अरे इन दोहुन राह न पाई / बालम, आवो हमारे गेह रे
NCERT Class 11 Hindi Chapter 9: अरे इन दोहुन राह न पाई / बालम, आवो हमारे गेह रे (Pages 109–113)
Summary of अरे इन दोहुन राह न पाई / बालम, आवो हमारे गेह रे
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अरे इन दोहुन राह न पाई / बालम, आवो हमारे गेह रे at a Glance
CBSE
Class 11
Hindi
Antra
9
109–113
6 study resources
अरे इन दोहुन राह न पाई / बालम, आवो हमारे गेह रे Summary
इस अध्याय में कबीर के दो पदों का अध्ययन किया गया है। पहले पद में कबीर ने हिंदू और मुसलमान दोनों के कुरीतियों का उल्लेख करते हुए बाह्याडंबर का विरोध किया है। यहाँ कबीर ने धर्म के नाम पर होने वाले विभाजन और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई है। वे कहते हैं कि दोनों समुदाय अपनी अपनी बड़ाई करते हैं लेकिन वास्तविकता कुछ और है। हिंदू अपनी मूर्तियों की पूजा करता है, जबकि मुसलमान मांस के सेवन करता है। कबीर का यह विचार है कि जो बाह्य दिखावे हैं, वे सही अर्थ में धर्म की पहचान नहीं कराते। दूसरे पद में कबीर खुद को एक दुखी प्रेमिका के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वह अपने प्रेमी को बुलाते हैं और उसके बिना अपने जीवन को निराशाजनक बताते हैं। यह पद दांपत्य प्रेम और घर की महत्ता को इंगित करता है। कबीर यह दर्शाते हैं कि जब प्रियतम दूर हो जाता है, तो मन की शांति खत्म हो जाती है, जैसे एक प्यासा व्यक्ति पानी के बिना बेहाल होता है। इस पद में भक्ति की भावनाएँ और प्रेम की गहराई को सहज और सरल शब्दों में व्यक्त किया गया है। इन दोनों पदों में कबीर ने न केवल व्यक्तिगत अनुभव को सांझा किया है, बल्कि सामाजिक सन्देश भी दिया है। उनकी रचनाएँ सच्चाई और प्रेम की ताकत को उजागर करती हैं। कबीर का काव्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे जातिगत, धार्मिक भेदभाव को खंडित करते हैं और एक समानता का संदेश फैलाते हैं। उनका कविता का ढंग सरल और जनभाषा के निकट है, जिससे लोग आसानी से जुड़ पाते हैं। इस पाठ के माध्यम से छात्र कबीर की जीवनदृष्टि, उनकी कविताओं में निहित गहराईऔर सामाजिक सन्देश को समझ पाएंगे।
