बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर
NCERT Class 12 Hindi Chapter 15: बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर (Pages 128–132)
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Summary of बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर
बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर at a Glance
CBSE
Class 12
Hindi
Aroh
15
128–132
6 study resources
बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर Summary
इस पाठ में डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन और उनके योगदानों पर गहन चर्चा की गई है। उनका जन्म चौदह अप्रैल सन् उन्नीस सौ इक ninety one को मध्य प्रदेश के महू में हुआ। आंबेडकर ने अपने जीवन में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं और वे उन प्रमुख व्यक्तियों में से एक रहे, जिन्होंने दलितों और अन्य पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने अछूतों, महिलाओं और मजदूरों को मानवीय अधिकार दिलाने के लिए अनथक प्रयास किए। आंबेडकर का विचार था कि जातिवाद एक ऐसी प्रथा है जो लोगों को उनकी क्षमता के अनुसार कार्य करने से रोकती है। उन्होंने कहा कि श्रम विभाजन समाज की आवश्यकता है, लेकिन जाति-प्रथा इसे विकृत करती है। जाति-प्रथा एक अस्वाभाविक विभाजन है, जो न केवल श्रमिकों का विभाजन करती है बल्कि उन्हें नीच और ऊँच के आधार पर वर्गीकृत भी करती है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि जातिवाद सामाजिक और आर्थिक विकास में अवरोध पैदा करता है। डॉ. आंबेडकर ने अपने विचारों में स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व की अहमियत को भी रेखांकित किया। वे मानते थे कि आदर्श समाज को इन तीन मूल तत्वों पर आधारित होना चाहिए ताकि लोकतंत्र सच्चे अर्थों में फल-फूल सके। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'जातिभेद का उच्छेद' में आंबेडकर ने जाति-प्रथा की जड़ों और उसके उन्मूलन की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इसके माध्यम से यह संदेश दिया कि समाज को एकत्रित रूप से समता और स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। डॉ. आंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि वे जातिवाद और असमानता के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की प्रेरणा देते हैं। उनके उपदेश और पुस्तकें हम सभी को समानता, न्याय और मानवाधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। यह पाठ हमें उनके शिक्षाओं और विचारों को समझने में मदद करता है ताकि हम एक समतामूलक समाज की दिशा में आगे बढ़ सकें।
