यह अध्याय तबला और पखावज वाद्यों की बनावट और उनके वादन की तकनीकों के बारे में बताता है। ये वाद्य भारतीय संगीत में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
किस कारण से तबले की पूड़ी की मोटाई महत्वपूर्ण होती है?
तबले की पूड़ी को कसा जाता है, ताकि उसका स्वर क्या हो सके?
पखावज का उपयोग मुख्यतः किस प्रकार की गायकी में होता है?
पखावज को मुख्य रूप से किन सामग्रियों से बनाया जाता है?
तबला वादन के दौरान गजरे को किस तरह से उपयोग किया जाता है?
पखावज और तबला दोनों में से कौन सा वाद्य द्विमुखी है?