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ईशावास्यम्इदं सर्वम्

इस अध्याय में 'ईशावास्यम् इदं सर्वम्' की व्याख्या दी गई है, जिसमें ईश्वर के सर्वव्यापी स्वरूप और उसकी आराधना के महत्व को समझाया गया है। यह अध्याय छात्रों को गहन दार्शनिक विचारों से परिचित कराता है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 7
Sanskrit
Deepakam

ईशावास्यम्इदं सर्वम्

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More about chapter "ईशावास्यम्इदं सर्वम्"

अध्याय 'ईशावास्यम् इदं सर्वम्' में यह बताया गया है कि ईश्वर हर जगह उपस्थित हैं और उनकी दया सभी जीवों पर निर्भर करती है। इस अध्याय में विभिन्न दार्शनिक विचारों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि ईश्वर की विशेषता केवल दया में नहीं है, बल्कि वह हर जीव के साथ हैं। पाठ में प्रह्लाद की कहानी और हिरण्यकश्यप के साथ संवाद के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि ईश्वर की आराधना का महत्व क्या है। छात्रों को यह समझ में आता है कि एकता का भाव कैसे सभी जीवों में उपस्थित है और उन्हें एकजुट करने की आवश्यकता है। इस अध्ययन के माध्यम से विद्या, धर्म, और मानवीय मूल्यों की गहरी समझ विकसित होती है।
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ईशावास्यम् इदं सर्वम् - कक्षा 7 | दीपकम पाठ्यपुस्तक

कक्षा 7 के पाठ 'ईशावास्यम् इदं सर्वम्' में जानें ईश्वर की सर्वव्यापी उपस्थिति और उसकी आराधना का महत्व। पढ़ें संस्कृत की इस महत्वपूर्ण कथा में प्रह्लाद की कहानी और उसके संदेश।

ईशावास्यम् इदं सर्वम् का अर्थ है कि 'संपूर्ण जगत ईश्वर से भरा हुआ है।' यह विचार हमें ईश्वर की सर्वव्यापीता और उसके प्रति श्रद्धा को समझाता है।
इस अध्याय में बताया गया है कि ईश्वर केवल दया का स्वरूप नहीं है, बल्कि वह हर जीव में उपस्थित हैं। यह हमें एकता और सहिष्णुता का पाठ पढ़ाता है।
प्रह्लाद की कहानी हमें यह सिखाती है कि ईश्वर की भक्ति और विश्वास कब से शक्तिशाली होते हैं। यह दिखाता है कि ईश्वर की कृपा से किसी भी विपत्ति का सामना किया जा सकता है।
ईश्वर का सर्वत्र होना यह दर्शाता है कि वह हर स्थान, हर जीव में और हर परिस्थिति में मौजूद हैं। इससे हमें अपने आस-पास के संबंधों की गहराई समझने में मदद मिलती है।
दैत्यराज हिरण्यकश्यप का संवाद यह दर्शाता है कि अधर्म का परिणाम हमेशा बुरा होता है। यह कहानी ईश्वर के प्रति आस्था और आराधना के महत्व को उजागर करती है।
ईश्वर की आराधना का महत्व यह है कि यह हमारे मानसिक और आत्मिक विकास में सहायक होती है। इससे हम अपने जीवन में सकारात्मकता और आशा का संचार करते हैं।
सभी जीवों में एकता का संदेश यह है कि ईश्वर ने सभी को समान रूप से बनाया है। यह हमें एकता और प्रेम के आधार पर जीने की प्रेरणा देता है।
धर्म और दया का संबंध है कि धर्म का असली स्वरूप दया और करुणा है। ये मूल्य एक सामाजिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं और मानवता को जोड़ते हैं।
ईश्वर का विचार में मानव जीवन के सभी पहलुओं का समावेश होता है- नैतिकता, धर्म, करुणा, और सहिष्णुता। ये हमें एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
इस पाठ का अनुवाद स्पष्ट रूप से किसी विशेष लेखक से संबंधित नहीं है। यह सामान्य शिक्षाप्रद पाठ है, जो संस्कृत में विद्यमान है।
इस अध्याय का संदेश है कि ईश्वर सर्वत्र व्याप्त हैं और सभी जीवों का पालन करते हैं। हमें उनकी भक्ति और आराधना करनी चाहिए।
ईश्वर की दया का महत्व यह है कि यह मानवता के मूल्यों को प्रभावित करती है। दया हमें सहानुभूति और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
इस पाठ में प्रमुख विषय हैं- ईश्वर के गुण, प्रह्लाद की आराधना, हिरण्यकश्यप का संवाद, धर्म और दया, और जीवों में एकता।
कहा जाता है कि ईश्वर सर्वत्र हैं क्योंकि उनका अस्तित्व हर जगह अनुभव किया जा सकता है, चाहे वह प्रकृति में हो या हमारे अपने अनुभवों में।
इस अध्याय की प्रमुख सीख है कि ईश्वर में आस्था और भक्ति हमें जीवन के कठिनतम समय में सहारा देती है और हमें सच्चाई की ओर अग्रसर करती है।
अध्याय का अध्ययन मुख्य रूप से दार्शनिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से किया जाता है, ताकि छात्र इसकी गहरी समझ प्राप्त कर सकें।
हाँ, यह पाठ बच्चों के लिए उपयुक्त है क्योंकि यह उन्हें नैतिकता और संस्कारों की शिक्षा देता है।
ईश्वर की आराधना प्रार्थना, सुमिरन, और सेवा कार्यों के जरिए की जाती है। ये सभी तरीक़े हमें उनकी निकटता का अनुभव कराने में मदद करते हैं।
यह पाठ मुख्य रूप से कक्षा 7 के छात्रों के लिए सिखाया जाता है, परंतु इसकी शिक्षाएँ सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ईश्वर के प्रति विश्वास रखना यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति जीवन की कठिनाइयों में भी सकारात्मक रह सके और सही मार्ग पर रह सके।
धर्म और समाज के बीच गहरा संबंध है। धर्म मानवता के लिए नैतिकता और समर्पण का सूत्रधार होता है, जो सामाजिक समरसता में सहायता करता है।
संस्कृत भाषा का उपयोग इस कथानक में इसलिए किया गया है क्योंकि यह प्राचीन भारतीय शिक्षाओं और दृष्टिकोणों का अनूठा प्रतिनिधित्व करती है।

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ईशावास्यम्इदं सर्वम् Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

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