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मित्राय नमः

कक्षा 7 के पाठ "मित्राय नमः" में योगासन और उनके लाभों के बारे में चर्चा की गई है। यह अवसर प्रदान करता है कि छात्र प्रातःकाल योग का महत्व समझें।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 7
Sanskrit
Deepakam

मित्राय नमः

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More about chapter "मित्राय नमः"

पाठ 'मित्राय नमः' में प्रातःकाल योगासन की प्रथा पर ध्यान केंद्रित किया गया है। छात्रों के संवाद में विभिन्न योगासन, जैसे सूर्य नमस्कार, के महत्व का उल्लेख किया गया है। आचार्य की सहभागिता में, छात्रों ने 'ॐ तित्ाय निः' इत्यादि मंत्रों का उच्चारण किया, जो इस पाठ का अद्भुत हिस्सा है। पाठ के माध्यम से न केवल आसनों के प्रकार, बल्कि उनकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी विचार किया गया है। साथ ही, यह पाठ स्वस्थ जीवन शैली की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
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कक्षा 7: मित्राय नमः - दीपकम

कक्षा 7 का पाठ 'मित्राय नमः' में योगासन और उनके लाभों का विस्तार से विवरण दिया गया है। इस पाठ से छात्र योग के महत्व को समझ सकते हैं।

प्रातःकाल योगासन करने से शरीर की ऊर्जा जागृत होती है। यह मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है और दिनभर की चुनौतियों का सामना करने के लिए आत्मविश्वास बढ़ाता है। इसके द्वारा स्वास्थ्य को बनाए रखना संभव होता है।
सूर्य नमस्कार एक समग्र व्यायाम है जिसमें विभिन्न आसनों का संयोजन होता है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है और इसे प्रातःकाल सबसे अच्छा किया जाता है।
योगासन से शारीरिक ताकत, लचीलापन, और ताजगी बढ़ती है। यह तनाव कम करने और मानसिक स्थिति को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे व्यक्ति अधिक स्वस्थ महसूस करता है।
तित्ाय निः सूर्य की किरणों को समर्पित किया जाता है। यह मंत्र सूर्य की ऊर्जा का आदान-प्रदान करता है, जो सकारात्मकता, ऊर्जा और मानसिक स्थिरता को बढ़ावा देता है।
योगासन सीखने के लिए कुशल प्रशिक्षक से मार्गदर्शन लेना आवश्यक है। इसके अलावा, वीडियो ट्यूटोरियल्स और किताबें भी सहायक सिद्ध हो सकती हैं। निरंतर अभ्यास से आसनों में सुधार होता है।
योगासन करने का सबसे उपयुक्त समय सुबह का होता है। इस समय शारीरिक और मानसिक स्थिति सबसे बेहतर होती है, जिससे आसनों का अधिक लाभ लिया जा सकता है।
हाँ, योगासन सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए फायदेमंद हैं। हालाँकि, किसी भी स्वास्थ्य समस्या के तहत योगासन शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
योगासन से मानसिक शांति और संयम की प्राप्ति होती है। यह ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाता है और तनाव, चिंता को कम करता है। मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है।
भिन्न-भिन्न योगासनों के लाभ होते हैं, लेकिन सूर्य नमस्कार को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह सम्पूर्ण शरीर के लिए लाभकारी है और मानसिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है।
योगासन के द्वारा शरीर में लचीलापन, ताकत, और स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है और शारीरिक रूप से फिट रखने में मदद करता है।
प्रत्येक दिन योगासन करने से ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। मानसिक स्थिति सुधरती है और यह सामान्य स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह शरीर को ताजगी और खुशी प्रदान करता है।
हालांकि सूर्य नमस्कार को सुबह करना श्रेष्ठ होता है, लेकिन इसे दिन के किसी भी समय किया जा सकता है। सर्वश्रेष्ठ लाभ सुबह के समय मिलता है जब मन और शरीर तरोताजा होते हैं।
हाँ, सूर्य नमस्कार नियमित रूप से करने से वजन कम करने में मदद मिलती है। यह कसरत का एक सम्पूर्ण रूप है जो कैलोरी बर्न करने में सहायक होता है।
साधारण आसन जैसे पद्मासन शुरुआती ध्यान के लिए उपयुक्त होते हैं। यह ध्यान की स्थिति को स्थिर बनाता है और मानसिक शांति के लिए बेहतरीन है।
योगासन करते समय शारीरिक सीमाओं का ध्यान रखना आवश्यक है। धीरे-धीरे आसनों में प्रगति करें और विषम स्थितियों से बचें। उत्पन्न होने वाली किसी भी असुविधा पर ध्यान दें।
बिल्कुल, बच्चे भी योगासन कर सकते हैं। यह उन्हें लचीलापन और संयम सिखाता है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है।
योगासन हॉर्मोनल संतुलन को सुधारने में मदद करता है। यह तनाव कम करने वाले हार्मोनों के स्तर को नियंत्रित करता है और शरीर में सकारात्मक बदलाव लाता है।
विभिन्न योगासन में ताड़ासन, भुजंगासन, त्रिकोणासन, और चक्रासन शामिल हैं। ये सभी आसन शारीरिक स्वास्थ्य और लचीलापन को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।
सूर्य नमस्कार को सामान्यतः 12 बार किया जाता है, जिससे इसका संपूर्ण लाभ मिलता है। शुरुआत में कम बार करके धीरे-धीरे संख्या बढ़ाई जा सकती है।
कुछ रोगियों के लिए विशेष प्रकार के आसन उपयुक्त हो सकते हैं। इसलिए, चिकित्सीय सलाह के अनुसार आरामदायक आसनों का चयन करना चाहिए।
योगासन और प्राणायाम आपस में जुड़े हुए हैं। आसन करने से शरीर तैयार होता है, वहीं प्राणायाम श्वास पर ध्यान केंद्रित करता है। ये दोनों मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करते हैं।
योगासन को प्रतिस्पर्धात्मक रूप में नहीं किया जाना चाहिए। यह स्वास्थ्य और संतुलन के लिए होता है, न कि मुकाबले के लिए। इसमें व्यक्तिगत प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
सूर्य नमaskar करने के लिए किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है। लेकिन, एक शांत जगह, योगा मैट, और आरामदायक कपड़े पहनना उचित होता है।
योगासन के बाद गहरी श्वास लें और ध्यान लगाएँ। फिर शरीर को आराम देकर पानी पिएँ। यह पुनः ऊर्जा पाने और शांति से बैठने में मदद करती है।
योगासन में नियमितता बेहद महत्वपूर्ण है। नियमितता से शरीर में सुधार होता है और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है। यह स्वास्थ्य की दीर्घकालिक सुरक्षा में सहायक है।

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