Edzy
AI TutorResourcesToolsCompareBuy
SearchDownload AppLogin
Edzy

Edzy for Classes 6-12

Edzy is a personal AI tutor for CBSE and State Board students, with curriculum-aligned guidance, practice, revision, and study plans that adapt to each learner.

  • Email: always@edzy.ai
  • Phone: +91 96256 68472
  • WhatsApp: +91 96256 68472
  • Address: Sector 63, Gurgaon, Haryana

Follow Edzy

Browse by Class

  • CBSE Class 6
  • CBSE Class 7
  • CBSE Class 8
  • CBSE Class 9
  • CBSE Class 10
  • CBSE Class 11
  • CBSE Class 12
Explore the CBSE resource hub

Explore Edzy

  • Study Resources
  • Free Study Tools
  • Best Apps for Board Exams
  • Edzy vs ChatGPT
  • About Us
  • Why We Built Edzy
  • Blog
  • CBSE AI Tutor

Support & Legal

  • Help & FAQs
  • Accessibility
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Cookie Policy
  • Site Directory

© 2026 Edzy. All rights reserved.

Curriculum-aligned learning paths for students in Classes 6-12.

Chapter Hub

Bhaarateey sangeet ka itihaas

इस अध्याय में 'Bhaarateey sangeet ka itihaas' शीर्षक के अंतर्गत भारतीय संगीत के अवनद्ध वाद्यों का सक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया गया है, जिसमें प्रमुख वाद्यों की महत्ता और उनके उपयोग की जानकारी है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 12
Sangeet
Hindustani Sangeet Gayan Evam Vadan

Bhaarateey sangeet ka itihaas

Download NCERT Chapter PDF for Bhaarateey sangeet ka itihaas – Latest Edition

Access Free NCERT PDFs & Study Material on Edzy – Official, Anytime, Anywhere

Live Challenge Mode

Ready to Duel?

Challenge friends on the same chapter, answer fast, and sharpen your concepts in a focused 1v1 battle.

NCERT-aligned questions
Perfect for friends and classmates

Why start now

Quick, competitive practice with instant momentum and zero setup.

More about chapter "Bhaarateey sangeet ka itihaas"

इस अध्याय में 'Bhaarateey sangeet ka itihaas' शीर्षक के अंतर्गत भारतीय संगीत के अवनद्ध वाद्यों का समुचित वर्णन समाहित है। इसमें प्रमुख वाद्य जैसे 'पणव', 'ददुर', 'पटह', 'मृदंगम्', 'तकाशका', 'नक्‍कारका', 'पुंग', और 'ढोल्‍ढोक' का उल्लेख किया गया है। प्रत्येक वाद्य की परिभाषा, निर्माण सामग्री, आकार-प्रकार और उपयोग की जानकारी के साथ उसके सांस्कृतिक महत्व को विस्तृत रूप से दर्शाया गया है। नाट्यशास्त्र, संगीत रत्नाकर, और अन्य ग्रंथों में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। सभी वाद्यों का संगीत में योगदान और विभिन्न समारोहों में उनकी भूमिका संगीत अभिव्यक्ति का एक अभिन्न हिस्सा रही है।
Learn Better On The App
A clearer daily roadmap

Your Study Plan, Ready

Start every day with a clear learning path tailored to what matters next.

Daily plan
Less decision fatigue

Faster access to practice, revision, and daily study flow.

Edzy mobile app preview

Bhaarateey Sangeet Ka Itihaas - Class 12 Chapter Overview

Explore the rich history of Indian classical music and its unique instruments in Class 12's Bhaarateey Sangeet ka Itihaas chapter. Learn about famous instruments like Mrdangam, Dhadur, and more.

