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हरिहर काका मिथिलेश्वर

हरिहर काका मिथिलेश्वर की एक प्रेरणादायक कहानी है, जो समाज में व्यक्तियों के संबंधों और अधिकारों की अहमियत को दर्शाती है। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता कितनी महत्वपूर्ण होती है।

Summary, practice, and revision
CBSE
Class 10
Hindi
Sanchayan - II

हरिहर काका मिथिलेश्वर

Chapter Summary

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More about chapter "हरिहर काका मिथिलेश्वर"

इस अध्याय में हरिहर काका, जो एक वृद्ध किसान हैं, की कहानी प्रस्तुत की गई है। उनके बेटे की मृत्यु के बाद, उनका परिवार उनकी देखभाल नहीं करता और काका को घर में भोजन नहीं मिलता। वह समय अधिकांशत: गाँव के चौपाल या मंदिर में बिताते हैं। मंदिर के महंत उन्हें समझाते हैं कि उनका परिवार उनकी संपत्ति हड़प लेना चाहता है, जिसके चलते काका अपनी जमीन मंदिर के नाम करने का विचार करते हैं। लेकिन परिवार की अचानक आई देखभाल से वह चकित होते हैं। काका अंततः समझते हैं कि स्वार्थी लोग केवल स्वार्थ के लिए ही सच्चे संबंध बनाते हैं, और वे अपने निर्णय स्वयं लेने का निर्णय करते हैं। यह कहानी हमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहकर अपने निर्णयों को स्वयं लेने की प्रेरणा देती है।
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कक्षा 10 - हरिहर काका मिथिलेश्वर | Sanchayan - II | हिंदी अध्याय

कक्षा 10 का हिंदी अध्याय 'हरिहर काका मिथिलेश्वर' एक प्रेरणादायक कहानी है, जो व्यक्तियों के संबंधों और अधिकारों की अहमियत को उजागर करता है।

हरिहर काका, जिनका असली नाम हरिहर प्रसाद है, एक वृद्ध किसान हैं जो अपने गाँव में रहते हैं। वे अपने अनुभवों के कारण गाँव वालों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व बन गए हैं।
हरिहर काका के दो बेटे थे जो दोनों की उच्च मृत्यु हो गई थी। अब घर में उनकी पत्नी और दो बहुएँ हैं, जो काका के प्रति उचित व्यवहार नहीं करतीं और कभी-कभी उन्हें भूखा भी रहना पड़ता है।
काका का मन घर में नहीं लगता था क्योंकि उनके परिवार वाले उनके प्रति अच्छा व्यवहार नहीं करते थे। वो अक्सर गाँव के चौपाल या मंदिर में समय बिताते थे, जहाँ उन्हें सुकून मिलता था।
मंदिर के महंत ने काका को यह सलाह दी कि उन्हें अपनी संपत्ति मंदिर के नाम कर देनी चाहिए ताकि वे भगवान की सेवा में अपनी संपत्ति लगा सकें और उनका नाम अमर हो जाए।
काका ने निर्णय किया कि वे अपनी जमीन किसी को नहीं देंगे और इसे अपने पास ही रखेंगे। उन्होंने अपने अंतिम समय तक स्वयं ही इसका उपयोग करने का मन बना लिया।
काका के निर्णय के बाद परिवार के लोग घबरा गए और उनसे अच्छा व्यवहार करने लगे, जिससे साफ था कि उनके पास अभी भी स्वार्थ पर आधारित संबंध थे।
हरिहर काका ने पारिवारिक घेराबंदी, भूख और अकेलेपन जैसी समस्याओं का सामना किया। उनके परिवार का व्यवहार उन्हें मानसिक तनाव दे रहा था।
काका की दिनचर्या में अधिकतर समय गाँव के चौपाल या मंदिर में बिताना शामिल था। वह वहाँ शांति खोजने जाते थे और मंदिर के महंत के साथ समय बिताते थे।
काका का संघर्ष अपने अधिकारों और संपत्ति को बचाने के लिए था। उन्हें अपने परिवार और मंदिर के महंत के बीच द्वंद्व का सामना करना पड़ा।
हरिहर काका को उनके असली नाम से ज्यादा उनके उपनाम 'काका' से जाना जाता था, जो उनकी सादगी और बुजुर्ग होने के कारण था। यह उनके लिए विद्यमान प्यार और सम्मान का प्रतीक था।
काका ने अपने अनुभवों से यह सीखा कि व्यक्ति को अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने चाहिए और दूसरे लोगों की बातों में आकर अपने अधिकारों को नहीं छोड़ना चाहिए।
काका को अपने परिवार का भला तभी समझ में आया जब उन्होंने देखा कि वे उनकी देखभाल करने लगे थे, लेकिन यह सब उनकी संपत्ति के चलते था।
इस कहानी का मुख्य संदेश है कि व्यक्ति को अपने स्वतंत्रता एवं अधिकारों के लिए स्वयं खड़ा होना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में अपने निर्णयों को दूसरे पर नहीं छोड़ना चाहिए।
काका के अंतिम निर्णय के बाद मंदिर के महंत और पुजारी नाराज़ हुए, वहीं परिवार वाले निराश हो गए। काका ने ठान लिया था कि अब वो अपनी संपत्ति किसी को नहीं देंगे।
काका की कहानी हमें ये सिखाती है कि हमें अपने अधिकारों के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए और दूसरों की बातों में आकर अपने जीवन के अहम फैसले नहीं छोड़ने चाहिए।
हरिहर काका कृषि का कार्य करते थे, जिससे उनकी ज़िंदगी का अधिकांश भाग मिट्टी और खेती से जुड़ा रहता था। यह उनके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा था।
काका का नाम 'काका' पड़ा क्योंकि यह शब्द उनकी उम्र और गाँव में बुजुर्ग स्वरूप दर्शाने के लिए प्रयोग होता था, और यह उनके प्रति लोगों के प्यार को भी दर्शाता है।
काका के परिवार की बहुएँ स्वार्थी थीं क्योंकि उन्होंने काका के संपत्ति के लालच में उनकी देखभाल में जरा भी रुचि नहीं दिखाई, जब तक कि उनकी संपत्ति के खतरे में होने का पता चला।
काका के यह घोषणा करने से सब चकित हुए कि वह अपनी जमीन किसी को नहीं देंगे और इसे अपने पास रखेंगे, यह निर्णय सभी के लिए आश्चर्यचकित कर देने वाला था।
काका ने अपने अनुभवों से सीखा कि लोगों के बीच जो संबंध होते हैं, वे अक्सर स्वार्थ पर आधारित होते हैं। उन्होंने अपने आत्म-निर्णय को अपनाया और किसी की बातों की परवाह न करते हुए अपने हक की रक्षा की।
हां, महंत की मीठी बातें काका को प्रभावित कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने अंत में अपने अधिकारों और संपत्ति के प्रति सजग रहकर सही निर्णय लिया।
हरिहर काका का गाँव एक समाज का प्रतीक है जहाँ संबंध, अधिकार, और पारिवारिक संघर्ष का चित्रण किया गया है, जो हमें समझाने का प्रयास करता है कि रिश्ते स्वार्थ से प्रभावित हो सकते हैं।
काका का नाम अमर करने का विचार मंदिर के महंत द्वारा सुझाया गया था, जिससे उनकी संपत्ति भक्ति में लगाई जा सके, लेकिन काका ने इसे अपनी संपत्ति के लिए खतरा समझा।

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हरिहर काका मिथिलेश्वर Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

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