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परीक्षा

इस अध्याय में 'परीक्षा' को केंद्रित किया गया है, जिसमें एक योग्य दीवान की खोज और उम्मीदवारों की प्रतिस्पर्धा का वर्णन है। यह कहानी दया, साहस और आत्मबल के महत्व को उजागर करती है।

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परीक्षा Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

More about chapter "परीक्षा"

इस अध्याय में, रियासत देवगढ़ के वृद्ध दीवान सिद्दिक जानसिंह की विदाई पर चर्चा की गई है, जिसके बाद नए दीवान की आवश्यकता उत्पन्न हुई। विज्ञापन से पूरे देश से उम्मीदवारों की भीड़ जुटी। विभिन्न लोग, उनके कपड़े और व्यवहार, परीक्षा की भावना को दर्शाते हैं। पाठ में इस बात की महत्ता है कि दया और साहस का महत्व सभी से ऊपर है। खासकर, एक युवक द्वारा एक किसान की मदद करना और अंततः योग्य उम्मीदवार जानकीनाथ का चयन, यह दर्शाता है कि सच्चा योग्यता केवल ज्ञान और धन में नहीं, बल्कि मानवता और साहस में भी निहित है। यह कहानी हमारे सामाजिक मूल्यों और मानवीयता की आवश्यकता को स्पष्ट करती है।

Class 6 Hindi Chapter: परीक्षा | Malhar

Explore the Chapter 'परीक्षा' from Class 6 Hindi Malhar, focusing on the importance of diligence and integrity in seeking positions of responsibility.

इस अध्याय 'परीक्षा' का मुख्य विषय एक योग्य दीवान की खोज है, जिसमें विभिन्न उम्मीदवारों की प्रतिस्पर्धा और मानवीय गुणों का महत्व दर्शाया गया है।
दीवान सिद्दिक जानसिंह की विदाई उनकी उम्र और स्वास्थ्य कारणों से होती है, जब उन्हें समझ आता है कि अब राज-काज संभालने की शक्ति नहीं रही।
देश के पत्रों में ऐसा विज्ञापन प्रकाशित हुआ जिसमें देवगढ़ के लिए एक योग्य दीवान की आवश्यकता बताई गई। विज्ञापन में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं थी, लेकिन उनकी ईमानदारी को प्राथमिकता दी गई।
उम्मीदवारों का उत्साह सक्रियता और प्रतिस्पर्धा के रूप में दर्शाया गया है, जिसमें वे नए फैशन और आचार-विचारों के साथ देवगढ़ पहुँचते हैं।
खेल प्रतियोगिता का उद्देश्य उम्मीदवारों के बीच सहयोग और सहानुभूति को प्रोत्साहित करना है, जिससे सामूहिकता और प्रतिस्पर्धा का संचार हो।
दीवान बनने के लिए उम्मीदवारों से अधिकतर आचार-व्यवहार और कर्तव्य पर ध्यान देने की अपेक्षा थी, जबकि शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं थी।
युवक, जो खुद खेल के दौरान घायल हुआ था, ने अपने साहस और दया से किसान की गाड़ी को नाले से निकालने में मदद की।
जानकीनाथ का चयन उनके साहस, दया और आत्मबल के लिए किया गया, जो साबित करता है कि वे इस पद के लिए सबसे योग्य थे।
इस अध्याय में सामाजिक मूल्यों की चर्चा मुख्यतः दया, साहस और मानवता के संदर्भ में की गई है, जिसमें यह दर्शाया गया है कि सच्चा मूल्य ज्ञान और धन से अधिक महत्वपूर्ण होता है।
सरदार सुजानदस ने दीवानी के उममीदवारों के चयन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंत में जानकीनाथ को पद देने का निर्णय लिया।
दीवान की आवश्यकता दीवान सिद्दिक जानसिंह की विदाई के बाद हुई, जब नई नेतृत्व योग्यताओं की खोज की गई।
इस कहानी में नैतिक शिक्षा यह है कि साहस, दया और मानवता सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं, जो किसी भी व्यक्ति को योग्य बनाते हैं।
उम्मीदवारों का अनुभव उनके आचार-विचार, रहन-सहन और व्यवहार में दिखाया गया, जिसमें यह उल्लेखित किया गया है कि समाज में लोगों का आचरण और उनका व्यक्तित्व उनकी योग्यता को प्रभावित करता है।
हाँ, खेल न केवल प्रतियोगिता का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी सहयोग और सहानुभूति की भावना को भी उजागर करता है, जो सामूहिकता में सहायक है।
किसान की भूमिका इस संदर्भ में महत्वपूर्ण थी कि वह गाड़ी लेकर नाले में फंस गया था, और उसके माध्यम से एक युवक की दया और साहस को प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शित विज्ञापन ने देश भर से उम्मीदवारों को आकर्षित किया, जो अपने भाग्य को आजमाने देवगढ़ आए, जिससे रियासत में हलचल मच गई।
कहानी में कुछ पात्रों को ईर्ष्या और तिरस्कार का रूप देकर नकारात्मक दृष्टिकोण से चित्रित किया गया है, जो मुख्य पात्रों की महानता को और अधिक दर्शाते हैं।
जिन पात्रों को प्रशंसा के पात्र माना गया है, उनमें जानकीनाथ को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि वह न केवल उदार हैं बल्कि साहस भी दिखाते हैं।
उम्मीदवारों के बीच जानकीनाथ को इसलिए चुना गया क्योंकि उन्होंने एक अराजक स्थिति में साहस दिखाया और अपनी उदारता से सभी का दिल जीत लिया।
इस अध्याय का सांस्कृतिक महत्व यह है कि यह मानवीय मूल्यों, दया और साहस को बढ़ावा देता है, जो भारतीय समाज की मूल धारा का संकेत करते हैं।
कहानी में मुख्य संघर्ष यह है कि कैसे उपयुक्त व्यक्ति की खोज के दौरान, वास्तविक गुणों की पहचान की जाए और समाज में सही चयन किया जाए।
हाँ, इस कहानी का आधुनिक संदर्भ हमारे समाज में मानवीय मूल्यों और नैतिकता के प्रति जागरूकता को दर्शाता है, जो आज भी प्रासंगिक है।
किसान और युवक के संवाद का अर्थ है कि एक व्यक्ति की दया और साहस न केवल दूसरों के प्रति योगदान देती है, बल्कि सामाजिक सहानुभूति की आधारशिला भी रखती है।
इस अध्याय से यह सीख मिलती है कि सच्ची योग्यता केवल ज्ञान के माध्यम से नहीं, बल्कि मानवीयता और साहस से भी मापा जाता है।