Hamaare praacheen granth
NCERT Class 12 Sangeet Chapter 2: Hamaare praacheen granth (Pages 25–34)
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Summary of Hamaare praacheen granth
Hamaare praacheen granth at a Glance
CBSE
Class 12
Sangeet
Hindustani Sangeet Gayan Evam Vadan
2
25–34
6 study resources
Hamaare praacheen granth Summary
अध्याय में मध्यकालीन वाद्यों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें प्रमुख रूप से पणव, हुडुक, मृदंगम, और ढोल्क जैसी सांगीतिक वाद्य यंत्रों का परिचय दिया गया है। लेकिन, इन वाद्यों के इतिहास, उनके निर्माण, पद्धति, और उनके गायक एवं नर्तकों के साथ संबंधों पर भी अन्नत चर्चा की गई है। पणव एक प्राचीन अवनद्ध वाद्य है, जिसका उल्लेख प्राचीन साहित्य जैसे जातक, रामायण, और नाट्यशास्त्र आदि में मिलता है। यह दो मुखों वाला वाद्य है और इसके निर्माण में चमड़े का प्रयोग होता है। इसके विशेष तंत्र और ध्वनि की विश्शेषता इसे भारतीय संगीत में एक महत्वपूर्ण अन्न बनाती है। हुडुक, जिसे हडौक भी कहा जाता है, मृदंगम से मिलता-जुलता है, लेकिन इसका आकार और संरचना कुछ भिन्न होती है। इससे निकलने वाली ध्वनि इसका मुख्य आकर्षण है। मृदंगम भी एक प्रमुख वाद्य है, जो लगभग सभी भारतीय शास्त्रीय संगीत शैलियों में प्रयोग किया जाता है। इसकी विविधता और ध्वनि को लेकर चर्चा की गई है, जो इसे अद्वितीय बनाती है। इसके अलावा, ढोल्क का भी विस्तार से वर्णन है, जो आमतौर पर लोक संगीत में प्रयोग होने वाला वाद्य है। इसके आकार और सामर्थ्य के बारे में जानकारी दी गई है, साथ ही इसके उपयोग का संदर्भ भी दिया गया है। भिन्न प्रकार के वाद्यों के ऐतिहासिक एवं सांगीतिक महत्व को जानना एक महत्वपूर्ण पहलू है। बच्चों को इन वाद्यों की विशेषताओं और उनके उपयोग के तरीके के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। ध्वनि, निर्माण, और उपयोग में वाद्यों की भूमिका को युवा संगीतज्ञों के लिए समझाना उनकी संगीत यात्रा में मदद करेगा। यह अध्याय वाद्य संगीत को समझने के लिए एक मजेदार एवं ज्ञानवर्धक अनुभव प्रदान करता है।
