Edzy
AI TutorResourcesToolsCompareBuy
SearchDownload AppLogin
Edzy

Edzy for Classes 6-12

Edzy is a personal AI tutor for CBSE and State Board students, with curriculum-aligned guidance, practice, revision, and study plans that adapt to each learner.

  • Email: always@edzy.ai
  • Phone: +91 96256 68472
  • WhatsApp: +91 96256 68472
  • Address: Sector 63, Gurgaon, Haryana

Follow Edzy

Browse by Class

  • CBSE Class 6
  • CBSE Class 7
  • CBSE Class 8
  • CBSE Class 9
  • CBSE Class 10
  • CBSE Class 11
  • CBSE Class 12
Explore the CBSE resource hub

Explore Edzy

  • Study Resources
  • Free Study Tools
  • Best Apps for Board Exams
  • Edzy vs ChatGPT
  • About Us
  • Why We Built Edzy
  • Blog
  • CBSE AI Tutor

Support & Legal

  • Help & FAQs
  • Accessibility
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Cookie Policy
  • Site Directory

© 2026 Edzy. All rights reserved.

Curriculum-aligned learning paths for students in Classes 6-12.

Chapter Hub

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्‍थः महान्रिपुः

विषय आलस्यं मनुष्याणां शरीरस्थः महान्रिपुः श्रिष्मं कुरु। अध्ययन करोगे और आलस्य को दूर करोगे, तो सफलता की ओर बढ़ोगे।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 6
Sanskrit
Deepakam

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्‍थः...

Download NCERT Chapter PDF for आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्‍थः महान्रिपुः – Latest Edition

Access Free NCERT PDFs & Study Material on Edzy – Official, Anytime, Anywhere

Live Challenge Mode

Ready to Duel?

Challenge friends on the same chapter, answer fast, and sharpen your concepts in a focused 1v1 battle.

NCERT-aligned questions
Perfect for friends and classmates

Why start now

Quick, competitive practice with instant momentum and zero setup.

More about chapter "आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्‍थः महान्रिपुः"

इस पाठ में आलस्य और श्रम के बीच की महत्वपूर्ण द्वंद्व को प्रस्तुत किया गया है। आलस्य मनुष्य का एक बड़ा शत्रु है, जो उसकी सफलता को प्रभावित करता है। 'आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान्रिपुः' इस विचार के माध्यम से पाठक को यह संदेश दिया गया है कि आलस्य से बचना और श्रम करना अत्यंत आवश्यक है। पाठ में उदाहरणों द्वारा बताया गया है कि किस प्रकार श्रम करने से व्यक्ति अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। इसके द्वारा माता-पिता और छात्रों को आलस्य के नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया है। यह पाठ विद्यार्थियों को आलस्य का समाधान कार्य में जुटने के लिए प्रेरित करेगा।
Learn Better On The App
Exam-ready preparation

PYQs Made Easy

Solve previous year CBSE questions in a way that feels organized and approachable.

Previous year papers
Clear practice flow

Faster access to practice, revision, and daily study flow.

Edzy mobile app preview

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान्रिपुः - Deepakam

इस पाठ में आलस्य के नकारात्मक प्रभावों और श्रम के महत्व को समझाया गया है। आलस्य से बचना और अपने कार्यों में सक्रिय रहना आवश्यक है।

