रहीम के दोह
NCERT Class 6 Hindi Chapter 5: रहीम के दोह (Pages 45–50)
Summary of रहीम के दोह
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रहीम के दोह at a Glance
CBSE
Class 6
Hindi
Malhar
5
45–50
6 study resources
रहीम के दोह Summary
रहीम के दोहे का महत्व उनके गहरे अर्थ और शिक्षाओं में निहित है। ये दोहे न केवल साहित्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने में भी मदद करते हैं। जैसे पहले दोहे में कहा गया है, 'जहाँ काम आवे सूई, क्या करे तलवार', इसका अर्थ है कि हमें हर चीज का सही उपयोग करना चाहिए। कभी-कभी छोटी चीजें भी बड़े कार्य में सहायक होती हैं, जबकि बड़े उपकरण का इस्तेमाल नाजुक कार्य में नहीं किया जा सकता। दूसरे दोहे में प्रेम के धागे की महत्ता बताई गई है। 'मत तोडो हिटकाय' का अर्थ है कि प्रेम को कभी नहीं तोड़ना चाहिए। यह दिखाता है कि रिश्ते और संबंधों में समझदारी और धैर्य होना आवश्यक है। जब प्रेम का धागा टूटता है, तो उससे रिश्तों में दरार आ जाती है, और यह समझना जरूरी है कि कभी-कभी कठिनाईयों का सामना करते हुए भी धैर्य बनाए रखना चाहिए। अगले दोहे में ज्ञानी और मूर्ख का भेद बताया गया है। 'ज्ञानी गए न ऊबरै, मोती, मानव, चून' से यह स्पष्ट होता है कि ज्ञानी व्यक्ति पत्थर की तरह कठिनाइयों को सहन करते हैं, और ऐसे व्यक्ति जीवन में सफल होते हैं। जिन्हें सत्य की पहचान होती है, वही सच्चे मित्र होते हैं। 'ते ही साँचें मीत' में यह बात कही गई है। सच्चे मित्र वही होते हैं जो हमें सच्चाई का मार्ग दिखाते हैं और जीवन के असल अर्थ को समझाते हैं। आखिर में, 'अभी हबिदाका भली' का मतलब है कि हमें अच्छे कामों में संतोष होना चाहिए, चाहे वे छोटे हों या बड़े। यह हमें यह सिखाता है कि जीवन में भले काम करने से हमें संतोष और शांति मिलती है। यह अध्याय हमें सोचने और समझने के लिए प्रेरित करता है। इससे हम जीवन के सही मार्ग पर चलने, प्रेम और मित्रता को समझने और कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम बनते हैं। इस तरह, रहीम के दोहे न केवल हिंदी साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं बल्कि यह हमें नैतिक और सामाजिक मूल्यों का पाठ भी पढ़ाते हैं। इनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं, और इनको समझकर हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
