टॉर्च बेचनेवाले
NCERT Class 11 Hindi Chapter 3: टॉर्च बेचनेवाले (Pages 35–42)
Summary of टॉर्च बेचनेवाले
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टॉर्च बेचनेवाले at a Glance
CBSE
Class 11
Hindi
Antra
3
35–42
6 study resources
टॉर्च बेचनेवाले Summary
इस अध्याय का मुख्य विषय एक व्यक्ति की यात्रा और उसकी सोच में आए बदलाव को दर्शाता है। शुरुआत में वह एक टॉर्च बेचने वाला है, जो अपने धंधे के जरिए लोगों को अंधकार के डर से बचाने का काम करता है। उसकी व्याख्या नाटकीय होती है, जिससे लोग टॉर्च खरीदने के लिए लालायित हो जाते हैं। कहानी में एक समय के बाद वह व्यक्ति अपने दोस्त से मिलता है, जो अब एक साधु और दार्शनिक बन चुका है। दोनों के बीच बातचीत से यह स्पष्ट होता है कि भव्य पुरुष अपने प्रवचनों में भी वही बातें करता है जो टॉर्च बेचने वाला करता था। वह भी लोगों को अंधकार का डर दिखाकर उन्हें अपनी आध्यात्मिक विचारधारा की तरफ लाने की कोशिश कर रहा है। उनके प्रवचन का स्वरूप भले ही बदल गया हो, परंतु आधार वही है। यह विचार-provoking टॉर्च का स्वरूप वास्तव में केवल एक सामान नहीं, बल्कि आस्थाओं और विश्वासों के प्रति मानव की लिप्सा को दर्शाता है। अंत में, टॉर्च बेचने वाला अपने अनुभव से यह समझता है कि वह भी आध्यात्मिकता की एक अलग तरह की बिक्री कर रहा था। अध्याय में विचारों का आदान-प्रदान और आध्यात्मिकता की वास्तविकता के प्रति जागरूकता की आवश्यकता को साफ तौर पर पेश किया गया है। लेखक हरिशंकर परसाई ने इस रचना के माध्यम से व्यंग्य का अद्भुत प्रयोग किया है, जो न केवल मनुष्य की प्रवृत्तियों बल्कि समाज की विसंगतियों पर भी टिप्पणी करता है। पूरे पाठ में तार्किकता और व्यंग्य का मिश्रण है, जिससे पाठक को अपनी सोच पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया जाता है।
