मैया मैं नहि माखन
NCERT Class 6 Hindi Chapter 9: मैया मैं नहि माखन (Pages 94–101)
Summary of मैया मैं नहि माखन
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मैया मैं नहि माखन at a Glance
CBSE
Class 6
Hindi
Malhar
9
94–101
6 study resources
मैया मैं नहि माखन Summary
इस कविता में सूरदास ने श्रीकृष्ण की मासूमियत और उनके साथियों से होने वाले संवाद को प्रस्तुत किया है। श्रीकृष्ण, एक छोटे बालक के रूप में, अपनी माँ यशोदा से कहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। उनका बचाव सुनकर हमें यह समझ में आता है कि कैसे बच्चे कभी-कभी अपनी बात साबित करने के लिए अपने मासूमियत का सहारा लेते हैं। कविता की शुरुआत होती है सुबह होते ही गायों को चराने जाने से, जहाँ श्रीकृष्ण माँ की उम्मीदों और अपनी इच्छा के बीच जूझते हैं। वह यह बताते हैं कि कैसे उन्हें मधुबन भेजा गया था और वह वहां चार पहर तक भटकते रहें। यहाँ उनकी बातों में एक नटखट व्यक्तित्व झलकता है जिसमें सभी गवाल-बाल उनसे बैर रखते हैं और वह सभी के सामने अपनी सफाई देने की कोशिश कर रहे हैं। उनके छोटे हाथ हैं, और इसी कारण वह माखन तक नहीं पहुँच सकते, इस तरह वह अपनी माँ से सहानुभूति प्राप्त करना चाहते हैं। सूरदास का यह संदेश केवल माखन खाने की बात नहीं है, बल्कि बच्चों और माताओं के बीच के संबंध को भी उजागर करता है। इस काव्य के माध्यम से सूरदास ने मातृत्व का प्रेम और एक बालक के नटखट स्वभाव का सुंदर चित्रण किया है। पाठ में श्रीकृष्ण की कथनी और करनी दोनों को एक साथ जोड़ा गया है, और इसमें बाल्यकाल की भोली लीला का सुंदर वर्णन किया गया है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि कैसे माता-पिता की नजर में बच्चे हमेशा छोटे और नादान होते हैं और उनके लिए मासूमियत एक विशेष व्यक्तित्व का हिस्सा होती है। इस पाठ से हमें यह सीख मिलती है कि हर बच्चे में नटखटपन होता है और प्यार में अपने बच्चों को समझना भी अहम होता है। इस प्रकार, कविता केवल एक साधारण कथा नहीं, बल्कि एक गहरी नेटवर्क का निर्माण करती है जो प्रेम और रिश्तों के महत्व को दर्शाती है।
