इस अध्याय में तबला और पखावज वाद्यों पर बजने वाले वर्ण और बोल के बारे में जानकारी दी गई है।
तबला एवंपखावज वाद्यों पर बजने वाले वर्ण एवं बोल - Quick Look Revision Guide
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Key Points
तबला वाद्य के 10 मुख्य वर्ण
तबले के 10 वर्ण हैं: ता, ना, जतं, जत/ते, ट/र, तू/ं, दीं, थुं, न/ता/दीं।
दायें तबले के बोल
दायें तबले पर 'ता/ना', 'ततं', 'तत/ते', 'ट/र', 'तू/ं', 'दीं/थुं/न/ता' बजाए जाते हैं।
बायें तबले के बोल
बायें तबले पर 'कत', 'के', 'तक' तथा 'घे', 'गे' बजाए जाते हैं।
संयुक्त वर्ण का महत्व
संयुक्त वर्ण 'धं' और 'जति' की विशेष सरणी होती है, जो कई ध्वनियों का उत्पादन करती हैं।
तबला पर ता/ना
तर्जनी से तबले की चाँटी पर आघात करने से 'ता' या 'ना' की ध्वनि उत्पन्न होती है।
तबला पर जतं
'जतं' ध्वनि 'तर्जनी' से तबले की लव पर आघात द्वारा बनती है।
तबला पर ट/र
'ट' और 'र' ध्वनियाँ तर्जनी से स्याषृ की मध्य भाग पर आघात करके बनती हैं।
पखावज के बोल
पखावज के चार मुख्य बोल हैं: ता, दीं, थुं, और ना।
पखावज पर ता ध्वनि
दायें हाथ से पखावज के तपाका पर आघात करने से 'ता' ध्वनि उत्पन्न होती है।
दीं और थुं का संयोजन
'दीं' और 'थुं' की ध्वनियों का संयोजन पखावज पर अनेक शैलियों में किया जाता है।
धतरधकट बोल
बायां हाथ और दाएं हाथ से संयक्त आघात से 'धतरधकट' बोल उत्पन्न होता है।
गधदगन बोल
'दी' और 'न' को जोड़कर डग्े पर बजाते समय 'गधदगन' की ध्वनि बनती है।
जतरजिट बोल
'जतरजिट' दोनों तबले पर बजता है, जो उत्तम लय में प्राप्त होता है।
ध्वनि अत्यيांतीयता
तबला एवं पखावज पर अलग-अलग ध्वनियों को अलग-अलग स्थितियों में बजाया जाता है।
वर्णों का वर्गीकरण
तबला वाद्य पर मुख्यतः 10 वर्ण और पखावज पर 7 वर्ण माने जाते हैं।
बोल का मतलब
बोल केवल परिचय नहीं बल्कि वाद्य की ध्वनि की विशेषता भी है।
याद रखने के सरल तरीके
वर्णों को सॉंग्स के लय में याद करने से आसानी होती है।
प्रमुख ध्वनियाँ
'धु', 'ग', 'जि', और 'ट' प्रमुख ध्वनियाँ मानी जाती हैं।
अभ्यास की आवश्यकता
समय पर नियमित अभ्यास से वाद्य ध्वनि में सुधार होता है।
सृजनात्मकता का महत्व
शास्त्रों से ऊपर सृजनात्मकता संगीत में महत्वपूर्ण है।
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