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दो गौरैय

कक्षा 8 का यह अध्याय 'दो गौरैया' हमारे घर में गौरैयों की उपस्थिति और उनके साथ होने वाले मजेदार घटनाक्रम को दर्शाता है। यह हमें जीव-जंतुओं से प्रेम और सहिष्णुता का पाठ पढ़ाता है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 8
Hindi
Malhar

दो गौरैय

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More about chapter "दो गौरैय"

अध्याय 'दो गौरैया' में मुख्य पात्र एक घर में रहते हैं, जहां उनकी बातचीत और चिंताओं का केंद्र गौरैयों की अनियंत्रित प्रविष्टि है। क्‍िताजी और मेाँ, दोनों ही अपने-अपने परिप्रेक्ष्य में गौरैयों का मजाक उड़ा रहे हैं, जिससे घर में उल्लास और हास्य का माहौल बनता है। क्‍िताजी गौरैयों को घर से बाहर निकालने का प्रयास करते हैं, लेकिन वे बार-बार घर में वापस आ जाती हैं। पूरे प्रसंग में घर के भीतर और बाहर के जीव-जंतुओं की विशेषता और उनके व्यवहार का सार्थक चित्रण है। यह पाठ बच्चों को प्रकृति से जुड़ने और जीव-जंतुओं के प्रति सहानुभूति विकसित करने की प्रेरणा देता है।
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कक्षा 8 हिंदी अध्याय: दो गौरैया | Edzy

कक्षा 8 के हिंदी पाठ 'दो गौरैया' में चिड़ियों के साथ जुड़ी मजेदार घटनाओं का वर्णन है। यह पाठ जीव-जंतुओं से स्नेह एवं सहिष्णुता का संदेश देता है।

क्‍िताजी गौरैयों से परेशान हैं क्योंकि वे बार-बार घर में घुस आती हैं और उनकी उपस्थिति से घर में अराजकता फैल रही है। उनके अनुसार, यह घर अब मेहमानों का घर बन गया है।
गौरैयों का घर में प्रवेश से यह संकेत मिलता है कि उन्होंने घर को अपने लिए उपयुक्त समझा है। वे निरीक्षण करने आई थीं कि क्या यह उनके रहने लायक है।
गौरैयों ने घर में अपना घोंसला बना लिया है और वे सामान लाकर उसे सजाने लगी हैं। इससे साबित होता है कि उन्हें घर पसंद आया है।
क्‍िताजी गौरैयों को बाहर करने के लिए ताली बजाकर, 'श...शू' करके और सठ का प्रयोग करते हैं। उनका उद्देश्य यह है कि गौरैयां घर छोड़ दें।
जब क्‍िताजी गौरैयों को बाहर निकालने का प्रयास करते हैं, तो मेाँ उस पर मजाक करते हैं और उनकी उबासी का मज़ाक उड़ा देते हैं। यह चर्चा घर के माहौल को हलका-फुल्का बनाती है।
हां, गौरैयां अंततः घर के बैठक की छत में घोंसला बना लेती हैं, जो दर्शाता है कि उन्होंने घर को अपने लिए उपयुक्त मान लिया है।
क्‍िताजी और मेाँ का रिश्ता आपस में हलका-फुल्का और मजेदार है। वे एक-दूसरे के मजाक उड़ाते हैं, जिससे घर का माहौल जीवंत बना रहता है।
क्‍िताजी को पहले गौरैयों के प्रति गुस्सा था, क्योंकि वे उनके घर में बार-बार प्रवेश कर रही थीं, जिससे उन्हें शांति में खलल महसूस होता था।
मेाँ और क्‍िताजी का रवैया गौरैयों के प्रति मजाकिया था। वे गौरैयों के नृत्य और उनके व्यवहार पर हंसते हैं, जिससे पाठ में हास्य का तत्व जुड़ता है।
घर में चूहों, कबूतरों, चमगादड़ों, मकड़ियाँ और चींटियाँ भी हैं, जो घर के वातावरण का महत्वपूर्ण भाग हैं।
गौरैयाँ आम के पेड़ पर विश्राम करती हैं, जिसे क्‍िताजी घर के बाहर का एक प्रमुख हिस्सा मानते हैं।
जब क्‍िताजी दरवाजे बंद करने की कोशिश करते हैं, तो गौरैयां दरवाजे के नीचे से गुज़र कर घर में लौट आती हैं, demonstrating their persistence.
अध्याय में हास्य क्‍िताजी और मेाँ के बातचीत से उत्पन्न होता है, जब वे गौरैयों के प्रति अपने विचारों और क्रियाओं के मजेदार परिणामों पर चर्चा करते हैं।
गौरैयां अपने घोंसले के लिए घास, कपड़े और अन्य सामान लाकर उसे सजाती हैं, जिससे उनका घोंसला तैयार होता है।
गौरैया कई बार उड़ कर बाहर जाती हैं और पुनः वापस आती हैं, जैसे वे अपने नए घर का सर्वेक्षण कर रही हों।
क्‍िताजी को गौरैयों की उपस्थिति से समस्या यह थी कि उनका घर अब एक सराय बन गया है, जिससे उन्हें असुविधा हो रही थी।
अध्याय का मुख्य संदेश है कि व्यक्ति को जीव-जंतुओं के प्रति सहिष्णुता और प्रेम रखनी चाहिए, और हमें उनकी उपस्थिति से सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
घर में चूहें रातभर भागते-फिरते हैं और उनकी चहल-पहल से अन्य निवासियों को सोने में परेशानी होती है।
अध्याय में विभिन्न किस्म के पक्षियों और जीवों की उपस्थिति का चित्रण किया गया है, जो हमें प्रकृति के प्रति जागरूक करता है।
क्‍िताजी का यह मानना है कि घर मेहमानों का है क्योंकि पक्षियों की संख्या इतनी अधिक है कि वे अब उन्हें घर का सदस्य नहीं समझते।
नहीं, जब मेाँ मजाक करते हैं, तो क्‍िताजी को वह पसंद नहीं आता और वे गुस्सा हो जाते हैं।
गौरैया पहले कई बार घर में लौटती हैं और जब वे अंडे देने लगती हैं, तब यह दर्शाता है कि वे घर नहीं छोड़ने वाली हैं।
हां, क्‍िताजी की मेहनत में अवरोध आते हैं क्योंकि गौरैया बार-बार वापस लौट आती हैं, चाहे वह कितना भी प्रयास करें।

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