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भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण

इस अध्याय में भारतीय संगीत में वाद्य यंत्रों के वर्गीकरण का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह वाद्य यंत्रों की विशेषताओं और उनके संगीत में महत्व को उजागर करता है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 11
Sangeet
Tabla evam Pakhawaj

भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण

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More about chapter "भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण"

भारतीय संगीत में वाद्य यंत्रों का विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकरण किया जाता है। इन वाद्य यंत्रों का उद्देश्य ध्वनि उत्पन्न करना, लयबद्ध संगीत उत्पन्न करना, और विभिन्न भावनाओं का संचार करना है। वाद्य यंत्रों को चार मुख्य श्रेणियों में बाँटा गया है: तत् वाद्य, अवनद्ध वाद्य, घन वाद्य, और सुताजसर वाद्य। प्रत्येक श्रेणी के वाद्य यंत्रों की अपनी विशेषताएँ और उपयोग होते हैं। वाद्य यंत्र न केवल संगीत में, बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक समारोहों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मानव मन की भावनाओं और सामाजिक जीवन के विविध पहलुओं को दर्शाते हैं। इस अध्याय में वाद्य यंत्रों का इतिहास, विकास और आधुनिक युग में उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।
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भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण - तबला एवं पखावज

इस अध्याय में भारतीय संगीत में वाद्य यंत्रों के वर्गीकरण और उनके महत्व की चर्चा की गई है। जानिए वाद्य यंत्रों की चार श्रेणियाँ - तत्, अवनद्ध, घन, एवं सुताजसर।

वाद्य यंत्रों का महत्व संगीत में ध्वनि उत्पन्न करने और लयबद्धता को प्रदान करने में है। ये भावनाओं का संचार करते हैं और सांस्कृतिक समारोहों का अहम हिस्सा होते हैं। बिना वाद्य के, संगीत अधूरा लगता है।
भारतीय संगीत में वाद्य यंत्रों को चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: तत् वाद्य, अवनद्ध वाद्य, घन वाद्य, और सुताजसर वाद्य, जो अपनी विशेषताओं के साथ संगीत में अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं।
तत् वाद्य वे होते हैं जिन पर तारों की मदद से ध्वनि उत्पन्न की जाती है। इन्हें आघात या घर्षण के ज़रिये भी बजाया जाता है, जैसे कि गिटार, वॉयलिन और तानपुरा।
अवनद्ध वाद्य वे यंत्र होते हैं जो अंदर से खोखले होते हैं और जिनके मुख पर चमड़ा मढा होता है। इन्हें हाथ या डंडी से बजाया जाता है, जैसे पखावज, ढोलक, और नादस्वरम।
घन वाद्य वे होते हैं जो धातु या लकड़ी से बने होते हैं और इन्हें आपस में टकराकर बजाया जाता है। उदाहरण के लिए, घंन, ढोलक, और झांझ।
सुताजसर वाद्य वे होते हैं जिनमें हवा भरकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है, जैसे बांसुरी, शहनाई, और क्लेरोनेट। इन्हें फूंककर बजाया जाता है।
भारत में वाद्य यंत्रों का उपयोग प्राचीन काल से होता आ रहा है, जहां विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों में इनका इस्तेमाल किया जाता था।
खोल वाद्य विशेषकर बंगाल सांस्कृतिक समारोहों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसके माध्यम से धार्मिक अनुष्ठानों में धुनें प्रस्तुत की जाती हैं।
तबला और पखावज भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक समारोहों में लयबद्धता और ताल प्रदान करते हैं।
वाद्य यंत्रों में भिन्नता उनके बनाए जाने की सामग्री, बजाने के तरीके, और उत्पन्न होने वाली ध्वनि के आधार पर होती है। प्रत्येक श्रेणी के वाद्य यंत्र की अपनी विशेषताएँ होती हैं।
रूद्र वीणा से सुतुरबहार वाद्य बना है, जो भारतीय संगीत में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
युद्ध में वाद्य यंत्रों का उपयोग सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने और संकेत देने के लिए किया जाता है, जैसे ढोल और नगाड़े।
इलेक्‍ट्रॉनिक तानपुरा एक आधुनिक उपकरण है जो गायक और वादक को उनकी आवाज़ को समर्थन देने में मदद करता है। यह ध्वनि को पुन: उत्पन्न करने की क्षमता रखता है।
संगीत में वाद्य यंत्रों का उपयोग सामाजिक जीवन में गहराई से जुड़ा होता है। इनका उपयोग पर्व, त्योहारों और अनुष्ठानों में एकता और खुशी की भावना बढ़ाने के लिए होता है।
घन वाद्य वे उपकरण हैं जिन्हें आपस में टकराकर या हथौड़ी के ज़रिये बजाया जाता है, जैसे घंन, ज़ंगी, और चांदन।
अवनिद्ध वाद्य वे यंत्र होते हैं которые ध्वनि उत्पन्न करने के लिए أصली चमड़े पर आधारित होते हैं, जैसे ढोल, पखावज और मादल।
संगीत में सुताजसर वाद्यों में बांसुरी, शहनाई, और सैक्सोफोन शामिल होते हैं, जो हवा द्वारा ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
आधुनिक वाद्य यंत्र, जैसे इलेक्‍ट्रॉनिक तानपुरा और डिजिटल उपकरण, संगीत की समझ और प्रस्तुतीकरण में मदद करते हैं, इन्हें शास्त्रीय और आधुनिक संगीत दोनों में प्रयोग किया जाता है।
पखावज का इस्तेमाल मुख्यतः शास्त्रीय नृत्य और गायन में ताल के रूप में किया जाता है, जो लयबद्धता और संगीतात्मकता को बनाए रखता है।
ढोलक बनाने के लिए लकड़ी और चमड़े का उपयोग किया जाता है, जिसमें दाएं और बाएं हिस्से में विभिन्न प्रकार के चमड़े का इस्तेमाल होता है।
गाता वीणा मानव शरीर को वाद्य यंत्र के रूप में मानती है, जो संगीत में व्यक्तिगत और भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
अन्य देशों में भारतीय वाद्य यंत्रों को विश्व संगीत में शामिल किया गया है, जहाँ कलाकार इन्हें विभिन्न संगीत शैलियों में अपनाते हैं।

