हार की जीत
NCERT Class 6 Hindi Chapter 4: हार की जीत (Pages 33–44)
Summary of हार की जीत
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हार की जीत at a Glance
CBSE
Class 6
Hindi
Malhar
4
33–44
6 study resources
हार की जीत Summary
इस अध्याय में बाबा भारती की कहानी है, जो अपने सुंदर और बलवान घोड़े, सुलतान, के प्रति गहरी प्रेमभावना रखते हैं। बाबा ने गाँव के जीवन से दूरी बना ली है और साधना में लीन हैं। उनका सुलतान से जुड़ाव इतना है कि वे उसके बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर सकते। कहानी का एक प्रमुख मोड़ तब आता है जब खड्गकसह, एक प्रसिद्ध डाकू, बाबा के पास आता है। उसे सुलतान की प्रसिद्धि की बात पता चलती है, और वह उसे देखने के लिए बेताब है। जब दोनों सुलतान को देखते हैं, तो खड्गकसह की आँखें आश्चर्य से भर जाती हैं। वह खुद को यह कहते हुए रोक नहीं पाता कि वह उसे अपने पास नहीं रहने देगा। बाबा भारती इस धमकी से भयभीत होते हैं और अपनी रातों की नींद इस चिंता में खो देते हैं। हालाँकि, कुछ समय बाद खड्गकसह नहीं आता, और बाबा थोड़े असावधान हो जाते हैं। फिर एक दिन बाबा घोड़े पर सवार होकर घुमते हैं जब उन्हें एक अपाहिज मिलता है, जो रामावाला जाने के लिए मदद मांगता है। बाबा उसकी मदद करते हैं और उसे घोड़े पर सवार कराते हैं। अचानक, अपाहिज घोड़े को तेज़ दौड़ाने लगते हैं, और बाबा को समझ में आता है कि वह वास्तव में खड्गकसह है। वह दरिद्रता और दया का पाठ पढ़ाते हुए खड्गकसह से समझौता करते हैं। बाबा एक गहरी भावना के साथ यह बताते हैं कि लोगों को गरीबों पर विश्वास नहीं खोना चाहिए, अन्यथा समाज में दया खत्म हो जाएगी। इस प्रकार, भले ही सुलतान खड्गकसह के पास चला जाता है, लेकिन खड्गकसह के मन में बाबा भारती की उच्चतम विचारधारा का प्रभाव छा जाता है। उसे उन मूल्यों का एहसास होता है जो बाबा के त्याग में निहित हैं। कहानी अंत में बाबा भारती की खुशी से खत्म होती है, जब वह फिर से अपने घोड़े से मिलते हैं, यह दिखाते हुए कि मनुष्य की दया और मानवता हमेशा जीवित रहती है।