पणव एक प्राचीन अवनद्ध वाद्य है, जिसका उल्लेख प्राचीन साहित्य जैसे जातक और नाट्यशास्त्र में किया गया है। यह मुख्यतः धार्मिक और सांस्कृतिक समारोहों में उपयोग किया जाता है। इसका आकार तविमुखी होता है और इसे चमड़े से बनाया जाता है।
ददुर एक महत्वपूर्ण अवनद्ध वाद्य है, जिसे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित किया गया है। इसकी ध्वनि विशेष रूप से नाट्यशास्त्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है। ददुर का आकार घटाकार होता है और इसे नियमित रूप से संगीत समारोहों में उपयोग किया जाता है।
पटह वाद्य का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों जैसे रामायण और महाभारत में किया गया है। यह एक प्रमुख अवनद्ध वाद्य है, जिसे विभिन्न उत्सवों और नृत्यों में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी बनावट और स्वरूप वाद्य के उपयोग में सहायक होते हैं।
मृदंगम् एक प्रमुख भारतीय वाद्य है, जिसे अक्सर शास्त्रीय संगीत में उपयोग किया जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह ताल और रिद्म को साधने में मदद करता है। इसके निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले चमड़े का उपयोग किया जाता है जो इसकी ध्वनि को समृद्ध बनाता है।
तकाशका एक उध्व्यन्तमख वाद्य है, जिसका निर्माण मुख्यतः चमड़े से किया जाता है। इसका आकार चपटला होता है और इसे नृत्य प्रस्तुतियों में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी ध्वनि शक्ति इसे प्रमुख स्थान पर रखती है।
नक्‍कारका एक प्राचीन वाद्य है, जिसे विशेष उपलब्धियों या समारोहों में बजाया जाता है। इसे धातु से बनाया जाता है और इसकी सुरीली ध्वनि इसे अन्य वाद्यों से अलग बनाती है।
पुंग एक प्रमुख अवनद्ध वाद्य है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से लोक संगीत और खास उत्सवों में किया जाता है। इसके अद्वितीय स्वर वर्धमान उत्सवों में खुशी का वातावरण बनाते हैं।
ढोल्‍ढोक एक महत्वपूर्ण वाद्य है, जिसका उपयोग उत्तर भारतीय संगीत में प्रमुखता से किया जाता है। इसकी ध्वनि को ऊर्जा और उत्साह भरने के लिए जाना जाता है, विशेषकर त्योहारों और समारोहों में।
भारतीय संगीत में वाद्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये वाद्य न केवल संगीत को सजाने का कार्य करते हैं, बल्कि ये विभिन्न सांस्कृतिक समारोहों में उत्साह और आनंद का संचार भी करते हैं।
संगीत रत्नाकर में इन वाद्यों का विस्तृत वर्णन किया गया है, जिसमें इनकी निर्माण प्रक्रिया, उपयोग, और विभिन्न प्रकार की ध्वनि का विवरण शामिल है। यह ग्रंथ इन वाद्यों की महत्ता को समझने में सहायक है।
अवनद्ध वाद्यों का उल्लेख कई प्राचीन भारतीय ग्रंथों में किया गया है, जैसे नाट्यशास्त्र, संगीत रत्नाकर, और जातक साहित्‍य। ये ग्रंथ इन वाद्यों के सांस्कृतिक संदर्भ को जानने में मदद करते हैं।
आधुनिक समय में इन वाद्यों का उपयोग न केवल शास्त्रीय संगीत में, बल्कि विभिन्न संगीत शैलियों और नृत्यों में भी किया जाता है। ये वाद्य कला में नए प्रयोगों को बढ़ावा देकर उसकी अनवरत जीवंतता को दर्शाते हैं।
मथुरा में वाद्यों का विशेष उपयोग धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों में होता है। यहाँ पारंपरिक संगीत में इन वाद्यों की ध्वनि श्रीकृष्ण की भक्ति में एक विशेष स्थान रखती है।
भारतीय कला रूपों में इन वाद्यों का महत्त्व नाट्य प्रस्तुति, नृत्य और संगीत में बहुत अधिक है। ये वाद्य कला को व्यापक रूप से दर्शाते हैं और कला की अभिव्यक्ति को और भी समृद्ध बनाते हैं।
नहीं, अवनद्ध वाद्यों का उल्लेख केवल धार्मिक ग्रंथों में नहीं, बल्कि नाट्यशास्त्र, साहित्य, और संगीत के विभिन्न अभिलेकों में भी किया गया है, जिससे इनकी सांस्कृतिक महत्ता सामने आती है।
अवनद्ध वाद्यों का निर्माण पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करके किया जाता है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले सामग्रियों का चुनाव और विभिन्न डिजाइन का उपयोग किया जाता है, ताकि उनकी ध्वनि और सृजनात्मकता को बढ़ाया जा सके।
इन वाद्यों का उपयोग केवल शास्त्रीय संगीत में ही नहीं होता, बल्कि ये लोक संगीत, फिल्म संगीत और विभिन्न प्रदर्शन कला में भी उपयोग किए जाते हैं, जो उन्हें बहुआयामी बनाते हैं।
इन वाद्यों के लिए उपयोग की जाने वाली प्रमुख सामग्री में लकड़ी, चमड़ा और धातु शामिल हैं, जो ध्वनि गुणवत्ता और वाद्य के सौंदर्य को सुनिश्चित करती हैं।
हाँ, अवनद्ध वाद्यों का संरक्षण करना आवश्यक है, क्योंकि वे हमारी सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हैं। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और संगीतकारों द्वारा इनका संरक्षण किया जाता है।
जी हाँ, विभिन्न वाद्य संगीत की रचना, उसकी धुन और उसके प्रदर्शन में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक वाद्य का अपना अनूठा प्रभाव होता है, जो संगीत की गहराई को बढ़ाता है।
हां, त्यौहारों में इन वाद्यों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इनका उपयोग आयोजनों को जीवंत और रंगीन बनाने के लिए किया जाता है।
भारतीय संगीत की पहचान उसकी विविधता, सांस्कृतिक धरोहर और वाद्यों के प्रति अद्वितीय सामंजस्य से होती है। इस संगीत में अवनद्ध वाद्यों की ध्वनि एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

