यह अध्याय तबला और पखावज वाद्यों की बनावट और उनके वादन की तकनीकों के बारे में बताता है। ये वाद्य भारतीय संगीत में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
कै से दिखते हैं तबला एवंपखावज वाद्य? - Quick Look Revision Guide
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Key Points
तबला क्या है?
तबला उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रमुख अवनद्ध वाद्य है, जिसका प्रयोग लय मापन के लिए होता है।
तबला के अंग?
तबला के मुख्य रूप से दो अंग होते हैं: दायाँ (पुरा) और बायाँ (डग्गा) जिसे दाहिने और बाएँ हाथ से बजाया जाता है।
तबला की सामग्री?
तबला लकड़ी से बनाया जाता है, जिसमें आम, शीशम या नीम की लकड़ी प्रमुख रूप से उपयोग होती है।
तबला का शरीर?
तबले का शरीर तीन खोखले और एक ठोस तह से बना होता है, जिससे ध्वनि की गुणवत्ता बेहतर होती है।
डग्गा की सामग्री?
डग्गा पीतल, तांबा या तमट्टी से बना होता है, किन्तु तमट्टी का डग्गा सबसे बेहतर ध्वनि देता है।
तबले की पूड़ी?
तबले की पूड़ी बकरा की खाल से बनाई जाती है, जिसमें तीन प्रमुख भाग होते हैं: तकनीक (चाँटी), लव और स्याही।
चाँटी क्या है?
चाँटी पेड़ की एक पतली पट्टी होती है, जिस पर दायें तबले में वण्य बजाए जाते हैं।
लव का महत्व?
लव को मैदान कहते हैं, जहां 'ता' और 'ततं' वण्य बजाए जाते हैं, इसकी स्थिति ध्वनि को निर्धारित करती है।
स्याही का रोल?
स्याही, जो लोहे की चूर्ण से तैयार की जाती है, तबले की ध्वनि को प्रबल बनाती है।
गजरा की भूमिका?
गजरा, चमड़े की पतली डोरियों का गुंथन है, जो तबले की पूड़ी को कसकर रखता है।
गट्टा क्या है?
गट्टा लकड़ी के टुकड़ों से बना बेलनाकार एक उपकरण है, जो ध्वनि को नियंत्रित करने में सहायक होता है।
बद्धी का कार्य?
बद्धी, चमड़े की डोरी है, जो गजरे के द्वारा लगाए गए तंतु को दबाने में मदद करती है।
पखावज का परिचय?
पखावज एक प्रमुख अवनद्ध वाद्य है, जिसका उपयोग धूपद और धमार गायकी में होता है।
पखावज की सामग्री?
पखावज को आम, बीजासार या शीशम की लकड़ी से बनाया जाता है, इसकी लंबाई लगभग 75-80 सेंटीमीटर होती है।
पखावज के मुख?
पखावज में दायां और बायां मुख होता है, जिनका व्यास लगभग 16-25 सेंटीमीटर होता है।
पखावज का स्वर?
पखावज के दायें मुख पर स्याही और बायें पर गीला आटा लगता है, जिससे स्वर की गहराई बढ़ती है।
पखावज में घर?
पखावज में 16 घर होते हैं, जो स्वर को आरोहण और अवरोहण में मदद करते हैं।
महत्वपूर्ण तालयां?
पखावज में चौताल, धमार, सूलताल, और तीव्ा तालयों का उपयोग किया जाता है, जो इसकी विविधता को दर्शाते हैं।
तबला और पखावज का प्रयोग?
तबला व पखावज का उपयोग गायन, वादन, और नृत्य कार्यक्रमों में प्रमुखता से होता है।
तबला व पखावज का प्रभाव?
तबला और पखावज की ध्वनियाँ शास्त्रीय संगीत के अनुभव को और भी समृद्ध बनाती हैं।
यह अध्याय भारतीय संगीत की मूलभूत जानकारी को प्रस्तुत करता है, जिसमें इसके विभिन्न श्रेत्रों और शैलियों का वर्णन किया गया है। यह छात्रों के लिए भारतीय संस्कृति में संगीत के महत्व को समझने में सहायक है।
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