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title: "भारति, जय, विजयकरे!"
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chapter: "भारति, जय, विजयकरे!"
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version: 1
last_updated: "2026-06-20"
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# भारति, जय, विजयकरे!

यह कविता ‘भारति, जय, विजयकरे!’ स्यूर्यकांत त्रिपाठी ‘तिराला’ द्वारा लिखी गई है। यह देश की भौगोलिक और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती है। लेखक ने भारत की सुंदरता, संपन्नता, और धार्मिकता का चित्रण किया है।

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## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 9 |
| Subject | Hindi |
| Book | Ganga |
| Chapter | भारति, जय, विजयकरे! |
| Pages | 166-175 |

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## Chapter Summary

### Short Summary
कविता भारत की भौगोलिक विशेषताओं और सांस्कृतिक धरोहर को लेकर है। इसमें भूमि, जल, और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा की गई है।

### Detailed Summary
कविता में कवि ने भारत की भौगोलिक संरचना, उसके जल, वन, और फूलों का विस्तृत वर्णन किया है। ‘कनक-शस्य-कमलधरे!’ पर्यावरण और प्राकृतिक सुंदरता की आयाम को उजागर करता है। भारत की विविधता को दर्शाते हुए कवि ने इसे ‘शुद्धता’ और ‘सुंदरता’ का प्रतीक माना है।

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## Topic-Wise Explanation

### भारत्त, जय, विजयकरे!
कविता में भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशंसा की गई है, जिसमें नदी, वन, और पहाड़ों का चित्रण किया गया है।

### किक-शस्र्-क्मलधरे!
इस पंक्ति में भारत की भूपर्यटनता और उपजाऊ भूमि का बखान किया गया है।

### तरु-तकृण-वि-लता वसि
यहाँ प्रकृति के सौंदर्य का चित्रण किया गया है।

### गंगा ज्र्ोत्तज्यल-कण
कवि ने गंगा नदी का वर्णन किया है जो स्वच्छ और निर्मल है।

### ध्वत्ित त्दशाएँ उदार
यहां विभिन्न स्तुतियों का उल्लेख है जो भारत के विविध पर्वों का संकेत देते हैं।

### प्राण प्रणव ओंकार
यहाँ पर भारतीय संस्कृति और आध्यात्म का उल्लेख किया गया है।

### शत्मुख-शतरव-मुखरे!
यहाँ भारत की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाया गया है।

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## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| भारत की विविधता | देश की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता का वर्णन। |

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## Important Points for Revision

* कवि का नाम: स्यूर्यकांत त्रिपाठी ‘तिराला’
* कविता का मुख्य विषय: भारत की भौगोलिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर।
* प्रमुख तत्व: नदी, वन, पर्वत, और वातावरणीय सौंदर्य।
* कविता में प्रेम और प्रकृति की घनिष्ठता का वर्णन।
* उपयोग की गई अलंकारिक भाषा।

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## Vocabulary and Glossary

| Word / Phrase | Meaning |
| :--- | :--- |
| कनक-शस्य | सोने जैसी फसलों का वर्णन। |
| धवल | सफेद और शुद्ध का अर्थ। |

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## Practice Questions

### Short Answer Questions
1. ‘भारति, जय, विजयकरे!’ का मुख्य विषय क्या है?
2. इस कविता में भारत की कौन-कौन सी विशेषताओं का उल्लेख किया गया है?
3. कविता में ‘गंगा’ का क्या महत्व है?
4. ‘किक-शस्र्-क्मलधरे’ का भावार्थ बताएं।
5. तिराला की इस कविता की भाषा शैली कैसी है?

### Long Answer Questions
1. ‘भारति, जय, विजयकरे!’ कविता के माध्यम से भारत के प्रति कवि का दृष्टिकोण क्या है? विस्तार से लिखें।
2. कवि ने भारत की प्राकृतिक सुंदरता का कौन सा पहलू चुनकर उसे प्रदर्शित किया है? उसे स्पष्ट करें।
3. कविता में प्रस्तुत अलंकारों का विवरण करें और बताएं कि यह कविता में कैसे सहायक होते हैं।

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## Related Concepts

* भारतीय संस्कृति
* प्राकृतिका
* भूगोल की विशेषताएं

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## Source Attribution

| Field | Value |
| :--- | :--- |
| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 69f07b47e383bb95e2f11a7f |
| Canonical URL | https://www.edzy.ai/cbse-class-9-hindi-ganga-bharti-jy-vijykre |
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