Flash Cards
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कर्म का अर्थ क्या है?
कर्म का अर्थ है कार्य या कार्यों का समूह, जो व्यक्ति द्वारा किए जाते हैं।
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कर्म का योग क्या है?
कर्म में कुशलता को ही योग कहा गया है। यह स्थिति स्वयं को कार्य में संलग्न करने की है।
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श्रीकृष्ण का किसे उपदेश था?
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्तव्य का उपदेश दिया था कि उसे धर्मरक्षार्थ युद्ध करना चाहिए।
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कर्मफल की परिभाषा क्या है?
कर्मफल से तात्पर्य कार्य के परिणाम से है, जो व्यक्ति के कर्मों का फल होता है।
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निर्माण की प्रक्रिया क्या है?
कर्मों की आरंभ से लेकर उनके संपन्न होने तक की प्रक्रिया को निर्माण कहते हैं।
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कर्म में असक्ति का क्या महत्व है?
असक्त होकर कार्य करने से व्यक्ति का मन शांति और स्थिरता प्राप्त करता है।
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कर्मप्रधानता का उपदेश क्या है?
कर्म प्रधानता का अर्थ है कि कर्म करना ही प्रमुख है, फल पर हमारी कोई शक्ति नहीं है।
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इच्छा और कार्य का संबंध क्या है?
इच्छा से कार्य का आरंभ होता है और कार्य इच्छा की सिद्धि का माध्यम है।
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कर्म में ध्यान का महत्व क्या है?
कर्म करते समय ध्यान केंद्रित रखने से कार्य की गुणवत्ता में सुधार होता है।
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लोकसंग्रह का अर्थ और महत्व क्या है?
लोकसंग्रह का अर्थ है समाज का संग्रह, जिसमें कार्यों का समुदाय और सहयोग महत्वपूर्ण है।
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अहंकार का कार्य पर क्या प्रभाव है?
अहंकार के कारण व्यक्ति का कार्य में ध्यान भंग होता है और कार्य की सफलता प्रभावित होती है।
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श्रीकृष्ण की 'नियतं कुरु कर्म' वाक्य का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि अपने कर्तव्यों का पालन नियमित रूप से करो, कर्म श्रेष्ठ होता है।
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कर्मण्येवाधिकारस्ते के अर्थ बताएं?
इसका अर्थ है, तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने पर है, फल पर नहीं।
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सुख-दुख का समभाव क्या है?
सुख और दुख को समान दृष्टि से देखना, जिससे स्थिरता और संतुलन बना रहता है।
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बुद्धि का कार्य पर क्या प्रभाव है?
बुद्धि सही निर्णय लेने में सहायक होती है और कार्यों में कुशलता बढ़ाती है।
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कर्म और संन्यास का संबंध क्या है?
सच्चा संन्यास कर्म का त्याग नहीं, बल्कि कर्मों में न्यूनतम आसक्ति के साथ संलग्न रहना है।
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योगी का कर्म करने का तरीका क्या है?
योगी अदृश्य फल की आसक्ति के बिना कार्य करता है, जो उसे मुक्ति की ओर ले जाता है।
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कर्मों में संलग्न रहकर क्या प्राप्त होता है?
कर्मों में संलग्न रहकर व्यक्ति आत्म-समर्पण एवं आत्म-सिद्धि प्राप्त कर सकता है।
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सिद्धि और असिद्धि का अर्थ क्या है?
सिद्धि का मतलब सफलता और असिद्धि का अर्थ असफलता है, दोनों को समभाव से देखना चाहिए।
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कर्म के बिना कौन सी स्थिति नहीं प्राप्त होती?
कर्म के बिना निष्कर्मता को व्यक्ति कभी नहीं प्राप्त कर सकता है।
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