तबला एवं पखावज वाद्य की उत्पत्ति तथा विकास
NCERT Class 12 Sangeet Chapter 5: तबला एवं पखावज वाद्य की उत्पत्ति तथा विकास (Pages 58–71)
तबला एवं पखावज वाद्य की उत्पत्ति तथा विकास key concepts
- तबला एक महत्वपूर्ण उत्तरी भारतीय संगीत वाद्य है, जिसके बिना भारतीय संगीत की कल्पना स्पष्ट नहीं हो सकती। इस अध्याय में तबला वाद्य की उत्पत्ति और विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है, जिसमें इतिहास, संगीत की उपयोगिता, और दोनों वाद्यों के संबंध को समाहित किया गया है। विद्वानों ने इसे पखावज वाद्य के विकास से जोड़ा है, जबकि कुछ इसे मुस्लिम संस्कृति से संबंधित मानते हैं। अलाउद्दीन खिलजी के दरबार में अमीर खुसरो जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों को तबला वाद्य का प्रवर्तक माना गया है, लेकिन उनके लिखित ग्रंथों में इसका उल्लेख नहीं है। यह वाद्य कई अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों में भी प्रकट होता है, जैसे कि रामायण में मृदंग का उल्लेख। इस अध्याय के माध्यम से ज्ञान की व्यापकता और वाद्यों के विविध रूपों का भी अवलोकन किया जा सकता है।
Important topics in तबला एवं पखावज वाद्य की उत्पत्ति तथा विकास
- 1.इस अध्याय में तबला एवं पखावज वाद्य के इतिहास, उनकी उत्पत्ति और विकास की चर्चा की गई है। इस विषय पर महत्वपूर्ण विद्वानों के विचारों का सारांश प्रस्तुत किया गया है। तबला एक महत्वपूर्ण उत्तरी भारतीय संगीत वाद्य है, जिसके बिना भारतीय संगीत की कल्पना स्पष्ट नहीं हो सकती। इस अध्याय में तबला वाद्य की उत्पत्ति और विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है, जिसमें इतिहास, संगीत की उपयोगिता, और दोनों वाद्यों के संबंध को समाहित किया गया है। विद्वानों ने इसे पखावज वाद्य के विकास से जोड़ा है, जबकि कुछ इसे मुस्लिम संस्कृति से संबंधित मानते हैं। अलाउद्दीन खिलजी के दरबार में अमीर खुसरो जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों को तबला वाद्य का प्रवर्तक माना गया है, लेकिन उनके लिखित ग्रंथों में इसका उल्लेख नहीं है। यह वाद्य कई अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों में भी प्रकट होता है, जैसे कि रामायण में मृदंग का उल्लेख। इस अध्याय के माध्यम से ज्ञान की व्यापकता और वाद्यों के विविध रूपों का भी अवलोकन किया जा सकता है।
