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last_updated: "2026-06-20"
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# पद.

इस अध्याय में रैदास के दो प्रमुख पदों को प्रस्तुत किया गया है। रैदास का जीवन 15वीं शताब्दी में था और उन्होंने भक्ति से संबंधित गहन विचार व्यक्त किए हैं। उनके पदों में भक्त और आराध्य के संबंध को गहराई से दर्शाया गया है और यह स्पष्ट होता है कि भक्ति में अनन्य भाव आवश्यक है।

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## Knowledge Snapshot

| Field | Details |
| :--- | :--- |
| Class | Class 9 |
| Subject | Hindi |
| Book | Ganga |
| Chapter | पद. |
| Pages | 145-152 |

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## Chapter Summary

### Short Summary
अध्याय में रैदास के दो पद प्रस्तुत किए गए हैं, जो उनके भक्ति भावों को स्पष्ट करते हैं।

### Detailed Summary
रैदास ने अपने पदों में बताया है कि भक्ति और आराध्य का संबंध चंद्र- पानी, दीपक- बाती जैसे अटूट संबंध की तरह होता है। पहले पद में यह दर्शाया गया है कि भक्त अपने प्रभु से यह नहीं कह सकता कि वह उन्हें छोड़ सकता है, जबकि दूसरे पद में तीर्थ और व्रत छोड़ने के बावजूद भक्ति को प्राथमिकता दी गई है, जो आत्मीयता और विश्वास की भावना को स्पष्ट करता है।

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## Topic-Wise Explanation

### रैदास का जीवन
रैदास का जन्म काशी में हुआ और उनका जीवन 15वीं शताब्दी के आसपास माना जाता है। वे संत कवियों में जाने जाते हैं।

### भक्ति का स्वरूप
भक्ति एक आदर्श भावना है, जिसमें भक्त और ईश्वर के बीच की गहरी समानता और संबंध का आभास होता है।

### संगीत में भक्ति की अभिव्यक्ति
रैदास के पदों में जो संगीतात्मकता है, वह भक्ति की गहराई को दर्शाती है।

### पहला पद का भावार्थ
पहले पद का भावार्थ यह है कि भक्त और आराध्य का संबंध किसी भी रूप में अटूट होता है।

### दूसरा पद का भावार्थ
दूसरे पद में संकेत है कि आराध्य से भक्ति नहीं छोड़ना चाहिए, चाहे अन्य साधनों का उपयोग किया जाए।

### उपमा और रूपक
इन पदों में उपमा और रूपक के माध्यम से गहरी भावनाओं को व्यक्त किया गया है।

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## Core Ideas

| Idea | Explanation |
| :--- | :--- |
| भक्ति | भक्ति किसी भी साधन्दों के परे एक गहरी आत्मीयता का नाम है। |

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## Key Concepts

| Concept | Meaning |
| :--- | :--- |
| रैदास | 15वीं शताब्दी के संत कवि जिनका मुख्य आधार भक्ति है। |

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## Important Points for Revision

* रैदास का जीवन और उनके पदों का सांस्कृतिक महत्व।
* पहले पद में भक्त और आराध्य के अटूट संबंध का भाव।
* दूसरे पद में भक्ति की प्रामाणिकता का प्रमाण।
* पदों में प्रयोग किए गए उपमा और रूपक।
* भक्ति के स्वरूप और इसके महत्व।
* संवाद के माध्यम से भक्त और ईश्वर के संबंध की गहनता।
* रैदास की रचनाओं में भाषा और भाव की एकता।
* संतों के काव्य का संगीतात्मक रूप।

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## Practice Questions

### Short Answer Questions
1. रैदास का जन्मस्थान क्या है?
2. पहले पद का मुख्य संदेश क्या है?
3. भक्ति का स्वरूप कैसे वर्णित किया गया है?
4. रैदास ने किन शब्दों का प्रयोग अपने पदों में किया है?
5. दूसरे पद में आराध्य से भक्त का संबंध कैसे दर्शाया गया है?

### Long Answer Questions
1. रैदास के पदों में भक्ति का महत्व क्या है? विस्तृत में लिखें।
2. पहले और दूसरे पद की भावार्थ की तुलना करें। आपके अनुसार, इनमें कौन-सा पद अधिक प्रभावशाली है और क्यों?
3. रैदास के जीवन और उनकी रचनाओं का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा? विस्तार से बताएं।

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## Source Attribution

| Field | Value |
| :--- | :--- |
| Source | Edzy |
| Reference Type | examSubjectBookChapter |
| Reference ID | 69f07b05e383bb95e2f10d83 |
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