Atya-patya
NCERT Class 7 Physical Education and Well Being Chapter 12: Atya-patya (Pages 38–40)
Summary of Atya-patya
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Atya-patya at a Glance
CBSE
Class 7
Physical Education and Well Being
Khel Yatra
12
38–40
6 study resources
Atya-patya Summary
अट्या-पाट्या एक ऐसी खेल है जो भारत के विभिन्न हिस्सों में खेली जाती है। यह खेल मुख्य रूप से तेज़ी, निर्णय लेने की क्षमता और टीम वर्क पर आधारित है। इस खेल में दो टीमें होती हैं, एक 'रनर्स' और दूसरी 'डिफेंडर्स'। खेल का उद्देश्य यह है कि रनर्स बिना टैग हुए जितनी ज्यादा लकीरों को पार कर सकें। खेल के मैदान में नौ लकीरें होती हैं, और रनर्स एक दिशा से दूसरी दिशा तक जाने की कोशिश करते हैं। डिफेंडर्स अपनी लकीरों के भीतर ही हिल सकते हैं और उनका काम है रनर्स को टैग करना। अगर कोई रनर टैग होता है, तो वह खेल से बाहर हो जाता है और अगला रनर अपनी बारी लेता है। जब सभी रनर्स अपनी बारी पूरी कर लेते हैं, तो टीमें भूमिकाएँ बदलती हैं। खेल चार पारियों में खेला जाता है, जिसमें हर पारी सात मिनट की होती है। जो टीम सबसे अधिक अंक प्राप्त करती है, वही विजेता बनती है। खेल के दौरान सुरक्षित रहने के लिएControlled movements और खेल भावना को बनाए रखना बहुत जरूरी है। इस खेल के कुछ महत्वपूर्ण कौशलों में दिशा बदलना शामिल है, जो न केवल खेल को अधिक मजेदार बनाता है, बल्कि चोटों के जोखिम को भी कम करता है। इस अध्याय में यह भी बताया गया है कि कैसे ये कौशल खिलाड़ी के परफॉर्मेंस को प्रभावित करते हैं। इस खेल की नियमावली और विनियमन खेल को एक उचित प्रतियोगिता बनाते हैं, और यह भी महत्त्वपूर्ण है कि खिलाड़ी व्यवहार और खेल भावना का पालन करें। अट्या-पाट्या खेल सिर्फ एक खेल नहीं है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। इसे खेलकर बच्चे न केवल अपनी शारीरिक फ़िटनेस को बढ़ावा देते हैं, बल्कि रिश्तों में मजबूती और सामूहिकता का भी अनुभव करते हैं। खेल का अनुसंधान और समझना महत्वपूर्ण है कि खेल में भागीदारी कैसे सम्पूर्ण विकास को बढ़ावा देती है।
