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सपनों के से दिन गुरदयाल सिंह

गुरदयाल सिंह द्वारा लिखित 'सपनों के से दिन' अध्याय में बचपन की यादें, मित्रता और शिक्षक की भूमिका के अनुभवों को प्रस्तुत किया गया है। यह अध्याय छात्रों को उनके स्कूल जीवन की खुशियों और चुनौतियों को महसूस कराता है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 10
Hindi
Sanchayan - II

सपनों के से दिन गुरदयाल सिंह

Author: गुरदयाल सिंह

Chapter Summary

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More about chapter "सपनों के से दिन गुरदयाल सिंह"

गुरदयाल सिंह का 'सपनों के से दिन' अध्याय, उनके बचपन के अनुभवों और स्कूल के वातावरण को चित्रित करता है। बचपन की मासूमियत में दोस्ती, नई कक्षा की चुनौतियाँ और शिक्षकों की भूमिका का स्पष्ट प्रतिबिंब देखने को मिलता है। लेखक राजस्थान और हरियाणा के बच्चों की दोस्ती और उनकी बोली की हंसी का उल्लेख करते हैं। नए मास्टरों और स्कूल की सख्ती से डर के बावजूद, बचपन की खुशियों और छुट्टियों के समय की यादों में वे खुद को बहुत महत्वपूर्ण समझते थे। अध्याय में पीटी मास्टर की सख्ती और हेडमास्टर शर्मा जी की समझदारी का भी उल्लेख है, जो अध्ययन के अनुभवों को और भी रोचक बनाता है। इस संदर्भ में, छात्रों के बचपन की जिज्ञासा और संघर्षों को आसानी से समझा जा सकता है।
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सपनों के से दिन - गुरदयाल सिंह | कक्षा 10 हिंदी अध्याय

गुरदयाल सिंह का अध्याय 'सपनों के से दिन' कक्षा 10 के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें दोस्ती, स्कूल के अनुभव और प्रतियोगिता के साथ-साथ बचपन की मासूमियत का अनुभव मिलता है।

