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सत्रिया और बिहू नत्यृ

इस अध्याय में असम के 'जबहू' उत्सव और 'सत्रिया' नृत्य की समृद्ध परंपरा का अवलोकन किया गया है, जो भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को उजागर करता है। यह कहानी एंजेला और उसके परिवार की यात्रा के माध्यम से असम की खूबसूरती को दर्शाती है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 6
Hindi
Malhar

सत्रिया और बिहू नत्यृ

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More about chapter "सत्रिया और बिहू नत्यृ"

अध्याय 'सत्रिया और बिहू नत्यृ' में एंजेला और उसके परिवार की असम यात्रा का वर्णन है। जब वे 'जबहू' उत्सव में भाग लेते हैं, तो उनके अनुभव के दौरान असम की समृद्ध संस्कृति और पर्व की महत्ता का एहसास होता है। एंजेला को 'सत्रिया' नृत्य के जादू से मंत्रमुग्ध कर दिया जाता है, जब वह स्थानीय नृत्यperformers की प्रस्तुतियों को देखती है। यह अध्याय यह दर्शाता है कि कैसे नृत्य और संगीत भारत में सामाजिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम बनते हैं। एंजेला का यह अनुभव न केवल उसकी आँखों के सामने नई दुनिया का परिचय कराता है, बल्कि उसे असम की पारंपरिक कला के महत्व से भी परिचित कराता है।
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सत्रिया और बिहू नत्यृ - Class 6 Hindi Chapter

जानें असम के जबहू उत्सव और सत्रिया नृत्य की गहराई और महत्ता। यह अध्याय भारतीय संस्कृति के अद्भुत पहलुओं को उजागर करता है, जो विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए शिक्षाप्रद है।

