सेवा हि परमो धर्म:
NCERT Class 7 Sanskrit Chapter 5: सेवा हि परमो धर्म: (Pages 47–56)
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Summary of सेवा हि परमो धर्म:
सेवा हि परमो धर्म: at a Glance
CBSE
Class 7
Sanskrit
Deepakam
5
47–56
6 study resources
सेवा हि परमो धर्म: Summary
पाँचवें पाठ में यह चर्चा होती है कि सेवा किस प्रकार सर्वोच्च धर्म है। पाठ में यह बताया गया है कि मानव को अपने जीवन में सफलता अर्जित करने के लिए सेवा करni चाहिए। सेवा का महत्व, मानवीय विशेषताएँ, और ये विशेषताएँ कैसे हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं, यह सब इस पाठ में समाहित है। इस पाठ में कई महत्वपूर्ण कहानियाँ और दृष्टांत दिए गए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि मानवता की सेवा करना कितनी महत्वपूर्ण है।कहानी में नागाजुजन की का उल्लेख है, जिसने राजा को आवश्यक औषधि देने का कार्य किया था। नागाजुजन ने राजा से कहा कि उसे औषधि तैयार करने में सहायता चाहिए थी। राजा ने उसकी सहायता करते हुए कहा कि वह आवश्यकताएँ पूरी करने का प्रयास करेगा। दूसरी ओर, जब नागाजुजन ने अपने काम के लिए समय नहीं पाया, तो उसे चिंता हुई। यह दृश्य सेवा का महत्व प्रदर्शित करता है। पाठ में यह भी कहा गया है कि यदि हम अपने व्यक्तिगत लाभों के लिए कार्य करते हैं, तो सेवा का अर्थ समाप्त हो जाता है। मानवitas का सेवाभावी गुण बहुत महत्वपूर्ण है। यह पाठ हमें सिखाता है कि सेवा का अर्थ केवल खुद के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई के लिए कार्य करना है। शिक्षकों को भी अपने छात्रों को यह समझाना आवश्यक है। पाठ का अंत हमें प्रेरणा देता है कि हमें सदैव दूसरों की सहायता करनी चाहिए और सेवा की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