आलस्य का अर्थ है किसी कार्य में रुचि न होना या कार्य न करना। यह एक गंभीर समस्या है, जो व्यक्ति की मानसिकता और कार्यकुशलता को प्रभावित करती है। लक्ष्य तक पहुँचने के लिए आलस्य को समर्पण के साथ मात देना आवश्यक है।
आलस्य के कारण व्यक्ति की कार्य क्षमता में कमी आती है, जिससे उसके लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होती है। आलस्य से मानसिक ताजगी और उत्साह में कमी आती है, जिससे व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है।
उद्यम का अर्थ है प्रयास करना और अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहना। यह सफलता की कुंजी है। उद्यम करने से व्यक्ति अपने आप को आलस्य से दूर रखता है और अपने सपनों की ओर बढ़ता है।
आलस्य के कई कारण हो सकते हैं, जैसे मानसिक तनाव, लक्ष्य का स्पष्ट न होना, या असंगतियां। जब हम अपने लक्ष्यों को स्पष्टता से नहीं समझ पाते, तब आलस्य हमें घेर लेता है।
सफलता के मार्ग में आलस्य एक बड़ा अवरोध है। यह व्यक्ति को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने से रोकता है। सफलता के लिए निरंतर प्रयास और समर्पण की आवश्यकता होती है।
आलस्य का समाधान यह है कि हमें अपनी दिनचर्या में अनुशासन लाना होगा। लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें समय पर पूरा करना आवश्यक है। सक्रिय रहने से आलस्य पर काबू पाया जा सकता है।
आलस्य केवल शारीरिक नहीं है। यह मानसिक भी हो सकता है। बेवजह के विचार या निराशात्मक सोच भी आलस्य को बढ़ावा देती है। मानसिक रूप से मजबूत रहना आवश्यक है।
महान व्यक्तियों ने अपने जीवन में अनुशासन, निरंतर प्रयास और कड़ी मेहनत करके आलस्य को मात दी। उनका उदाहरण यह सिखाता है कि आलस्य पर विजय पाने के लिए प्रयास की आवश्यकता है।
हाँ, आलस्य को हराया जा सकता है। इसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति, स्पष्ट लक्ष्य, और नियमित अभ्यास की आवश्यकता है। सकारात्मक सोच भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास, उत्साह, और काम के प्रति लगन होना आवश्यक है। अपने कार्यों में अनुशासन और नियमितता से सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
आलस्य का सीधा संबंध कार्यकुशलता से है। जब व्यक्ति आलसी होता है, उसकी कार्यकुशलता में कमी आती है और लक्ष्य प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न होती है।
श्रम का महत्व अत्यधिक है क्योंकि यह व्यक्ति को उसकी मेहनत का फल देने में मदद करता है। श्रम करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और सफलता की ओर अग्रसर होते हैं।
नकारात्मक सोच, अविश्वास और लक्ष्य की स्पष्टता का अभाव आलस्य को बढ़ावा देते हैं। यदि हम उत्साहित और सकारात्मक रहें, तो आलस्य पर काबू पा सकते हैं।
किसी भी व्यक्ति की जीवन यात्रा में कई उदाहरण हैं, जैसे कि सफल व्यक्तियों ने निरंतर प्रयास के द्वारा अपने आलस्य को पार किया। उनके अनुभव हमें प्रेरित करते हैं।
हाँ, स्कूल में आलस्य एक सामान्य बात है। लेकिन इसे समय रहते पहचान कर सही दिशा में प्रयास करने से सुधारा जा सकता है। छात्रों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
हाँ, परिवार का समर्थन और प्रोत्साहन आलस्य पर काबू पाने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सकारात्मक वातावरण बच्चो को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
समाज में आलस्य को एक नकारात्मक गुण माना जाता है। इसे सफलता के मार्ग में रुकावट के रूप में देखा जाता है। इसके खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
आलस्य से बचने के लिए स्वस्थ दिनचर्या का पालन करना, नियमित व्यायाम करना, और सकारात्मक मित्रों का सानिध्य अपनाना चाहिए। इससे मनोबल और प्रेरणा बढ़ती है।
काम करने के लिए प्रेरणा के लिए अपने लक्ष्यों को निर्धारित करना और उन्हें हासिल करने के लिए कार्य योजना बनाना आवश्यक है। सकारात्मक सोच और सफलताओं का मनन करना भी मददगार है।
आलस्य एक अभय प्रकार की मानसिकता है, जो व्यक्ति को प्रवृत्तियों से रोकती है। इसे साकारात्मक सोच और कड़ी मेहनत के माध्यम से पार किया जा सकता है।
आलस्य और प्रेरणा में स्पष्ट अंतर है। आलस्य से कार्य करने की इच्छा नहीं होती, जबकि प्रेरणा से व्यक्ति काम करने के लिए तत्पर रहता है और लक्ष्य की ओर बढ़ता है।
नहीं, आलस्य केवल छात्रों में नहीं होता। यह किसी भी आयु वर्ग के लोगों में हो सकता है। यह मुख्यतः कार्य की कमी या मानसिक दबाव के कारण होता है।
आलस्य और मानसिक स्वास्थ्य का गहरा संबंध है। यदि किसी व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो वह आलसी बन सकता है। स्वस्थ मानसिकता से आलस्य को दूर किया जा सकता है।
हाँ, आलस्य का प्रभाव सामाजिक जीवन पर भी होता है। आलसी व्यक्ति सामाजिक गतिविधियों से दूर होते हैं, जिससे समाज में उनकी पहचान कम होती है।
नियमितता आलस्य को मात देने में एक महत्वपूर्ण कारक है। एक नियमित दिनचर्या से व्यक्ति अपनी मानसिकता को मजबूत बना सकता है और आलस्य से लड़ सकता है।
आलस्य केवल कार्य करने से बचने का नाम है, जबकि आत्मसमर्पण का अर्थ है अपनी स्थिति स्वीकारने में। आलस्य से उपजी समस्याओं को सुलझाने के लिए आत्मल्लीनता आवश्यक है।

Chapters related to "आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्‍थः महान्रिपुः"

अतिथिदेवो भव

Start chapter

बुद्धिः सर्वार्थसाधिका

Start chapter

यः जानाति सः पण्डितः

Start chapter

त्वम्आपणं गच

Start chapter

पृथिव्यां त्रीणि रत्‍नान

Start chapter

माधवस्य प्रियम्अङ्गम

Start chapter

वृक्षाः सत्पुरुषाः इव

Start chapter

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्‍थः महान्रिपुः Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

Question Bank

Worksheet

Revision Guide