जबहू उत्सव असम में मनाया जाने वाला एक कृषि आधारित त्योहार है, जो अप्रैल में शुरू होता है। यह उत्सव किसानों द्वारा धान बोने, रोपने, और फसल के समय मनाया जाता है, और इसमें नृत्य, संगीत और स्थानीय खाने का आनंद लिया जाता है।
सत्रिया नृत्य असम की एक प्रमुख नृत्य परंपरा है, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह नृत्य मुख्य रूप से वैष्णव समुदाय से जुड़ा है और यह भावनाओं के प्रदर्शन के माध्यम से कहानियों को जीवंत करता है। यह समृद्ध कला रूप न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि इसका एक आध्यात्मिक पहलू भी है।
एंजेला की यात्रा का मुख्य उद्देश्य असम की नृत्य परंपरा पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए उसकी माँ द्वारा विषय की खोज करना था। इसका लक्ष्य भारतीय संस्कृति की समृद्धता को दर्शाते हुए नृत्य के महत्व को समझना था।
जबहू उत्सव में धान से जुड़ी गतिविधियाँ, नृत्य, गीत, और सामुदायिक भोज शामिल होते हैं। यह उत्सव स्थानीय निवासियों द्वारा आनंदित होते हुए कृषि जीवन की खुशियों को मनाने का एक अवसर है।
जबहू उत्सव को साल में तीन बार मनाया जाता है: जब किसान बीज बोते हैं, जब धान रोपते हैं, और जब फसल तैयार होती है। ये सभी चरण भारतीय कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं और खुशी का कारण बनते हैं।
सत्रिया नृत्य वैष्णव धर्म और संस्कृति से जुड़ा हुआ है, जिसमें भगवान कृष्ण की लीलाओं और अन्य पौराणिक कथाओं को कथावाचन के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है। यह नृत्य असम की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दजक्णापथ सत्र असम के प्रमुख मठों में से एक है, जहाँ सत्रिया नृत्य की परंपरा को संरक्षित किया जाता है। यहाँ नृत्यकाएँ न केवल प्रदर्शन करती हैं, बल्कि शिक्षण और प्रशिक्षण का कार्य भी करती हैं।
जेहाबू, जो बसंती नृत्य के रूप में जाना जाता है, बच्चों और युवाओं द्वारा खुले आसमान के नीचे किया जाने वाला एक जीवंत और उत्साहपूर्ण नृत्य है। इसमें रंग-बिरंगी पोशाकें और वाद्ययंत्र शामिल होते हैं, जो इसे आकर्षक बनाते हैं।
मजहला नृत्य सत्रिया नृत्य का एक विशेष प्रकार है, जिसमें पुरुष और महिला कलाकार कार्य करते हैं। यह नृत्य भगवान जगन्नाथ की कहानियों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है और इसमें नाटकीयता और भावनाएँ शामिल होती हैं।
असम का उभरता दृश्य इसकी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, चाय बागानों, और सांस्कृतिक विविधता से भरा हुआ है। यहाँ की पारंपरिक नृत्य और उत्सव जैसी गतिविधियाँ इसे एक जीवंत संस्कृति का प्रतीक बनाते हैं।
एंजेला और अनु की दोस्ती उनकी समान आयु और समान रुचियों के कारण होती है। वे साथ में खेलते हैं, और अनु बहुत से असमिया शब्द एंजेला को सिखाती है, जिससे उनकी दोस्ती गहरी और मजेदार बन जाती है।
असम का लोक संगीत विविधता से भरा होता है, जिसमें विभिन्न वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें बासुरी, ढोल, और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्र शामिल हैं, जो नृत्य एवं त्योहारों के दौरान बजाए जाते हैं।
भारत में नृत्य सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का एक अभिन्न हिस्सा है। यह न केवल भक्तिभाव और उत्सव के समय किया जाता है, बल्कि यह व्यक्ति की भावनाओं और सामाजिक संरचना को भी दर्शाता है।
सत्रिया नृत्य में आमतौर पर महिलाएँ पारंपरिक मेश्वरी साड़ी पहनती हैं, जो सुंदर रेशमी कपड़े से बनी होती है। ये पोशाकें नृत्य के दौरान गतिशीलता को बढ़ाने में मदद करती हैं।
हाँ, एंजेला असम की संस्कृति से गहराई से प्रभावित होती है। उसकी यात्रा के अनुभव और स्थानीय नृत्य, संगीत, और त्योहार उसे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का एहसास कराते हैं।
बच्चों के लिए बसंत के दौरान कई गतिविधियाँ होती हैं, जैसे नृत्य प्रदर्शन, रंगोली बनाना, और पारंपरिक खेल खेलना। ये गतिविधियाँ उन्हें अपने सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ती हैं।
असम के प्रमुख त्योहारों में बिहू, Rongali Bihu, और Magh Bihu शामिल हैं। ये त्योहार कृषि से जुड़े होते हैं और असम के संस्कृति की जीवंतता को दर्शाते हैं।
असम का सबसे प्रसिद्ध नृत्य सत्रिया है, जिसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक घटनाओं के दौरान प्रस्तुत किया जाता है। यह नृत्य अपनी विशेष शैलियों और लय के लिए जाना जाता है।
जब परिवार असम पहुँचता है, तो वे इसके प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक गतिविधियों से प्रभावित हो जाते हैं। जबहू उत्सव और नृत्य देखने से उनकी यात्रा यादगार बन जाती है।
सत्रिया नृत्य को सिखाने वाले साधु वे भक्त होते हैं जो मठों में रहते हैं। वे नृत्य की कला को अनुकरणीय शैली में प्रस्तुत करते हैं और इसे विद्यार्थियों को सिखाते हैं।
एंजेला का स्थानीय लोगों के साथ अनुभव बहुत ही अच्छा और संवादात्मक होता है। वे नृत्य, संस्कृति, और परंपराओं के बारे में चर्चा करती है, जिससे उसे असम के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
असम का यात्रा अनुभव बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह उन्हें नए विचार, संस्कृति, और परंपराओं के प्रति संवेदनशील बनाता है, जिससे उनका दृष्टिकोण विस्तृत होता है।

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