Prānāyāma
NCERT Class 8 Physical Education and Well Being Chapter 60: Prānāyāma (Pages 214–231)
Summary of Prānāyāma
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Prānāyāma at a Glance
CBSE
Class 8
Physical Education and Well Being
Khel Yatra
60
214–231
6 study resources
Prānāyāma Summary
यह अध्याय प्राणायाम की मूल बातें समझाता है, जो कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक है। प्राणायाम का अर्थ है प्राण का नियंत्रण, जो हमारे शरीर की जीवन शक्ति है। यह सिर्फ श्वास-व्यायाम नहीं है, बल्कि यह एक सम्पूर्ण योगिक अभ्यास है जो आसनों के बाद किया जाता है। अध्याय में बताया गया है कि हमारे दैनिक व्यवहार जैसे व्यायाम, खाना, और सोचने की आदतें प्राण पर कितना प्रभाव डालती हैं। अध्याय में 'सूय बहेदना प्राणायाम' और 'चन्द्र बहेदना प्राणायाम' के विशेष अभ्यासों के बारे में विस्तृत वर्णन किया गया है। 'सूय बहेदना प्राणायाम' में दाहिनी नथुनी से श्वास लेना और बायीं नथुनी से छोड़ना शामिल है, जबकि 'चन्द्र बहेदना प्राणायाम' में बायीं नथुनी से श्वास लेना और दाहिनी नथुनी से छोड़ना होता है। इन प्राणायामों के अभ्यास से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, पाचन तंत्र बेहतर होता है, और मानसिक शांति मिलती है। अध्याय में प्राणायाम करते समय कुछ दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं, जैसे कि हमेशा नाक के माध्यम से श्वास लेना चाहिए, ठीक से बैठना चाहिए, और यदि किसी को चक्कर आता है या श्वसन संबंधी समस्या होती है, तो तुरंत शिक्षक को बताना चाहिए। इसके अलावा, अध्याय में मुद्राओं का भी उल्लेख किया गया है, जैसे कि तड़ागी मुद्रा, जो ध्यान और श्वास को एकीकृत करने में मदद करती है। मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर और मन को सांत्वना मिलती है। अंत में, अध्याय का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्राणायाम के लाभों और अभ्यास के महत्व के बारे में ज्ञान देना है, जिससे वे इसे नियमित रूप से अपने जीवन में शामिल कर सकें।
