हुसैन की कहानी अपनी ज़ुबानी
NCERT Class 11 Hindi Chapter 1: हुसैन की कहानी अपनी ज़ुबानी (Pages 1–14)
Summary of हुसैन की कहानी अपनी ज़ुबानी
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हुसैन की कहानी अपनी ज़ुबानी at a Glance
CBSE
Class 11
Hindi
Antral
1
1–14
6 study resources
हुसैन की कहानी अपनी ज़ुबानी Summary
हुसैन की कहानी अपनी ज़ुबानी में लेखक मकबूल फिदा हुसैन के प्रारंभिक जीवन के कुछ महत्वपूर्ण क्षणों को साझा करते हैं, जो उनके व्यक्तित्व को आकार देते हैं। कथा की शुरुआत उनके दादा के निधन के बाद होती है, जिसने मकबूल की जिंदगी में गहरा प्रभाव डाला। उनके पिता ने उन्हें बड़ौदा के बोर्डिंग स्कूल में भेजने का निर्णय लिया, ताकि वह अपने दादाजी की यादों से बाहर आ सकें और नए दोस्तों तथा पढ़ाई में ध्यान लगा सकें। बड़ौदा का शहर, जहाँ मकबूल का दाखिला हुआ, वहां के माहौल और शिक्षा प्रणाली का भी उल्लेख किया गया है। विद्यालय में धार्मिक और नैतिक शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद की गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता था, जिससे बच्चों का संपूर्ण विकास होता था। हुसैन ने यहाँ छह मुख्य दोस्तों के साथ एक गहरी मित्रता स्थापित की, जिन्होंने जीवन के अलग-अलग रास्तों पर यात्रा की। दोस्ती के ये बंधन जीवनभर चलते रहे, भले ही वे अलग-अलग पेशों में व्यस्त हो गए। लेखक अपने स्कूल के समारोहमें भाग लेने और खेलकूद में पुरस्कार जीतने के अनुभवों को साझा करते हैं, जो उनकी रचनात्मकता और प्रतिभा के पनपने का एक महत्वपूर्ण भाग थे। हुसैन ने ड्रॉइंग और पेंटिंग में अपनी रुचि विकसित की, जो उनके भीतर कला के प्रति जिज्ञासा को दर्शाता है। इसके बाद, रानीपुर बाजार में अपने चाचा की दुकान पर काम करने के दौरान भी उनकी कला के प्रति लगाव प्रकट होता है। वह अपने आस-पास की दुनिया को स्केच करते हैं, जो उनकी उत्सुकता और कल्पना शक्ति को दर्शाते हैं। एक दिन, उन्होंने एक फ़िल्मी इश्तहार देखकर अपने भीतर की कला को जगाने का फैसला किया। उन्होंने अपने पैसे से ऑयल कलर्स खरीदे और पहली बार अपनी पेंटिंग बनाई। इस अद्भुत यात्रा में, लेखक एक और महत्वपूर्ण व्यक्ति का जिक्र करते हैं, जो बेंद्रे साहब हैं, जिन्होंने मकबूल को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। इस मुलाकात ने मकबूल की कला में नयापन और दिशा दी। अंत में, उनके पिता की दूरदर्शिता का उल्लेख करते हुए, लेखक बताते हैं कि कैसे उन्होंने अपने बेटे को कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया, जबकि समाज में कला का स्थान काफी सीमित था। इस प्रकार, यह अध्याय न केवल हुसैन की व्यक्तिगत यात्रा को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे मूल्यों, मित्रता, और सामाजिक परिस्थितियों ने उनकी कला और व्यक्तित्व को आकार दिया। यह कहानी हमें सिखाती है कि कैसे संघर्ष और समर्पण से महानता की राह पर कदम रखा जा सकता है।
