संध्या के बाद
NCERT Class 11 Hindi Chapter 12: संध्या के बाद (Pages 124–132)
Summary of संध्या के बाद
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संध्या के बाद at a Glance
CBSE
Class 11
Hindi
Antra
12
124–132
6 study resources
संध्या के बाद Summary
संध्या के बाद कविता, सुमित्रानंदन पंत द्वारा लिखी गई है, जो उनके संग्रह 'ग्राम्या' से ली गई है। इस कविता में शाम के धुंधलके में गांव का जीवंत दृश्य प्रस्तुत किया गया है। पंत जी ने यहां गांव के समाज, प्रकृति और वहां के विभिन्न पात्रों का सजीव चित्रण किया है। कविता की शुरुआत में, ढलते सूर्य की रोशनी में गांव की हरियाली और उसकी रंगत का वर्णन किया गया है। लेखक ने वृद्धाओं, विधवाओं और खेत से लौटते किसानों का जो चित्रण किया है, वह ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों और सरलता को दर्शाता है। पंत जी की इस कविता में एक गहरी संवेदनशीलता दिखाई देती है, जो मानवता के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती है। कविता में समय का पलटना, गांव के जानवर, किसान और उनके दैनिक जीवन का बखान न केवल दृश्यात्मक है, बल्कि भावनात्मक भी है। इसके माध्यम से, वे हमारे सामने उस समय के ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों और उसकी सरलता को रखते हैं। पंत जी ने कबियों और पशु-पक्षियों का भी उल्लेख किया है, जो गांव के जीवन का अभिन्न भाग हैं। यह कविता हमें प्रकृति और मानव के संगम की ओर इशारा करती है। जब किसान अपने खेतों से लौटते हैं, तब उनका चेहरा थकान और संतोष दोनों से भरा होता है। इस तरह, 'संध्या के बाद' कविता में हम गांव के जनजीवन और वहां की सांस्कृतिक गहराई का अनुभव करते हैं। पंत जी का काव्य पत्रक केवल प्राकृतिक सौंदर्य नहीं, बल्कि मानव भांति का भी सजीव चित्र है। इसके द्वारा, उनका लक्ष्य न केवल साहित्यिक सौंदर्य की अभिव्यक्ति करना है, बल्कि सामाजिक यथार्थ का भी प्रभावी चित्रण करना है। इस कविता को पढ़कर, हम ग्रामीण जीवन के विस्तार और वहां की विविध भावनाओं को समझ सकते हैं। 'संध्या के बाद' कविता मानव संवेदनाओं का गहराई से अध्ययन करती है और यह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन की सरलताएं और जटिलताएं किस प्रकार एक-दूसरे से जुड़ी हैं।
