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कै से दिखते हैं तबला एवंपखावज वाद्य?

इस अध्याय में तबला और पखावज वाद्य की विशेषताएँ और निर्माण प्रक्रिया को समझाया गया है। यह भारतीय संगीत में इन वाद्यों की भूमिका को स्पष्ट करता है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 11
Sangeet
Tabla evam Pakhawaj

कै से दिखते हैं तबला एवंपखावज वाद्य?

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More about chapter "कै से दिखते हैं तबला एवंपखावज वाद्य?"

तबला और पखावज, उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रमुख वाद्य हैं। तबला, दो भागों में विभाजित होता है: दायाँ और बायाँ, जिन्हें अलग-अलग तरीकों से बजाया जाता है। इसका निर्माण मुख्यतः लकड़ी से होता है, जिसमें तीन खोखले और एक ठोस तह होती है। पखावज, एक द्वमुखी वाद्य है, जिसे विशेष रूप से ध्रुपद गायकी में उपयोग किया जाता है। इसकी लम्बाई 75 से 80 सेंटीमीटर होती है और विभिन्न ध्वनियों के लिए गीला आटा और स्याही का उपयोग किया जाता है। दोनों वाद्ययंत्रों का उपयोग कथक नृत्य में भी किया जाता है।
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कै से दिखते हैं तबला एवंपखावज वाद्य?

इस अध्याय में तबला और पखावज वाद्य की विशेषताएँ और निर्माण प्रक्रिया को समझाया गया है। यह भारतीय संगीत में इन वाद्यों की भूमिका को स्पष्ट करता है।

तबला एक प्रमुख उत्तर भारतीय शास्त्रीय वाद्य है, जो साधारणत: दायाँ और बायाँ दो अंगों में बंटा होता है। दायाँ हिस्सा दाहिने हाथ से और बायाँ हिस्सा बाएँ हाथ से बजाया जाता है। इसे ताल और लय के मापन के लिए प्रयोग किया जाता है।
पखावज का निर्माण शीशम, बीजा या आम की लकड़ी से किया जाता है। इसकी विशेषता इसका बड़ा बायाँ मुख और छोटा दायाँ मुख है। इसके दोनों मुखों पर चमड़े की पूड़ी लगी होती है, जिससे इसकी ध्वनि फैलती है।
तबला एक ऊध्यमुखी वाद्य है और इसके दो मुख्य भाग होते हैं - दायाँ और बायाँ। यह लकड़ी का बना होता है, जिसमें आमतौर पर शीशम या नीम का उपयोग होता है। तबला की ध्वनि में विशेषता इसके ठोस और खोखले हिस्सों के संयोजन से आती है।
तबला और पखावज दोनों ही प्रमुख भारतीय वाद्य हैं, लेकिन तबला एकल वादन और ताल के लिए प्रयोग होता है जबकि पखावज विशेष रूप से ध्रुपद गायकी और कथक नृत्य में उपयोग होता है। पखावज का आकार भी बड़ा होता है और इसे तलटाकर बजाया जाता है।
तबले की पूड़ी के तीन मुख्य भाग होते हैं: चाँटी, लव, और स्याही। चाँटी तबले के वादन के लिए आवश्यक होती है, लव या मैदान वादन में मदद करता है, और स्याही ध्वनि को प्रकट करती है।
गजरा, तबले की पूड़ी को कसने के लिए उपयोग किया जाता है। यह तबले की ध्वनि को बढ़ाता है और वादन के दौरान स्वरों को सही आकार में रखने में मदद करता है।
पखावज का मुख्य रूप से ध्रुपद और धमार गायकी में उपयोग होता है। इसे एकल वादन के लिए भी पसंद किया जाता है।
पखावज की औसत लंबाई लगभग 75 से 80 सेंटीमीटर होती है, जिसमें दायें और बायें मुख का व्यास भी भिन्न होता है।
तबले का दायाँ मुख सामान्यतः छोटा होता है, जबकि बायाँ मुख बड़ा और गहरा होता है, जिससे विभिन्न स्वर उत्पन्न होते हैं।
चाँटी, तबले की पूड़ी के किनारे पर स्थित होती है और वादन में मुख्य स्वर उत्पन्न करने में मदद करती है। इसे बजाते समय विशेष ताल और लय के लिए सामंजस्य बना रहता है।
तबला की ध्वनि तेज और तालबद्ध होती है, जबकि पखावज की ध्वनि गरजती और गहरी होती है, जो इसकी बड़ी संरचना के कारण होती है।
तबले को बनाने के लिए आम तौर पर शीशम, नीम और बीजासार लकड़ी का उपयोग किया जाता है। इन लकड़ियों का ठोस और खोखली संरचना इसकी ध्वनि गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
तबले की संरचना में चार तहस्से होते हैं, जिनमें से तीन खोखले और एक ठोस होता है। ठोस तह नीचे की ओर होता है, जो वादन के दौरान स्थिरता प्रदान करता है।
पखावज के बायें मुख पर गीला आटा लगाया जाता है, जिससे इसकी ध्वनि गहरी और गूंजदार होती है।
तबला वादन में दायें हाथ से तबले को बजाने के लिए मुख्य पद्धतियों का उपयोग किया जाता है, जबकि बायें हाथ का उपयोग डगगे को नियंत्रित करने के लिए होता है।
तबला वादक गौरतलब ताल और लय को बनाए रखने के लिए गजरे पर आघात करके स्वर को ऊँचा या नीचा कर सकते हैं।
तबला बजाने के लिए कुछ प्रमुख तकनीकें हैं, जैसे 'ता', 'न', 'घे', और 'खे', जो वादन के दौरान विभिन्न ध्वनियों को उत्पन्न करने में मदद करती हैं।
पखावज की ध्वनि गहरी और स्थिर होती है, जो इसे विशेष ध्रुपद गायकी और नृत्य प्रदर्शन में बेहद प्रभावी बनाती है।
तबला वादक के लिए ताल, लय और ध्वनि नियंत्रण के साथ-साथ सुनने और समझने की क्षमता का अच्छा ज्ञान होना जरूरी होता है। प्रत्येक ध्वनि का सही समय पर उत्पादन अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
पखावज में विभिन्न तालों का प्रयोग होता है, जैसे चौताल, धमार, और सूलताल, जो इसकी विविधता और संगीत की गहराई को बढ़ाते हैं।
तबला और पखावज का नैसर्गिक सौंदर्य उनकी निर्माण सामग्री और ध्वनि गुणवत्ता पर निर्भर करता है, और एक सच्ची संगीत प्रस्तुति में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

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कै से दिखते हैं तबला एवंपखावज वाद्य? Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

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