हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर
NCERT Class 11 Hindi Chapter 14: हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर (Pages 135–138)
Summary of हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर
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हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर at a Glance
CBSE
Class 11
Hindi
Aroh
14
135–138
6 study resources
हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर Summary
इस अध्याय में अक्कमहादेवी की दो प्रसिद्ध रचनाएँ प्रस्तुत की गई हैं। इनमें से पहली कविता 'हे भूख! मत मचल' इंद्रियों के नियंत्रण का संदेश देती है। अक्कमहादेवी अपनी भावनाओं और इच्छाओं को समझाने के लिए बोलती हैं। वे भूख, प्यास, नींद, क्रोध और अन्य तृष्णाओं को दूर रखने की प्रार्थना करती हैं। उनका यह कहना है कि ये सभी इंद्रियाँ लक्ष्य की प्राप्ति में बाधा डालती हैं। दूसरी कविता 'हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर' में अक्कमहादेवी अपने ईश्वर चन्नमल्लिकार्जुन से पूरी तरह समर्पण की कामना करती हैं। वे चाहती हैं कि वे सभी भौतिक वस्तुओं से दूर रहें और अपने अहंकार को भूले। इस कविता में यह जताया गया है कि भक्ति की राह में अद्भुत बलिदान और त्याग की आवश्यकता होती है। उनका ईश्वर के प्रति यह आह्वान एक गहरी भक्ति को दर्शाता है। ये दोनों रचनाएँ अक्कमहादेवी के विचारों और उनके समय के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश के बारे में बताती हैं। अक्कमहादेवी का यह प्रयास न केवल व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करना है, बल्कि समग्र समाज में स्त्रियों के अधिकारों और स्वतंत्रता की बात भी करती हैं। उनकी कविताएँ उस समय की पितृसत्तात्मक व्यवस्था को चुनौती देती हैं और एक नई चेतना का संचार करती हैं। अध्याय के माध्यम से students को न केवल साहित्य का अध्ययन करने का अवसर मिलता है, बल्कि यह भी समझने का कि कैसे कवि अपनी भावनाओं और विचारों को काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत करते हैं। यह अध्याय विद्यार्थियों को अक्कमहादेवी की कविताओं की सरलता, शुद्धता और गहराई को समझने में मदद करता है।