गुरदयाल सिंह अपने बचपन की यादों को हरी घास और मनमोहक फूलों की सुगंध से जोड़ते हैं। स्कूल जाते समय के वातावरण और खूबसूरत पेड़ों की महक इस याद को खास बनाती है। दोस्ती और खेल के दिन उनके लिए हमेशा यादगार रहे हैं।
नई कक्षा में जाने पर लेखक को एक ओर बड़े होने का उत्साह होता था, वहीं दूसरी ओर नए मास्टरों और पढ़ाई का डर भी लगता था। यह द्वंद्व उनके मन में एक नई मानसिकता и अनजाने डर का निर्माण करता था।
स्कूल का वातावरण बहुत छोटा और साधारण था, जिसमें केवल कुछ कमरे होते थे। प्रार्थना के समय सभी छात्र लाइन में खड़े होते थे, जिससे सबकी अनुशासनप्रियता का पता चलता था। सख्त पीटी मास्टर ने भय का अनुभव कराया।
पीटी मास्टर प्रेमचंद एक सख्त व्यक्ति थे, जो छोटी-सी गलती पर छात्रों को डाँटते या सजा देते थे। उनके सख्त व्यवहार के कारण बच्चे उनसे डरते थे, लेकिन यह भी स्पष्ट होता है कि उनके तरीके से छात्रों में अनुशासन सीखा जाता था।
हेडमास्टर शर्मा जी ने सख्ती से कम और समझा कर शिक्षा देने को प्राथमिकता दी। उनकी हल्की डाँट भी छात्रों को अच्छी लगती थी, जिससे उन्हें अपने शिक्षण में एक सकारात्मक अनुभव महसूस होता था।
स्काउट परेड के दौरान बच्चे खुद को बहुत महत्वपूर्ण महसूस करते थे। यह उनके आत्म-सम्मान और जिम्मेदारी का अनुभव कराने का एक माध्यम था, जो उन्हें विशेष और अद्वितीय महसूस कराता था।
जब छुट्टियाँ खत्म होने लगती थीं, तो लेखक को दिए गए कार्य के बारे में याद आती थी। कई साथी इसे करने की बजाय मार खाना बेहतर समझते थे, जबकि लेखक छुट्टियों में खेलकर भी पढ़ाई पूरी करने की कोशिश करता था।
लेखक यह मानते हैं कि कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती। खेलते समय भले ही बोली भिन्न होती थी, लेकिन उस समय वे एक-दूसरे की भावनाएँ और अभिव्यक्तियों को समझने में सफल रहते थे।
स्कूली छुट्टियाँ बच्चों के लिए आनंद का समय होता था। इसे खेलते, तालाब में नहाते और नानी के घर जाते समय उनके लिए व्यक्तिगत आज़ादी का अनुभव मिलता था, जिससे वे खुशियों में खो जाते थे।
लेखक बताते हैं कि जब वे छोटे थे, तब अपने साथी की क्षेत्रीय बोली को समझने में कठिनाई होती थी। कुछ शब्द सुनकर वे हंसते थे, लेकिन खेलते समय सब एक-दूसरे की बातों को अच्छे से समझ लेते थे।
दूसरे विश्वयुद्ध के समय में सैनिक बनने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाता था, जिससे बच्चों में राष्ट्र की सेवा का भावना उत्पन्न होती थी। लेखक भी कभी-कभी ऐसा महसूस करते थे कि वे भी सैनिकों जैसे हैं, जो सुरक्षित और उपलब्धि के लिए प्रेरित होता था।
ओमा का किरदार स्कूल में सबसे अलग था। उसकी शक्ल और लड़ाई करने का तरीका उसे दूसरों से भिन्न बनाता था। उसके व्यवहार से सभी डरते थे, जिससे स्कूल में उसकी एक विशेष पहचान बन गई थी।
अध्याय में बचपन की खुशियों का उल्लेख उनके खेलने के दिन, दोस्तों के साथ बिताए पल और स्कूल की क्यारियों में खिलते फूलों से जुड़ी यादों के माध्यम से होता है। यह उन्हें आनंद और सुकून का अनुभव कराता है।
नई कक्षा में जाने का उत्साह एक बच्चों के लिए नए अवसर और जिम्मेदारियों के साथ जुड़ा होता है। लेखक इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में दर्शाते हैं, जो उन्हें बड़े होने का अहसास कराता है।
पढ़ाई का डर छुट्टियों के बाद लौटने पर महसूस होता था। मास्टरों द्वारा दिए गए काम के याद आने से और सहपाठियों के व्यवहार से डर का अनुभव होता था, जिससे कई बच्चे इसे टालने की कोशिश करते थे।
लेखक ने कहा है कि मित्रता का संबंध भाषा से अधक नहीं होता। खेल के समय विभिन्न भाषाएँ होने पर भी, मित्रों के बीच आपसी समझ और भावनाएँ हमेशा बरकरार रहती हैं, जिससे मित्रता की भावना प्रबल होती है।
छुट्टियों में बच्चों को खेलने, घूमने और परिवार के साथ समय बिताने की स्वतंत्रता मिलती थी। यह समय उनके लिए सुकून और आनंद का स्रोत बन जाता था, जिससे वे अपनी पढ़ाई की चिंताओं को भुला पाते थे।
पीटी मास्टर को बच्चों को बिना वजह की सजा देने के कारण निलंबित किया गया था। यह हेडमास्टर शर्मा जी की सख्ती का परिणाम था, जिससे स्कूल में अनुशासन बना रहे।
लेखक ने बचपन में फूलों की खुशबू को विशेष रूप से याद किया है, जो उनकी मासूमियत और प्रकृति के प्रति उनके प्यार को दर्शाता है। यह समय उन्हें आनंद और शांति प्रदान करता था।
स्कूल में अच्छे और बुरे अनुभव दोनों ने मिलकर बच्चों को जीवन में महत्वपूर्ण समझ और सिखने के अवसर दिए। यह अनुभव उन्हें वयस्कता के लिए तैयार करते हैं, जिसमें दोस्ती और अनुशासन का महत्व होता है।
शिक्षकों की भूमिका को लेकर लेखक ने बताया कि वे शिक्षा में महत्वपूर्ण होते हैं। सख्त शिक्षक जैसे पीटी मास्टर समाज में अनुशासन बनाते हैं, जबकि समझदार शिक्षकों जैसे हेडमास्टर प्रेरणादायक होते हैं।
बचपन की मासूमियत का चित्रण स्कूल में खेलकूद, दोस्तों के साथ समय बिताने और छोटे-छोटे आनंददायी क्षणों के माध्यम से किया गया है। यह समय बच्चों के जीवन को सरल और खुशहाल बनाता है।
लेखक को स्कूल कभी-कभी अच्छा लगता था, जैसे स्काउट परेड के समय। इस समय वे महत्व को महसूस करते थे और एक विशेष पहचान के साथ खुद को प्रस्तुत करते थे।
विद्यालय का माहौल विद्यार्थियों की सोच और विकास पर गहरा प्रभाव डालता है। शिक्षकों की सख्ती और प्यार, दोनों ही छात्रों के मानसिकता और बचपन के अनुभवों को आकार देते हैं।

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सपनों के से दिन गुरदयाल सिंह Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

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