ईश्वर का विचार हर व्यक्ति के जीवन में ईश्वर की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाने का प्रयास करता है।

### धर्म और दया
धर्म और दया का जीवों की एकता में महत्वपूर्ण स्थान है, जहाँ दया की भावना से सभी प्राणियों को एक माना जाता है।

### सभी जीवों में एकता
इस पाठ का संदेश है कि ईश्वर की उपस्थिति से सभी जीव एक हैं और सभी को एक-दूसरे के प्रति दया और स्नेह होना चाहिए।

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## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| ईश्वर की सर्वव्यापीता | ईश्वर हर जगह उपस्थित हैं और उन्हें सभी जगह देखा जा सकता है। |

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## Important Points for Revision

* ईश्वर की सर्वत्र उपस्थिति का महत्व
* प्रह्लाद की भक्ति और हिरण्यकशिपु का संवाद
* धर्म और दया का संबंध
* सभी जीवों की एकता का संदेश
* ईशावास्यम् इदं सर्वम् की परिभाषा
* प्रह्लाद की श्रद्धा का गुण
* दैत्यराज हिरण्यकशिपु के दुष्कर्म
* भक्ति का श्रेष्ठत्व

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## Practice Questions

### Short Answer Questions
1. ‘ईशावास्यम् इदं सर्वम्’ का क्या अर्थ है?
2. प्रह्लाद की भक्ति का मुख्य बिंदु क्या है?
3. हिरण्यकशिपु कौन है और उसकी भावना क्या है?
4. ईश्वर के प्रति श्रद्धा का क्या महत्व है?
5. दया और धर्म का क्या संबंध है?

### Long Answer Questions
1. प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु के बीच संवाद का महत्व बताइए।
2. ‘ईशावास्यम् इदं सर्वम्’ से सभी जीवों में एकता का अनुप्रयोग करें।
3. ईश्वर की उपस्थिति की धारणा का व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

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## Source Attribution

| Field | Value |
| :--- | :--- |
| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 69be9e49fb5daab696332e3a |
| Canonical URL | https://www.edzy.ai/cbse-class-7-sanskrit-deepakam-eeshavasymid-srvm |
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