तबला एवंपखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन
NCERT Class 11 Sangeet Chapter 8: तबला एवंपखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन (Pages 85–112)
तबला एवंपखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन key concepts
- अध्याय 'तबला एवंपखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन' में विभिन्न भारतीय वाद्य साजों के महत्त्व और उनके घरानों की अद्वितीय विशेषताओं का विवेचन है। यह चर्चा करता है कि कैसे मुग़ल काल में संगीत की विभिन्न शैलियाँ विकसित हुईं और निरंतरता बनाए रखी गई। इसमें दिल्ली, ददलली, लखनऊ, अजराड़ा, बनारस, पंजाब और फरुखाबाद घरानों की वादन शैलियों की बारीकी से जानकारी दी गई है। प्रत्येक घराना अपने विशेष बोली और शास्त्रीय प्रथाओं के साथ पहचान बनाए हुए है। इस प्रकार का वर्गीकरण संगीत की विविधता और उसकी सांस्कृतिक गहराई को दर्शाता है।
Important topics in तबला एवंपखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन
- 1.यह अध्याय तबला और पखावज वाद्यों के विभिन्न घरानों के अद्वितीय वादन शैलियों का वर्णन करता है। इसे भारतीय संगीत में घरानों की भूमिका और तदनुसार सांस्कृतिक विविधता की प्रस्तुति के रूप में देखा जा सकता है। अध्याय 'तबला एवंपखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन' में विभिन्न भारतीय वाद्य साजों के महत्त्व और उनके घरानों की अद्वितीय विशेषताओं का विवेचन है। यह चर्चा करता है कि कैसे मुग़ल काल में संगीत की विभिन्न शैलियाँ विकसित हुईं और निरंतरता बनाए रखी गई। इसमें दिल्ली, ददलली, लखनऊ, अजराड़ा, बनारस, पंजाब और फरुखाबाद घरानों की वादन शैलियों की बारीकी से जानकारी दी गई है। प्रत्येक घराना अपने विशेष बोली और शास्त्रीय प्रथाओं के साथ पहचान बनाए हुए है। इस प्रकार का वर्गीकरण संगीत की विविधता और उसकी सांस्कृतिक गहराई को दर्शाता है।
