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अतीत में दबे पाँव

अतीत में दबे पाँव अध्याय में मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के प्राचीन शहरों की खोज और उनकी विशेषताओं का विवरण है। यह सिंधु घाटी सभ्यता की महानता और उसकी अवशेषों के अद्वितीय सौंदर्य को उजागर करता है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 12
Hindi
Vitan

अतीत में दबे पाँव

Chapter Summary

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More about chapter "अतीत में दबे पाँव"

अतीत में दबे पाँव अध्याय में मोहनजोदड़ो और हड़प्पा को विश्व के सबसे पुरानी नियोजित शहरी सभ्यताओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये दोनों शहर सिंधु घाटी सभ्यता का हिस्सा हैं और मोहनजोदड़ो की खुदाई ने हमारे इतिहास के कई अनछुए पहलुओं को उजागर किया है। इस अध्याय में उनकी भव्यता, नगर नियोजन की विशेषताएँ, सांस्कृतिक संपदा और आर्किटेक्चर की अद्वितीयता का उल्लेख किया गया है। मोहनजोदड़ो का विस्तार, जनसंख्या, और उसकी रक्षा के लिए बनाई गई धरती की ऊँचाई की तरकीब भी चर्चा का विषय है। अध्याय यह दिखाता है कि कैसे ये प्राचीन स्थल आज भी जीवित हैं और पर्यटकों को अपने अतीत के प्रभाव में डुबो देते हैं।
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अतीत में दबे पाँव - Vitan | Class 12 Hindi Chapter

अतीत में दबे पाँव अध्याय में मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की ऐतिहासिकता, संस्कृति और नगर नियोजन की विशेषताएँ प्रस्तुत की गई हैं। इसे पढ़कर छात्र प्राचीन भारत की उन्नत सभ्यता को समझ सकेंगे।

मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता का प्रमुख शहर है, जो विश्व का एक प्राचीन नियोजित शहर माना जाता है। इसकी खुदाई से हमें इसकी संस्कृति, वास्तुकला और संगठित जीवनशैली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
हड़प्पा संस्कृति की पहचान उसके शहरों के नियोजन, भवन निर्माण तकनीक, और सामाजिक संरचना के आधार पर की जाती है। यहाँ मिले अवशेष, जैसे आकृतियाँ, भाँडे, और अन्य कलाकृतियाँ, इसकी समृद्धि का संकेत देती हैं।
मोहनजोदड़ो की खुदाई 1922 में प्रमुख रूप से राखालदास बनर्जी द्वारा शुरू की गई थी। इस खुदाई में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष मिले, जो सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में ज्ञान प्रदान करते हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता का मुख्य केंद्र मोहनजोदड़ो और हड़प्पा था। ये दोनों शहर अपने समय के प्रमुख केंद्र माने जाते थे, जहाँ व्यापार, प्रशासन, और संस्कृति का अद्वितीय संगम था।
मोहनजोदड़ो लगभग 200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ था और इसकी जनसंख्या लगभग 85,000 अनुमानित की गई है, जिससे इसे प्राचीन समय का एक बड़ा शहर माना जाता है।
मोहनजोदड़ो की सड़कों का प्रबंधन विशेष रूप से उत्कृष्ट है; अधिकांश सड़कें सीधी और आड़ी रूप में हैं, जो आज के 'ग्रिड प्लान' का प्राचीन उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
मोहनजोदड़ो में खंडहर, इमारतें, मूर्तियाँ, चित्रित भाँडे, मुहरें और अन्य घर के सामान जैसे कई अवशेष मिले हैं, जो यहाँ की संस्कृति और आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं।
हां, मोहनजोदड़ो के सबसे ऊँचे चबूतरे पर एक बड़ा बौद्ध स्तूप भी है, जो बाद में नगर बिखरने के बाद का बना हुआ है।
हड़प्पा सभ्यता की अन्य पहचानें इसमें मिले कच्चे और पक्के ईंटों के निर्माण, जल प्रबंधन, और व्यापारिक धातुओं के उपयोग के माध्यम से होती हैं।
मोहनजोदड़ो के टीलों का उपयोग इसीलिए किया गया ताकि सिंधु नदी के बाढ़ से बचा जा सके। इन टीलों पर शहर को बसाकर सुनिश्चित किया गया कि पानी अतिरिक्त प्रभाव न डाले।
मोहनजोदड़ो की संस्कृति और समाज की संरचना अत्यंत संगठित और उन्नत थी। यहाँ के निवासियों ने कृषि, औद्योगिक गतिविधियों, और व्यापार में दक्षता दिखाई।
मोहनजोदड़ो में व्यापार वस्त्र, आभूषण, और कृषि उत्पादों का होता था। यहाँ के लोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी संलिप्त थे।
हाँ, मोहनजोदड़ो में ज्ञानशाला जैसी जगहों का प्रमाण मिलता है, जहाँ पर ज्ञान का आदान-प्रदान होता था।
आधुनिक शोध बताते हैं कि मोहनजोदड़ो के पुरातात्विक अवशेष विश्व के अन्य प्राचीन सभ्यताओं के साथ भारतीय सभ्यता का महत्वपूर्ण संबंध दर्शाते हैं।
मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता का प्रतीक है और प्राचीन भारतीय संस्कृति की समृद्धि और उत्कर्ष को दर्शाता है।
मोहनजोदड़ो के नागरिकों का जीवन स्तर उच्च कहा जा सकता है, क्योंकि वहाँ की खुदाई में मिले सामान से उनकी उन्नत समाजिक स्थिति का पता चलता है।
मोहनजोदड़ो में प्रशासनिक इमारतें, सभा भवन, और अद्वितीय महाकुंड जैसी इमारतें पाई गई हैं, जो इसकी सुंदरता को दर्शाती हैं।
मोहनजोदड़ो की जल निकासी प्रणाली बहुत व्यवस्थित थी; यहाँ सीवेज और जल निकासी के लिए बनाई गई नालियाँ मिली हैं, जो प्राचीन तकनीक को दर्शाती हैं।
हां, मोहनजोदड़ो के अवशेष और हड़प्पा को UNESCO द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
मोहनजोदड़ो के अवशेषों का अध्ययन हमारी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति, और मानव विकास की कहानी समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हाँ, मोहनजोदड़ो का कई अवशेष रेलवे विकास के कारण नष्ट हुए हैं, जिससे इसकी प्राचीनता और अध्ययन में बाधा उत्पन्न हुई।
मोहनजोदड़ो की सड़कों का नियोजन आज की सड़कों से मिलता-जुलता है, जो ग्रिड प्लान के सिद्धांत को दर्शाता है, जहाँ सड़कें सीधी और व्यवस्थित हैं।
मोहनजोदड़ो में मिले मिट्टी के बर्तन विविध रंगों में चित्रित होते हैं, जो उस काल की कला और शिल्प कौशल को दर्शाते हैं।

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अतीत में दबे पाँव Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

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