Chapters related to "भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण"

कै से दिखते हैं तबला एवंपखावज वाद्य?

यह अध्याय तबला और पखावज वाद्यों की बनावट और उनके वादन की तकनीकों के बारे में बताता है। ये वाद्य भारतीय संगीत में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

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तबला एवंपखावज वाद्यों पर बजने वाले वर्ण एवं बोल

यह अध्याय तबला और पखावज वाद्यों पर बजने वाले मुख्य वर्णों और बोलों का परिचय देता है, जो भारतीय संगीत में महत्वपूर्ण हैं।

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तबला एवंपखावज वाद्यों की उत्‍पत्ति एवंविकास

इस अध्याय में तबला और पखावज की उत्पत्ति और विकास पर चर्चा की गई है, जो भारतीय संगीत में महत्वपूर्ण ढोलक और वाद्य हैं।

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ताल-लिपि पद्धति एवंविभिन्‍न ठेक

यह अध्याय ताल-लिपि पद्धति और विभिन्न ठेके के बारे में जानकारी प्रदान करता है, जो भारतीय संगीत में एक महत्वपूर्ण आधार है। इसे समझने से विद्यार्थियों को लय और ताल की संरचना स्पष्ट होगी।

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पारिभाषिक शब्‍द

इस अध्याय में पारिभाषिक शब्द और उनकी महत्ता को समझाया गया है, जो संगीत की समझ में सहायक होते हैं। यह छात्रों को संगीतिक भाषा के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराता है।

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तबला एवंपखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन

यह अध्याय तबला और पखावज वाद्यों के विभिन्न घरानों का वर्णन करता है, जो भारतीय संगीत की धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

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भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

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