गूँगे
NCERT Class 11 Hindi Chapter 4: गूँगे (Pages 43–53)
Summary of गूँगे
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गूँगे at a Glance
CBSE
Class 11
Hindi
Antra
4
43–53
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गूँगे Summary
गूँगे कहानी रांगेय राघव द्वारा लिखी गई है, जिसमें एक गूँगे किशोर की जिंदगी के संघर्षों को दर्शाया गया है। कहानी का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि कैसे एक गूँगा व्यक्ति अपने साथ हो रहे अत्याचारों को मूक रूप से सहता है और कभी-कभी उनका विरोध भी करता है। कहानी में यह स्पष्ट किया गया है कि समाज में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संवेदनशीलता का अभाव है। लेखक ने इस विषय को साधारण और प्रवाहपूर्ण भाषा में प्रस्तुत किया है, ताकि पाठक आसानी से इसके मुख्य विचारों को समझ सकें। गूँगे किशोर के माध्यम से हम देखते हैं कि उसकी स्थिति कई बार न्यूनतम व्यवहार और तिरस्कार का सामना करती है। वह अपने चारों ओर की असंवेदनशीलता को महसूस करता है, लेकिन बोल नहीं पाता। लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि ऐसे व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए और उन्हें समाज में उचित स्थान मिलना चाहिए। यह गूँगे किशोर, जो अपनी स्थिति के कारण सामाजिक दायरों से बाहर है, इस संघर्ष को अपने दिल में छिपाए हुए है। वह कभी चुप रहता है और कभी अपनी अवस्था पर आक्रोश भी प्रकट करता है। पाठक को यह समझ में आता है कि समाज को कितनी संवेदनशीलता और समझदारी की आवश्यकता है, ताकि दिव्यांगजन भी आम लोगों के समान ससम्मान जीवन जी सकें। इस कहानी के ज़रिए यह भाव भी उभरता है कि जो लोग अपने सामाजिक दायित्वों से अनजान हैं, वे भी गूँगे और बहरे हैं। इस प्रकार, कहानी केवल एक गूँगे किशोर की असहायता नहीं, बल्कि समाज में फैली अशंवेदनशीलता का भी अक्स प्रस्तुत करती है। कहानी हमें याद दिलाती है कि हमें न सिर्फ दिव्यांगों को समझना चाहिए, बल्कि उनकी गरिमा और मानवता का भी सम्मान करना चाहिए। यह अध्याय पाठकों को विचार करने के लिए प्रेरित करता है कि वे कैसे अपने आस-पास के लोगों के प्रति अधिक संवेदनशील बन सकते हैं।
