प्रत्यय - कृत प्रत्यय - Quick Look Revision Guide
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Complete study summary
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Key Points
संक्षेप में प्रत्यय की परिभाषा
प्रत्यय शब्द या धातु के बाद जुड़ने वाले शब्दांश होते हैं जो नए शब्द बनाते हैं।
धातु से कृत प्रत्यय
कृत प्रत्यय धातु में जोड़कर संज्ञा, विशेषण या अव्यय पद बनाते हैं।
अव्यय बनाने के विकल्प
'क्त्वा', '्यप', 'तुमुन' प्रत्यय अव्यय बनाने के लिए जोड़े जाते हैं।
कवशेषण बनाने के प्रत्यय
'शतृ', 'शान', 'तव्यत', 'अनीयर', 'यत' प्रत्यय संज्ञाएँ बनाने के लिए जुड़े जाते हैं।
कर्म के लिए 'क्त्वा' का उपयोग
कर्म के रूप में 'क्त्वा' प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण: 'दृष्ट्वा'।
घटना के लिए 'क्त' और 'क्तवत्'
'क्त' और 'क्तवत्' प्रत्यय भूतकालिक घटनाओं को व्यक्त करते हैं।
सांज्ञा बनाने के प्रत्यय
धातु से 'तृ' या 'णवुल' प्रत्यय जोड़कर सांज्ञाएँ बनती हैं।
अव्यय के रूप में 'क्त्वा'
'क्त्वा' प्रत्यय अव्यय शब्दों के रूप में भी प्रयोग होते हैं।
संकर्ता का प्रयोग
'्यप' प्रत्यय धातु के साथ मिलकर संकुचित करिया दर्शाते हैं।
कर्म के लिए 'तुमुन'
'तुमुन' प्रत्यय कर्म की संभाव्यता को दर्शाता है।
काल के लिए 'क्त'
'क्त' प्रत्यय बताता है कि कोई कार्य भूतकाल में हुआ।
कर्त्ता के विकल्प
'कर्ता' के साथ 'कर्तृ' प्रत्यय का प्रयोग कर्त्ता को दर्शाने के लिए होता है।
कर्म का प्रत्यय संयोजन
धातु में '{}कृत{}र{@}थ' जोड़कर कर्म का प्रति-रूप बनाते हैं।
अवस्था का उपयोग
कर्म के संदर्भ में 'वत्' प्रत्यय अवस्थाएँ दर्शाता है।
विनियोग में 'त्व'
'त्व' प्रत्यय का प्रयोग होकर गुण को दर्शाने के लिए होता है।
विसर्ग के लिए 'य'
'य' प्रत्यय वस्तु को दर्शाने के लिए होता है।
संवृत्ति सिद्ध करने का उपदेश
'वृत्ति' या 'कर्त्ता' पर संबंन्धित शब्द निर्मित करने में सहायक होते हैं।
विधान प्रत्यय की परिभाषा
शब्द के अंत में 'धातु' जोड़ने से वह विधानिकता को दर्शाता है।
संज्ञा का प्रयास
'वत्' और 'रीत' प्रत्यय जुड़कर संज्ञा शब्द बनाते हैं।
पारिभाषिकता का प्रयोग
गुणवत्तानुसार पहचान के लिए 'अव्यय' शब्द का प्रयोग होता है।