Chapters related to "Bhaarateey sangeet ka itihaas"

Hamaare praacheen granth

यह अध्याय मध्‍यकालीन अवनद्ध वाद्यों का सम्‍पूर्ण परिचय प्रस्‍तुत करता है। यह वाद्य संगीत की समृद्ध परंपरा का प्रतीक हैं।

Start chapter

Hindustani sageet ke paaribhaashik shabd

इस अध्याय में हिन्दुस्तानी संगीत के पारिभाषिक शब्दों का विस्तृत अध्ययन किया गया है, जो संगीत की बुनियाद हैं। ये शब्द विद्यार्थी को संगीत सृजन और प्रस्तुति में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।

Start chapter

Praacheen evan aadhaniu ka gaayan shailiyaan

यह अध्याय प्राचीन और आधुनिक गायन शैलियों की विविधता को दर्शाता है। इसमें शास्त्रीय संगीत की जटिलताएँ और रागों की जातियाँ समझाई गई हैं।

Start chapter

Raag vargeekaran

यह अध्याय रागों के गायन का समय और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझाता है। यह शास्त्रीय संगीत में समय की अनुकूलता के महत्व पर जोर देता है।

Start chapter

Raag parichay evan bandishe

यह अध्याय रागों और उनकी रचनाओं का परिचय देता है, विशेष रूप से राग बागेश्री पर। यह छात्रों को अभिव्यक्ति और सृजन की क्षमता को विकसित करने में मदद करता है।

Start chapter

Hindustani sangeet mein vaady yantr

यह अध्याय भारतीय संगीत में विभिन्न वाद्यों के बारे में जानकारी प्रदान करता है, जो संगीत की दुनिया में उनकी महत्ता को दर्शाते हैं।

Start chapter

Pramukh taalo ke teke yav layakari

यह अध्याय प्रमुख तालों के ठेके और लयकारी के बारे में जानकारी देता है। ताल संगीत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे पहचानना सीखना आवश्यक है।

Start chapter

Sangeet ke pramukh kalaakaaron ka parichay va yogadaan

इस अध्याय में प्रमुख संगीतकारों का परिचय और उनके योगदान का विवरण किया गया है। यह भारतीय शास्त्रीय संगीत के विकास और समृद्धि में उनकी भूमिका को समझने में मदद करता है।

Start chapter

Bhaarateey sangeet ka itihaas Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

Question Bank

Worksheet

Revision Guide