‘भारति, जय, विजयकरे!’ (निराला) एक प्रेरणादायक देशभक्ति कविता है, जिसमें भारतभूमि को देवी-रूप में चित्रित किया गया है। इसमें कृषि-संपन्नता, प्राकृतिक सौंदर्य (हिमालय, गंगा, वन-लता) और आध्यात्मिक चेतना (ओंकार) के माध्यम से भारत की विजय-श्री की कामना व्यक्त होती है।
Author: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
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कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ का अध्याय ‘भारति, जय, विजयकरे!’ (निराला): कविता का सार, प्रमुख भाव, ‘कनक-शस्य-कमलधरे’, गंगा-हिमालय के रूपक, अनुप्रास/रूपक अलंकार, समासयुक्त शब्द और परीक्षा हेतु 25 FAQs।