Practice Hub

Formula Sheet: कारक और विभक्‍त

इस अध्याय में वाक्य के कारक और विभक्तियों का अध्ययन किया गया है। यह संस्कृत व्याकरण की महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझाने में सहायक है।

Structured practice

कारक और विभक्ति – Formula & Equation Sheet

Essential formulas and equations from Vyakaranavithi, tailored for Class X in Sanskrit.

This one-pager compiles key formulas and equations from the 'कारक और विभक्ति' chapter of Vyakaranavithi. Ideal for exam prep, quick reference, and solving time-bound problems accurately.

Formula and Equation Sheet

Formula sheet

Key concepts & formulas

Essential formulas, key terms, and important concepts for quick reference and revision.

Formulas

1

कारक = जिसके द्वारा क्रिया की सिद्धि हो

कारक वाक्य में क्रिया के साथ संबंध रखने वाले शब्द होते हैं। उदाहरण: 'रामः फलं खादति' में 'रामः' कर्ता कारक है।

2

कर्ता कारक = प्रथमा विभक्ति

क्रिया को करने वाले को कर्ता कारक कहते हैं और इसमें प्रथमा विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'बालकः पठति'।

3

कर्म कारक = द्वितीया विभक्ति

क्रिया के फल का भोग करने वाले को कर्म कारक कहते हैं और इसमें द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'फलं खादति'।

4

करण कारक = तृतीया विभक्ति

क्रिया के साधन को करण कारक कहते हैं और इसमें तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'लेखनीया लिखति'।

5

सम्प्रदान कारक = चतुर्थी विभक्ति

जिसके लिए कुछ दिया जाए या किया जाए, उसे सम्प्रदान कारक कहते हैं और इसमें चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'गुरवे नमः'।

6

अपादान कारक = पञ्चमी विभक्ति

जिससे कोई वस्तु अलग होती है, उसे अपादान कारक कहते हैं और इसमें पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'वृक्षात् पत्रं पतति'।

7

अधिकरण कारक = सप्तमी विभक्ति

क्रिया का आधार अधिकरण कारक होता है और इसमें सप्तमी विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'गृहे वसति'।

8

सम्बन्ध कारक = षष्ठी विभक्ति

दो वस्तुओं के बीच संबंध दर्शाने के लिए षष्ठी विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'रामस्य पुस्तकम्'।

9

सम्बोधन = हे, अरे आदि

किसी को संबोधित करने के लिए सम्बोधन का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'हे राम!'।

10

विभक्ति = शब्दों के अंत में लगने वाले प्रत्यय

विभक्ति शब्दों के अंत में लगने वाले प्रत्यय होते हैं जो उनका वाक्य में संबंध दर्शाते हैं। उदाहरण: 'बालकः', 'बालकम्'।

Equations

1

कर्ता + प्रथमा विभक्ति = रामः पठति

कर्ता कारक में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'रामः पठति' में 'रामः' कर्ता है।

2

कर्म + द्वितीया विभक्ति = फलं खादति

कर्म कारक में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'फलं खादति' में 'फलं' कर्म है।

3

करण + तृतीया विभक्ति = लेखनीया लिखति

करण कारक में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'लेखनीया लिखति' में 'लेखनीया' करण है।

4

सम्प्रदान + चतुर्थी विभक्ति = गुरवे नमः

सम्प्रदान कारक में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'गुरवे नमः' में 'गुरवे' सम्प्रदान है।

5

अपादान + पञ्चमी विभक्ति = वृक्षात् पत्रं पतति

अपादान कारक में पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'वृक्षात् पत्रं पतति' में 'वृक्षात्' अपादान है।

6

अधिकरण + सप्तमी विभक्ति = गृहे वसति

अधिकरण कारक में सप्तमी विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'गृहे वसति' में 'गृहे' अधिकरण है।

7

सम्बन्ध + षष्ठी विभक्ति = रामस्य पुस्तकम्

सम्बन्ध कारक में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'रामस्य पुस्तकम्' में 'रामस्य' सम्बन्ध है।

8

सम्बोधन + हे = हे राम!

सम्बोधन में 'हे' आदि शब्दों का प्रयोग होता है। उदाहरण: 'हे राम!' में 'हे' सम्बोधन है।

9

विभक्ति + प्रत्यय = बालकः, बालकम्

विभक्ति शब्दों के अंत में लगने वाले प्रत्यय होते हैं। उदाहरण: 'बालकः', 'बालकम्' में 'ः' और 'म्' विभक्ति हैं।

10

कर्ता + कर्म + क्रिया = रामः फलं खादति

वाक्य में कर्ता, कर्म और क्रिया का सही क्रम। उदाहरण: 'रामः फलं खादति' में 'रामः' कर्ता, 'फलं' कर्म और 'खादति' क्रिया है।

Chapters related to "कारक और विभक्‍त"

धातुरूप सामान्‍य परिचय

यह अध्याय उपसर्गों का परिचय देता है और उन्हें धातु रूपों के साथ जोड़कर नए शब्दों की उत्पत्ति के महत्व को समझाता है। यह अध्ययन विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है।

Start chapter

उपसर्ग

उपसर्ग अध्याय में उपसर्गों के महत्व और उनके उपयोग के बारे में जानकारी दी गई है। यह अध्ययन शब्दों के अर्थ को समझने में सहायक है।

Start chapter

अव्‍यय

अव्‍यय अध्याय में वे शब्‍दों का अध्ययन किया जाता है जो सव्व‍दा एवं वचन के आधार पर परिवर्तित नहीं होते। यह ज्ञान वाक्य निर्माण में सहायता करता है।

Start chapter

प्रत्‍यय

अध्याय प्रत्‍यय में धातु या शब्द से जुड़ने वाले प्रत्यय का अध्ययन किया जाता है। यह भाषा की संरचना को समझने में महत्वपूर्ण है।

Start chapter

समास परिचय

समास परिचय अध्याय में समास के विभिन्न प्रकारों और उनके उपयोग का वर्णन किया गया है। यह भाषा की संरचना को समझने में सहायक है।

Start chapter

वाच्‍य परिवर्तन

इस पाठ में वाच्य परिवर्तन की प्रक्रिया और उसके प्रकार समझाए गए हैं। यह अध्याय वाक्य निर्माण में सहायक है।

Start chapter

रचना प्रयोग

अस्मिन् अध्याये रचना प्रयोगस्य महत्त्वं च विषयं विवर्तते। लेखनकौशलं विकसयितुं एषः अध्यायः महत्त्वपूर्णः अस्ति।

Start chapter

शब्‍दरूपािण

यह अध्याय शब्‍दों के विभिन्न रूपों का अध्ययन करता है, जो व्याकरण की मूल बातें सिखाता है। यह ज्ञान भाषा के सही उपयोग में सहायक होता है।

Start chapter

धातुरूपािण

धातुरूपाणि अध्याय में धातुओं के विभिन्न रूपों को समझाया गया है। यह विद्यार्थियों के लिए विशेषरूप से व्याकरण के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।

Start chapter